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Jaisalmer News: जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़, अचानक हुई मॉकड्रिल से हर कोई दिखा हैरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:12 PM IST
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सार
Jaisalmer News: जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस की बेपटरी जैसी स्थिति का भयावह दृश्य बनाकर मॉकड्रिल आयोजित की गई। दो घंटे तक चलने वाले अभ्यास में 14 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। विभिन्न एजेंसियों ने समन्वय, रिस्पॉन्स टाइम और राहत कार्य की दक्षता परखते हुए वास्तविक हादसों के लिए तैयारियों का अभ्यास किया गया।
जैसलमेर स्टेशन पर चला बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
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विस्तार
जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्टेशन में प्रवेश करते ही कंट्रोल रूम को साबरमती एक्सप्रेस के बेपटरी होने की सूचना मिली। तेज सायरन गूंजने लगे और स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों में डर फैल गया। हालांकि, कुछ ही देर बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कोई वास्तविक रेल हादसा नहीं था, बल्कि आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित सघन और सुनियोजित मॉकड्रिल थी।
भयावह हादसे जैसा तैयार किया दृश्य
मॉकड्रिल के दौरान साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बों को बेपटरी होने का यथार्थवादी दृश्य दिखाया गया। एक डिब्बा दूसरे के ऊपर चढ़ा हुआ प्रतीत कराया गया, जिससे हालात और भी गंभीर नजर आए। इसका उद्देश्य था कि वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में सभी एजेंसियां उसी मानसिक दबाव और चुनौती के तहत काम करें, जैसा असली हादसे में होता है।
सूचना मिलते ही अलर्ट मोड में आईं एजेंसियां
कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही रेलवे की स्पेशल एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (SPART) तुरंत मौके पर रवाना की गई। इसके साथ ही जिला प्रशासन को भी अलर्ट किया गया। कुछ ही समय में SDRF, NDRF, सिविल डिफेंस और अग्निशमन विभाग की टीमें एंबुलेंस, फायर टेंडर और अन्य राहत उपकरणों के साथ स्टेशन पहुंच गईं।
दो घंटे तक चला संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन
मॉकड्रिल के तहत करीब दो घंटे तक व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। गैस कटर, हाइड्रोलिक उपकरण और आधुनिक मशीनों की मदद से ट्रेन के डिब्बों की खिड़कियां और दरवाजे काटकर अंदर फंसे यात्रियों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। इस दौरान कुल 14 यात्रियों को रेस्क्यू किया गया। 6 यात्रियों की हालत गंभीर बताई गई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जवाहर अस्पताल रेफर किया गया। शेष 8 यात्रियों को मौके पर बने मेडिकल कैंप में इलाज देने के बाद छुट्टी दे दी गई।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने किया निरीक्षण
पूरे अभ्यास के दौरान जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि आपात स्थिति में निर्णय लेने और संसाधनों को तैनात करने में कितना समय लग रहा है।
समन्वय और रिस्पॉन्स टाइम पर रहा फोकस
जोधपुर रेलवे मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक (ADRM) राकेश कुमार फराड़ी ने बताया कि यह अभ्यास जोधपुर रेल मंडल और NDRF द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य रेल दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल, संचार व्यवस्था और प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) परखना था। अभ्यास के दौरान यह देखा गया कि सूचना मिलने के कितने समय बाद टीमें सक्रिय होती हैं, मौके पर पहुंचने में कितना वक्त लगता है और राहत कार्य कितनी प्रभावी ढंग से किए जाते हैं।
‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष जोर
NDRF के सेकेंड कमांडेंट विकास सिंह ने बताया कि किसी भी ट्रेन हादसे में शुरुआती एक घंटे यानी ‘गोल्डन ऑवर’ का अत्यधिक महत्व होता है। इसी समय में घायलों को सुरक्षित निकालकर इलाज मिलने पर कई जानें बचाई जा सकती हैं। अभ्यास में मशीनों की मदद से डिब्बों को काटकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसे टीमों ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मॉकड्रिल के बाद राहत की सांस
शुरुआत में घटना के भय से यात्रियों और स्थानीय लोगों में घबराहट देखी गई, लेकिन मॉकड्रिल होने की पुष्टि के बाद सभी ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने कहा कि इस तरह के अभ्यास भविष्य में होने वाली वास्तविक दुर्घटनाओं में जान-माल के नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
ये भी पढ़ें: श्मशान घाट को लेकर दो गांवों में हुआ विवाद, करीब 7 घंटे के इंतजार के बाद हुआ अंतिम संस्कार
भविष्य की आपदाओं से निपटने की तैयारी
प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मॉकड्रिल का उद्देश्य जनता को डराना नहीं बल्कि आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना है। नियमित अभ्यास से एजेंसियों की दक्षता बढ़ती है और वास्तविक हादसे की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत कार्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
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भयावह हादसे जैसा तैयार किया दृश्य
मॉकड्रिल के दौरान साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बों को बेपटरी होने का यथार्थवादी दृश्य दिखाया गया। एक डिब्बा दूसरे के ऊपर चढ़ा हुआ प्रतीत कराया गया, जिससे हालात और भी गंभीर नजर आए। इसका उद्देश्य था कि वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में सभी एजेंसियां उसी मानसिक दबाव और चुनौती के तहत काम करें, जैसा असली हादसे में होता है।
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सूचना मिलते ही अलर्ट मोड में आईं एजेंसियां
कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही रेलवे की स्पेशल एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (SPART) तुरंत मौके पर रवाना की गई। इसके साथ ही जिला प्रशासन को भी अलर्ट किया गया। कुछ ही समय में SDRF, NDRF, सिविल डिफेंस और अग्निशमन विभाग की टीमें एंबुलेंस, फायर टेंडर और अन्य राहत उपकरणों के साथ स्टेशन पहुंच गईं।
दो घंटे तक चला संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन
मॉकड्रिल के तहत करीब दो घंटे तक व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। गैस कटर, हाइड्रोलिक उपकरण और आधुनिक मशीनों की मदद से ट्रेन के डिब्बों की खिड़कियां और दरवाजे काटकर अंदर फंसे यात्रियों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। इस दौरान कुल 14 यात्रियों को रेस्क्यू किया गया। 6 यात्रियों की हालत गंभीर बताई गई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जवाहर अस्पताल रेफर किया गया। शेष 8 यात्रियों को मौके पर बने मेडिकल कैंप में इलाज देने के बाद छुट्टी दे दी गई।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने किया निरीक्षण
पूरे अभ्यास के दौरान जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि आपात स्थिति में निर्णय लेने और संसाधनों को तैनात करने में कितना समय लग रहा है।
समन्वय और रिस्पॉन्स टाइम पर रहा फोकस
जोधपुर रेलवे मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक (ADRM) राकेश कुमार फराड़ी ने बताया कि यह अभ्यास जोधपुर रेल मंडल और NDRF द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य रेल दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल, संचार व्यवस्था और प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) परखना था। अभ्यास के दौरान यह देखा गया कि सूचना मिलने के कितने समय बाद टीमें सक्रिय होती हैं, मौके पर पहुंचने में कितना वक्त लगता है और राहत कार्य कितनी प्रभावी ढंग से किए जाते हैं।
‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष जोर
NDRF के सेकेंड कमांडेंट विकास सिंह ने बताया कि किसी भी ट्रेन हादसे में शुरुआती एक घंटे यानी ‘गोल्डन ऑवर’ का अत्यधिक महत्व होता है। इसी समय में घायलों को सुरक्षित निकालकर इलाज मिलने पर कई जानें बचाई जा सकती हैं। अभ्यास में मशीनों की मदद से डिब्बों को काटकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसे टीमों ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मॉकड्रिल के बाद राहत की सांस
शुरुआत में घटना के भय से यात्रियों और स्थानीय लोगों में घबराहट देखी गई, लेकिन मॉकड्रिल होने की पुष्टि के बाद सभी ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने कहा कि इस तरह के अभ्यास भविष्य में होने वाली वास्तविक दुर्घटनाओं में जान-माल के नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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भविष्य की आपदाओं से निपटने की तैयारी
प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मॉकड्रिल का उद्देश्य जनता को डराना नहीं बल्कि आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना है। नियमित अभ्यास से एजेंसियों की दक्षता बढ़ती है और वास्तविक हादसे की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत कार्य सुनिश्चित किया जा सकता है।