Sonam Wangchuk Released: जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक NSA हटने के बाद जेल से रिहा, अशोक गहलोत का सरकार पर हमला
Sonam Wangchuk Released From Jail: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को केंद्र सरकार द्वारा निरोध आदेश वापस लेने के बाद शनिवार को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उन्हें 26 सितंबर 2025 को लेह में हुए प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था।
विस्तार
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा उनके निरोध आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार दोपहर करीब 1:30 बजे उन्हें जेल से रिहा किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई थी गिरफ्तारी
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर की गई थी। एनएसए के तहत तय निरोध अवधि में से वह लगभग आधा समय पहले ही जेल में बिता चुके थे।
पुलिस अधिकारी ने दी जानकारी
रतनाडा पुलिस स्टेशन के थाना अधिकारी दिनेश लाखावत ने बताया कि केंद्र सरकार से आदेश मिलने के बाद शनिवार को दोपहर करीब 1:30 बजे सोनम वांगचुक को जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो भी जोधपुर पहुंची थीं और उन्होंने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं।
वांगचुक की रिहाई पर पूर्व सीएम गहलोत का सरकार पर हमला
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि वांगचुक की रिहाई का समाचार निश्चित रूप से सुखद है, लेकिन जिस तरह उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था, वह कई सवाल छोड़ जाता है।
सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने लिखा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण स्थिति है। उनके अनुसार, जो वांगचुक कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर आवाज उठाई तो उन्हें कठोर कानूनों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। गहलोत ने कहा कि जिस व्यक्ति को कुछ माह पहले देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया, उसी व्यक्ति की अचानक रिहाई यह संकेत देती है कि उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं थे।
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जी की रिहाई का समाचार सुखद है, परंतु यह पूरा प्रकरण केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) March 14, 2026
यह कैसी विडंबना है? जो सोनम वांगचुक कभी प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठाई,…
‘170 दिन की हिरासत का हिसाब कौन देगा?’
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि वांगचुक के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले, तो उनकी लगभग 170 दिनों की हिरासत का जवाब कौन देगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था और किन आधारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसी कठोर धारा लगाई गई। गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या अब राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा भी राजनीतिक नफा-नुकसान के आधार पर तय की जाएगी। उनका कहना था कि कानूनों का इस प्रकार सुविधानुसार उपयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी लोकतंत्र में कठोर कानूनों का इस्तेमाल बेहद सावधानी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि ऐसे कानूनों का इस्तेमाल असहमति की आवाज को दबाने के लिए किया जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचता है। गहलोत ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि देश की जनता इन दोहरे मापदंडों को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
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लेह में विरोध प्रदर्शनों के बाद हुई थी कार्रवाई
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को उस समय हिरासत में लिया गया था जब लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों में 22 पुलिसकर्मियों सहित 45 से अधिक लोग घायल हुए थे।
सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया था निरुद्ध
प्रशासन के अनुसार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत निरुद्ध किया गया था। बाद में उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां से अब उन्हें रिहा कर दिया गया है।
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