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Jodhpur News: फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट को फिर लगा झटका, हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इंकार किया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: जोधपुर ब्यूरो Updated Mon, 05 Jan 2026 07:45 PM IST
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सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट की एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि मामले में पुलिस जांच जारी है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

Jodhpur News: Filmmaker Vikram Bhatt Suffers Another Setback as High Court Refuses to Quash FIR
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच से बॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को बड़ा झटका लगा है। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़े 47 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इंकार करते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल अनुबंध उल्लंघन का नहीं, बल्कि प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य का प्रतीत होता है। ऐसे में पुलिस जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
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मामला उदयपुर के भूपालपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। परिवादी डॉ. अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट, श्वेतांबरी भट्ट और अन्य सहयोगियों पर फिल्म निर्माण के नाम पर निवेश की गई राशि के गबन, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार पहले 40 करोड़ रुपये और बाद में 7 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था लेकिन इस राशि का उपयोग तय फिल्म परियोजनाओं में नहीं किया गया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि दोनों पक्षों के बीच विवाद पूरी तरह व्यावसायिक और संविदात्मक प्रकृति का है, जिसे आपराधिक रूप दिया गया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि चार में से एक फिल्म पूरी हो चुकी है और परिवादी द्वारा फाइनेंस रोके जाने के कारण अन्य प्रोजेक्ट प्रभावित हुए। साथ ही यह भी कहा गया कि समझौते के अनुसार क्षेत्राधिकार मुंबई का था न की उदयपुर का।

वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और परिवादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास बालिया ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर दर्ज करने से पहले पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विधिवत प्रारंभिक जांच की गई थी। जांच में सामने आया कि लगभग 2.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त ही अन्य खातों में डायवर्ट कर दी गई थी।

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इसके अलावा फर्जी इनवॉयस, बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए बिल और ऐसे वेंडर्स को भुगतान के संकेत मिले, जिनका फिल्म निर्माण से कोई संबंध नहीं था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से फंड के जान-बूझकर डायवर्जन, पारदर्शिता की कमी और बेईमानी की मंशा के संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर तथ्यों की गहन जांच या मिनी ट्रायल करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह तथ्य भी ध्यान में रखा कि आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही बॉम्बे हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है। इन सभी आधारों पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब एफआईआर में संज्ञेय अपराध बनता हो, तब जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। इन्हीं सारे कारणों के चलते हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए अंतरिम राहत भी समाप्त कर दी है।

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