सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jodhpur News ›   Jodhpur News: New Technology to Detect Diseases Through Breath, IIT Jodhpur Develops ‘Electronic Nose’

Jodhpur News: सांस की जांच से बीमारियों की पहचान करेगी नई तकनीक, IIT जोधपुर ने बनाई ‘इलेक्ट्रॉनिक नोज’

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: जोधपुर ब्यूरो Updated Wed, 11 Mar 2026 04:07 PM IST
विज्ञापन
सार

सांस के जरिए बीमारियों की पहचान अब आसान हो सकती है। आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक MEMS सेंसर और मशीन लर्निंग आधारित इलेक्ट्रॉनिक नोज तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य जांच में नई संभावनाएं खोल सकती है।
 

Jodhpur News: New Technology to Detect Diseases Through Breath, IIT Jodhpur Develops ‘Electronic Nose’
IIT जोधपुर ने विकसित की ‘इलेक्ट्रॉनिक नोज’ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

आईआईटी, जोधपुर के शोधकर्ताओं ने सांस के विश्लेषण से बीमारियों की शुरुआती पहचान करने के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक नोज तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह तकनीक MEMS आधारित सेंसर और मशीन लर्निंग की मदद से सांस में मौजूद सूक्ष्म गैसों का विश्लेषण कर स्वास्थ्य संबंधी संकेतों का पता लगाने में सक्षम होगी।

Trending Videos


इस शोध का नेतृत्व संस्थान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. साक्षी धनकर कर रही हैं। टीम MEMS और नैनो-सेंसर तकनीक का उपयोग कर ऐसे उपकरण विकसित कर रही है, जो सांस में मौजूद वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) की पहचान कर विभिन्न बीमारियों के संकेत दे सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन


शोधकर्ताओं के अनुसार मानव सांस में सैकड़ों प्रकार के VOCs पाए जाते हैं, जिनकी मात्रा शरीर की चयापचय प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है। उदाहरण के तौर पर सांस में एसीटोन का उच्च स्तर Diabetic Ketoacidosis का संकेत हो सकता है, जबकि कुछ अन्य गैस पैटर्न अस्थमा, फेफड़ों की बीमारियों और संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं।

ये भी पढ़ें: Rajasthan Tiger Reserve: कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व बनने की ओर बड़ा कदम, दो नए सफारी रूट और पैंथर सफारी की तैयारी

टीम ने पारंपरिक गैस क्रोमैटोग्राफी की जटिलता को कम करने के लिए MEMS आधारित माइक्रो-गैस क्रोमैटोग्राफी (माइक्रो-GC) सिस्टम तैयार किया है, जो सिलिकॉन चिप पर बना छोटा और पोर्टेबल उपकरण हो सकता है। भविष्य में इसे हैंडहेल्ड डायग्नोस्टिक डिवाइस के रूप में उपयोग करने की योजना है।

इसके अलावा शोधकर्ता Escherichia coli बैक्टीरिया से होने वाले मूत्र मार्ग संक्रमण की तेजी से पहचान के लिए भी नैनो-सेंसर आधारित तकनीक विकसित कर रहे हैं। वर्तमान में UTI की जांच में 2 से 3 दिन लगते हैं, जबकि नई तकनीक से तेजी से परिणाम मिलने की संभावना है।

शोध टीम का कहना है कि यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक पोर्टेबल उपकरण के रूप में विकसित हो जाती है तो भविष्य में बिना दर्द और कम खर्च में बीमारियों की जल्दी पहचान संभव होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिल सकती है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed