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एम्स जोधपुर की बड़ी कामयाबी: बिना ओपन सर्जरी के हटाया गया 10×10 सेमी का ट्यूमर, ESD तकनीक से हुआ चमत्कार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: जोधपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 12:25 PM IST
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सार
AIIMS Jodhpur: एम्स जोधपुर ने पहली बार अत्यंत जटिल एंडोस्कोपिक सबम्यूकोसल डिसेक्शन (ईएसडी) तकनीक के जरिए 10×10 सेंटीमीटर के बड़े मलाशय ट्यूमर को बिना खुली सर्जरी के सफलतापूर्वक हटाने में सफलता हासिल की है। यह पूरी प्रक्रिया संस्थान में स्वतंत्र रूप से संपन्न की गई।
एम्स जोधपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए एम्स जोधपुर ने पहली बार बिना खुली सर्जरी के 10×10 सेंटीमीटर के जटिल मलाशय ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया है। यह प्रक्रिया अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक सबम्यूकोसल डिसेक्शन (ESD) तकनीक के माध्यम से की गई, जो राज्य में उन्नत जठरांत्र उपचार की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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करीब 8 घंटे तक चली इस जटिल प्रक्रिया को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने अत्यंत सूक्ष्मता और दक्षता के साथ पूरा किया। मरीज में पाया गया ट्यूमर “लेटरली स्प्रेडिंग ट्यूमर” था, जो मलाशय की दीवार के बड़े हिस्से में फैला हुआ था। सामान्यतः ऐसे मामलों में बड़ी ओपन सर्जरी की आवश्यकता होती है।
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हालांकि, विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उच्च तकनीक वाली न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया ESD का उपयोग करते हुए पूरे ट्यूमर को एंडोस्कोपिक तरीके से सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस तकनीक के कारण मरीज को खुली सर्जरी से बचाया जा सका, अंग सुरक्षित रहा, जटिलताओं का जोखिम कम हुआ और रिकवरी भी तेज रही। उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उसे शीघ्र ही अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।
क्या बोले डॉक्टर?
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि यह सफलता संस्थान की उन्नत चिकित्सीय एंडोस्कोपी में बढ़ती विशेषज्ञता का प्रमाण है। उन्होंने संस्थान प्रशासन के सहयोग और कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदृष्टि से इस तरह की रोगी-केंद्रित आधुनिक चिकित्सा संभव हो सकी है। इस उपलब्धि के साथ एम्स जोधपुर अब राजस्थान में न्यूनतम इनवेसिव जठरांत्र प्रक्रियाओं के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान के रूप में उभर रहा है। इससे जटिल उपचारों के लिए मरीजों को राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता भी काफी हद तक कम होगी।
