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‘मन की बात’: पीएम मोदी ने गोडावण संरक्षण और पवन ऊर्जा मॉडल की सराहना, कहा- राजस्थान दिखा रहा भविष्य की दिशा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Sun, 26 Apr 2026 08:19 PM IST
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सार

Jaisalmer News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में जैसलमेर के गोडावण संरक्षण प्रयासों और राजस्थान की पवन ऊर्जा प्रगति की सराहना की। इससे राज्य की पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार सृजन और सतत विकास में भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर उभरी।

PM Modi praised Great Indian Bustard conservation wind energy model Rajasthan showing direction of future
पीएम ने गोडावण संरक्षण प्रयास और पवन ऊर्जा क्षेत्र की खुलकर प्रशंसा की - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान का मरुस्थलीय इलाका एक बार फिर देशभर के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में जैसलमेर के गोडावण संरक्षण प्रयासों और राज्य में तेजी से विकसित हो रहे पवन ऊर्जा क्षेत्र की खुलकर प्रशंसा की। पीएम के इस उल्लेख ने न केवल राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की भूमिका को भी नई पहचान दी है।

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प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटरों का जिक्र करते हुए कहा कि ये प्रयास यह साबित करते हैं कि यदि वैज्ञानिक तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और स्थानीय समुदाय का सहयोग मिल जाए, तो विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी बचाया जा सकता है। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए उम्मीद की किरण बताया।
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गोडावण संरक्षण: मरुस्थल में जीवन बचाने की जंग
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण, जो राजस्थान का राज्य पक्षी है, आज दुनिया की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में गिना जाता है। कभी पश्चिमी भारत के विस्तृत घास के मैदानों में बड़ी संख्या में दिखाई देने वाला यह पक्षी अब सीमित क्षेत्रों तक सिमट गया है।

जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में संचालित ब्रीडिंग सेंटर इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सम ब्रीडिंग सेंटर और रामदेवरा सेंटर में 52 गोडावण सुरक्षित हैं। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे संरक्षण प्रयास अब जमीन पर सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।

इन केंद्रों में गोडावण के लिए कृत्रिम रूप से ऐसा वातावरण तैयार किया जाता है, जो उसके प्राकृतिक आवास जैसा हो। तापमान नियंत्रण, उपयुक्त भोजन, घास के मैदानों की उपलब्धता, शिकारियों से सुरक्षा और मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम रखना इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। चूंकि गोडावण जमीन पर घोंसला बनाता है और इसका प्रजनन चक्र बेहद संवेदनशील होता है, इसलिए इसकी सुरक्षा एक जटिल और निरंतर निगरानी वाली प्रक्रिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची बिजली लाइनों से टकराव, अवैध शिकार, बढ़ती मानवीय गतिविधियां और जलवायु परिवर्तन गोडावण के अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। ऐसे में ब्रीडिंग सेंटरों के जरिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना संरक्षण की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।

गोडावण संरक्षण की इस मुहिम में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी भी बेहद अहम रही है। वन विभाग द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों के बाद ग्रामीणों ने चराई नियंत्रण, अवैध शिकार पर रोक और सुरक्षित आवास बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई है। यही कारण है कि यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।

पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि इसी तरह निरंतर प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में गोडावण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है और यह पक्षी एक बार फिर अपने प्राकृतिक आवास में बड़ी संख्या में नजर आ सकता है।

पढ़ें- Rajasthan: कोटपूतली में 258वें दिन भी ग्रामीणों का धरना जारी, ब्लास्टिंग पर बढ़ा बवाल; क्या कर रहा प्रशासन?

पवन ऊर्जा में राजस्थान का परचम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में राजस्थान की एक और बड़ी उपलब्धि पवन ऊर्जा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत आज 56 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है और इसमें राजस्थान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पीएम ने बताया कि राजस्थान के वे इलाके, जहां कभी सिर्फ रेत के टीले नजर आते थे, आज वहां विशाल रिन्यूएबल एनर्जी पार्क स्थापित हो रहे हैं।

उन्होंने प्राचीन श्लोक ‘वायुर्वा इति व्यष्टि:, वायुरवै समष्टि:’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हवा न केवल जीवन का आधार है, बल्कि अब यह ऊर्जा का भी प्रमुख स्रोत बन चुकी है। सौर और पवन ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि देश के भविष्य की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार भी हैं।

युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर
प्रधानमंत्री ने इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ युवाओं को बताया। उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेजी से नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। नई तकनीकों और स्किल्स की मांग बढ़ रही है, जिससे युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं।

राजस्थान में विकसित हो रहे पवन और सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन हो रहा है और पलायन की समस्या में भी कमी आ रही है।

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