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Jhalawar: जंगल से घिरे गांव से सामने आई शिक्षा की प्रेरक कहानी, खोखंदा विद्यालय का ‘सुपर थर्टी’ मॉडल बना मिसाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Dec 2025 08:14 PM IST
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सार
Jhalawar News: झालावाड़ के दूरस्थ गांव खोखंदा के सरकारी विद्यालय ने ‘सुपर थर्टी’ मॉडल से शिक्षा की नई मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों का उत्कृष्ट ज्ञान ग्रामीण शिक्षा की धारणा को बदल रहा है।
झालावाड़ का खोखंदा विद्यालय बना मिसाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों को लेकर यह आम धारणा रही है कि वहां शिक्षा का स्तर कमजोर होता है और संसाधनों की कमी बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है। लेकिन राजस्थान के झालावाड़ जिले का एक दूरस्थ गांव इस सोच को पूरी तरह बदल रहा है।
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जंगलों के बीच स्थित विद्यालय की अलग पहचान
झालावाड़ जिले का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, खोखंदा एक ऐसे गांव में स्थित है, जहां न पक्की सड़कें हैं और न ही बड़े आवागमन के साधन। चारों ओर घना जंगल और सीमित संसाधनों के बावजूद इस विद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
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प्रधानाध्यापक की पहल से शुरू हुआ ‘सुपर थर्टी’ प्रयोग
विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रेम दाधीच के नेतृत्व में यहां ‘सुपर थर्टी’ मॉडल लागू किया गया है। विद्यालय में अध्ययनरत लगभग 150 विद्यार्थियों में से कक्षा तीसरी से आठवीं तक के 30 होनहार बच्चों का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सामान्य ज्ञान और बौद्धिक क्षमता में आगे बच्चे
इन विद्यार्थियों की विशेषता यह है कि वे न केवल पाठ्यक्रम में उत्कृष्ट हैं, बल्कि सामान्य ज्ञान में भी असाधारण प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्व के देशों और राजधानियों, नवीन आविष्कारों, प्रसिद्ध पुस्तकों और लेखकों, राष्ट्रीय व राज्य प्रतीकों तथा जिलों की जानकारी ये बच्चे सहजता से प्रस्तुत कर देते हैं।
निरंतर अभ्यास और प्रशिक्षण का दिखा असर
नियमित अभ्यास, विशेष कालांश और प्रार्थना सभा के दौरान दिए जाने वाले प्रशिक्षण से बच्चों की बौद्धिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसी भी तिथि का वार निकालना भी इन विद्यार्थियों के लिए सहज कार्य बन गया है, जो उनके निरंतर अभ्यास का परिणाम है।
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निरीक्षण में अधिकारियों को भी करता है प्रभावित
जब भी शिक्षा विभाग के अधिकारी या अन्य प्रतिनिधि विद्यालय निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं, तो बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास से प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। यह विद्यालय अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन चुका है।
प्रधानाध्यापक प्रेम दाधीच का यह प्रयास दर्शाता है कि सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत से संसाधनों की कमी भी शिक्षा की प्रगति में बाधा नहीं बन सकती। खोखंदा का यह विद्यालय अब पूरे झालावाड़ जिले के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
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