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Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Shepherd Disguise, Rain and an Eight-Month Hunt: ANTF Arrests Rajasthan's Top Drug Fugitive

ANTF Rajasthan: चरवाहा बना पुलिसकर्मी, बारिश बनी हथियार... ऐसे पूरा हुआ 'ऑपरेशन नीलमणि'

Thu, 09 Jul 2026 02:50 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 09 Jul 2026 02:50 PM IST
सार

आठ महीने तक पीछा, 15 दिन तक चरवाहे का भेष, घने जंगलों में गुप्त रेकी और फिर बारिश की रात। यह किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के 'ऑपरेशन नीलमणि' की असली कहानी है।

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Shepherd Disguise, Rain and an Eight-Month Hunt: ANTF Arrests Rajasthan's Top Drug Fugitive
ऑपरेशन नीलमणी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने जिस ऑपरेशन को 'नीलमणि' नाम दिया, वह केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी नहीं बल्कि महीनों की खुफिया तैयारी, धैर्य और सटीक रणनीति का उदाहरण बन गया। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी 1.84 लाख रुपये के इनामी ड्रग माफिया सुनील मीणा तक पहुंचना, जो कभी अपने घर में नहीं रुकता था और घने जंगलों को ही अपना ठिकाना बनाए हुए था।

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चरवाहा बनकर पहुंचा पुलिस का जवान

सुनील की गिरफ्तारी की सबसे अहम कड़ी वह पुलिसकर्मी था, जिसे करीब 15 दिन पहले चरवाहे का भेष देकर इलाके में भेजा गया। वह रोज मवेशी चराने के बहाने जंगलों और गांव के बीच घूमता रहा। इसी दौरान उसने सुनील के ठिकानों, जंगल के रास्तों और उसके नेटवर्क की बारीकी से जानकारी जुटाई।

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पेड़ पर गुप्त निशान से पहुंचता था खाना
रेकी के दौरान पता चला कि सुनील सीधे किसी से संपर्क नहीं करता था। गांव में रहने वाली अपनी एक महिला परिचित तक वह एक छोटे लड़के के जरिए संदेश भेजता था। जब वह जंगल में रहता, तो उसके गुर्गे एक पेड़ पर गुप्त निशान बना देते थे। उसकी पत्नी उसी निशान वाले स्थान पर खाना छोड़ जाती और साथी उसे आगे जंगल तक पहुंचा देते थे।

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बारिश ने बदल दिया पूरा खेल
7 जुलाई की शाम चरवाहे के वेश में मौजूद जवान ने देखा कि उस दिन खाना जंगल नहीं भेजा गया, बल्कि गमेरपुरा (जीरन, एमपी) स्थित  घर में दावत जैसी तैयारी चल रही थी। इससे अंदाजा लग गया कि सुनील रात में घर आने वाला है। सूचना मिलते ही एएनटीएफ की टीम ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। यही बारिश पुलिस के लिए सबसे बड़ी मददगार साबित हुई। बारिश के शोर में टीम दबे पांव घर तक पहुंच गई और सुनील को भनक तक नहीं लगी।


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ड्रम के पीछे छिपा मिला मोस्ट वांटेड
जब पुलिस ने घर पर दबिश दी तो परिवार ने पहले सुनील के वहां होने से इनकार कर दिया। लेकिन तलाशी के दौरान वह घर के अंदर रखे एक बड़े ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा मिला। गिरफ्तारी के समय उसने अपना नाम बदलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की, लेकिन पूछताछ में उसकी पहचान उजागर हो गई।

क्यों था इतना खतरनाक?
27 वर्षीय सुनील मीणा ने महज 15 साल की उम्र में डोडा-चूरा तस्करों की गाड़ियों की एस्कॉर्टिंग से अपराध की दुनिया में कदम रखा था। बाद में वह खुद अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का अहम चेहरा बन गया। राजस्थान, मध्य प्रदेश और एनसीबी में उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी समेत 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह कई बार पुलिस टीमों पर फायरिंग कर फरार भी हो चुका था।

अब खुलेंगे पूरे नेटवर्क के राज
एएनटीएफ ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि फोरेंसिक जांच से राजस्थान और मध्य प्रदेश में फैले ड्रग नेटवर्क, उसके सहयोगियों, वित्तीय लेन-देन और अन्य फरार तस्करों से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं। पुलिस अब इस गिरफ्तारी को पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की बड़ी कड़ी मान रही है।




 

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