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Satish Poonia: सतीश पूनियां को क्यों मिला BJP में प्रमोशन? संगठन में बढ़ते कद के पीछे ये बड़ी वजहें
Mon, 17 Aug 2026 04:21 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 17 Aug 2026 04:21 PM IST
सार
सतीश पूनियां को भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। हाल में राज्यसभा सांसद जैसी महत्वपूर्ण नियुक्ति और अब संगठन में बड़ी जिम्मेदारी...पूनियां को प्रमोशन पर प्रमोशन आखिर किस लिए मिल रहे हैं? जानिए इन बड़ी वजहों को...
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डॉ. सतीश पूनिया। स्रोत : पार्टी
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विस्तार
राजस्थान से राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनियां को भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया है। पूनियां के संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रबंधन में उनकी भूमिका को इस प्रमोशन की बड़ी वजह माना जा रहा है।
पूनियां फिलहाल हरियाणा भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके प्रभारी रहते हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफलता हासिल की। इस चुनावी प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय संगठन में उनकी भूमिका और मजबूत हुई।
मैनेजमेंट का अनुभव..यूपी में 90 और गुजरात में 40 सीटों की जिम्मेदारी संभाली
सतीश पूनियां को सिर्फ राजस्थान तक सीमित नेता के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन और चुनावी प्रबंधन के अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता है। राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। यूपी में करीब 90 विधानसभा सीटों पर प्रचार और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली।
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इसके बाद गुजरात विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पार्टी ने करीब 40 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी। अलग-अलग राज्यों में संगठन और चुनावी रणनीति पर काम करने के अनुभव ने राष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपयोगिता बढ़ाई।
यह भी पढें- Chittorgarh: शिक्षिका के तबादले से नाराज छात्राओं ने स्कूल गेट पर ताला जड़ा,विधायक से बातचीत के बाद मामला शांत
राजस्थान में साढ़े तीन साल तक संभाली प्रदेश अध्यक्ष की कमान
पूनियां सितंबर 2019 से मार्च 2023 तक राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। यह वह दौर था जब भाजपा राजस्थान में विपक्ष में थी। इस दौरान उन्होंने संगठन को सक्रिय रखने के साथ सरकार के खिलाफ राजनीतिक और संगठनात्मक मोर्चा मजबूत करने पर जोर दिया।
उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते निकाय चुनावों में भाजपा ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के सत्ता में होने के बावजूद भाजपा ने शहरी निकायों में बढ़त बनाई और 22 बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की। इस प्रदर्शन को भी पूनियां के संगठनात्मक प्रबंधन से जोड़कर देखा गया।
राजस्थान में ओबीसी के लिए बड़ा मैसेज
पूनियां का बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में मजबूती से आगे बढ़ना राजस्थान की सियासत पर कितना असर डालेगा यह भी देखने वाली बात होगी। पूनियां ओबीसी की सबसे बड़ी और राजनीतिक प्रतिनिधत्व के रूप से मजबूत जाट जाति से आते हैं। हाल में प्रदेश में पंचायत ओर निकाय चुनाव होने हैं। प्रदेश में ओबीसी की आबादी ढाई करोड़ से ज्यादा है।
मौजूदा समय में निकाय और पंचायतों में ओबीसी रिजर्वेशन बड़ा मुद्दा बना हुआ है।कांग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने चुनावों में ओबीसी की सीटों में कटौती की है। ऐसे में पूनियां को प्रमोशन देकर बीजेपी राजस्थान में भी मैसेज दे रही है।
इसके अलावा बीजेपी के पास अपने कैडर का कोई मजबूत जाट चेहरा भी नहीं है। जो जाट नेता बीजेपी के साथ आए हैं उनमें से ज्यादातर या तो वे दूसरी पार्टियों से शामिल किए या वे बीजेपी के सहयोगियों के तौर पर काम कर रहे हैं।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक का सफर
पूनियां ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की और लंबे समय तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा युवा मोर्चा से लेकर प्रदेश संगठन और फिर प्रदेश अध्यक्ष तक उन्होंने कई भूमिकाएं संभालीं।
वे लालकृष्ण आडवाणी की जन चेतना यात्रा और वसुंधरा राजे की स्वराज संकल्प यात्रा के समन्वयक भी रह चुके हैं। संगठन के भीतर लंबे अनुभव और चुनावी प्रबंधन की समझ ने उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय टीम के लिए मजबूत दावेदार बनाया।
राज्यसभा सांसद बनने के बाद राष्ट्रीय संगठन में प्रमोशन
इसी साल भाजपा ने पूनियां को राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया था और वे निर्विरोध निर्वाचित हुए। राज्यसभा पहुंचने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक कद में एक और बड़ा इजाफा माना जा रहा है।
यानी हरियाणा में भाजपा की चुनावी सफलता, यूपी और गुजरात में चुनावी प्रबंधन का अनुभव, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष के तौर पर लंबा संगठनात्मक कार्यकाल और लगातार पार्टी में बढ़ती जिम्मेदारियां- इन सभी को पूनियां के राष्ट्रीय महामंत्री बनने के पीछे अहम कारण माना जा रहा है।
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पूनियां फिलहाल हरियाणा भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके प्रभारी रहते हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफलता हासिल की। इस चुनावी प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय संगठन में उनकी भूमिका और मजबूत हुई।
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मैनेजमेंट का अनुभव..यूपी में 90 और गुजरात में 40 सीटों की जिम्मेदारी संभाली
सतीश पूनियां को सिर्फ राजस्थान तक सीमित नेता के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन और चुनावी प्रबंधन के अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता है। राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। यूपी में करीब 90 विधानसभा सीटों पर प्रचार और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली।
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इसके बाद गुजरात विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पार्टी ने करीब 40 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी। अलग-अलग राज्यों में संगठन और चुनावी रणनीति पर काम करने के अनुभव ने राष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपयोगिता बढ़ाई।
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राजस्थान में साढ़े तीन साल तक संभाली प्रदेश अध्यक्ष की कमान
पूनियां सितंबर 2019 से मार्च 2023 तक राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। यह वह दौर था जब भाजपा राजस्थान में विपक्ष में थी। इस दौरान उन्होंने संगठन को सक्रिय रखने के साथ सरकार के खिलाफ राजनीतिक और संगठनात्मक मोर्चा मजबूत करने पर जोर दिया।
उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते निकाय चुनावों में भाजपा ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के सत्ता में होने के बावजूद भाजपा ने शहरी निकायों में बढ़त बनाई और 22 बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की। इस प्रदर्शन को भी पूनियां के संगठनात्मक प्रबंधन से जोड़कर देखा गया।
राजस्थान में ओबीसी के लिए बड़ा मैसेज
पूनियां का बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में मजबूती से आगे बढ़ना राजस्थान की सियासत पर कितना असर डालेगा यह भी देखने वाली बात होगी। पूनियां ओबीसी की सबसे बड़ी और राजनीतिक प्रतिनिधत्व के रूप से मजबूत जाट जाति से आते हैं। हाल में प्रदेश में पंचायत ओर निकाय चुनाव होने हैं। प्रदेश में ओबीसी की आबादी ढाई करोड़ से ज्यादा है।
मौजूदा समय में निकाय और पंचायतों में ओबीसी रिजर्वेशन बड़ा मुद्दा बना हुआ है।कांग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने चुनावों में ओबीसी की सीटों में कटौती की है। ऐसे में पूनियां को प्रमोशन देकर बीजेपी राजस्थान में भी मैसेज दे रही है।
इसके अलावा बीजेपी के पास अपने कैडर का कोई मजबूत जाट चेहरा भी नहीं है। जो जाट नेता बीजेपी के साथ आए हैं उनमें से ज्यादातर या तो वे दूसरी पार्टियों से शामिल किए या वे बीजेपी के सहयोगियों के तौर पर काम कर रहे हैं।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक का सफर
पूनियां ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की और लंबे समय तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा युवा मोर्चा से लेकर प्रदेश संगठन और फिर प्रदेश अध्यक्ष तक उन्होंने कई भूमिकाएं संभालीं।
वे लालकृष्ण आडवाणी की जन चेतना यात्रा और वसुंधरा राजे की स्वराज संकल्प यात्रा के समन्वयक भी रह चुके हैं। संगठन के भीतर लंबे अनुभव और चुनावी प्रबंधन की समझ ने उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय टीम के लिए मजबूत दावेदार बनाया।
राज्यसभा सांसद बनने के बाद राष्ट्रीय संगठन में प्रमोशन
इसी साल भाजपा ने पूनियां को राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया था और वे निर्विरोध निर्वाचित हुए। राज्यसभा पहुंचने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक कद में एक और बड़ा इजाफा माना जा रहा है।
यानी हरियाणा में भाजपा की चुनावी सफलता, यूपी और गुजरात में चुनावी प्रबंधन का अनुभव, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष के तौर पर लंबा संगठनात्मक कार्यकाल और लगातार पार्टी में बढ़ती जिम्मेदारियां- इन सभी को पूनियां के राष्ट्रीय महामंत्री बनने के पीछे अहम कारण माना जा रहा है।