Rajasthan: तीन विधायकों पर विधायक निधि रिश्वतखोरी का सनसनीखेज आरोप, बेनीवाल ने सदन में की बर्खास्तगी की मांग
Nagaur News: संसद में हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के तीन विधायकों पर विधायक निधि में रिश्वतखोरी का आरोप का मुद्दा उठाया। स्टिंग ऑपरेशन के बाद जांच जारी है, फंड फ्रीज हुए हैं और कार्रवाई को लेकर सरकार पर दबाव बना हुआ है।
विस्तार
देश की संसद में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान राजस्थान की राजनीति में भूचाल लाने वाला विधायक निधि (MLA-LAD Fund) घोटाला जोरदार तरीके से उठा। नागौर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने तीनों आरोपित विधायकों को तुरंत बर्खास्त करने की मांग रखी।
यह मामला दिसंबर 2025 में एक मीडिया संस्थान के स्टिंग ऑपरेशन "ऑपरेशन विधायक निधि" से सामने आया था, जिसमें तीन विधायकों को विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले 30-40% कमीशन मांगते हुए कैमरे में कैद किया गया। स्टिंग के बाद राजस्थान में सियासी हलचल मच गई, लेकिन अब यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है।
शून्यकाल में गूंजा रिश्वतखोरी का मुद्दा
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही शून्यकाल में हनुमान बेनीवाल ने सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान के तीन विधायक खींवसर (नागौर) से भाजपा के रेवंतराम डांगा, हिंडौन (करौली) से कांग्रेस की अनिता जाटव और बयाना (भरतपुर) से निर्दलीय ऋतु बनावत विधायक निधि से काम मंजूर करने के बदले रिश्वत और कमीशन ले रहे थे।
बेनीवाल ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन और मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट वीडियो फुटेज सामने आए हैं, जिसमें भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा कथित तौर पर 10 लाख रुपये नकद लेते दिख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ का हवाला देते हुए पूछा कि जब सत्ताधारी पार्टी के विधायक ऐसे मामलों में घिरे हों तो सरकार की मंशा पर संदेह क्यों न हो?
सांसद बेनीवाल ने सदन में जोर देकर कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों से ईमानदारी की उम्मीद करती है। लेकिन जब वही जनप्रतिनिधि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो यह लोकतंत्र की गरिमा पर चोट है और जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है।
उन्होंने केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर तीनों विधायकों को तुरंत पद से हटाने की मांग की। बेनीवाल ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
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स्टिंग ऑपरेशन में क्या सामने आया?
जानकारी के मुताबिक, अंडरकवर रिपोर्टर ने ठेकेदार बनकर इन विधायकों या उनके करीबियों से संपर्क किया। फर्म को खादी ग्रामोद्योग बोर्ड से जुड़ी और स्कूलों में दरी-फर्श सप्लाई करने वाली बताया गया। स्टिंग में निम्नलिखित आरोप दर्ज हुए-
- रेवंतराम डांगा (भाजपा, खींवसर): 50 लाख रुपये के काम पर 40% कमीशन (लगभग 20 लाख) मांगा। रिपोर्टर से 10 लाख रुपये एडवांस लिया गया (बेटे के माध्यम से)। उन्होंने अधिकारियों को "मैनेज" करने की बात भी कही।
- अनिता जाटव (कांग्रेस, हिंडौन): 80 लाख रुपये के प्रोजेक्ट की अनुशंसा के बदले 50,000 रुपये नकद लिए।
- ऋतु बनावत (निर्दलीय, बयाना): उनके पति के माध्यम से 40 लाख रुपये की डील फाइनलाइज की गई।
स्टिंग में नगद लेन-देन, सौदेबाजी और कमीशन की डील कैमरे पर रिकॉर्ड हुई। बाद में कुछ सरकारी अधिकारियों की भी 10% कमीशन मांगने की बात सामने आई।
भजनलाल सरकार ने क्या कार्रवाई की?
दावा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले को गंभीर मानते हुए "जीरो टॉलरेंस" नीति अपनाई। तीनों विधायकों के MLA-LAD फंड खाते तुरंत फ्रीज कर दिए गए। उच्च स्तरीय जांच समिति गठित: मुख्य सतर्कता आयुक्त भास्कर ए. सावंत की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी (15 दिनों में रिपोर्ट)।
SIT स्तर की जांच शुरू
मामला विधानसभा की सदाचार समिति (Ethics Committee) को सौंपा गया। भाजपा और कांग्रेस ने अपने विधायकों को शो-कॉज नोटिस जारी किया। सदाचार समिति में 19 दिसंबर 2025 को पहली पेशी और 6-7 जनवरी 2026 को दूसरी पेशी हुई। तीनों ने आरोप खारिज कर वीडियो को "डॉक्टर्ड" और "राजनीतिक साजिश" बताया। ऋतु बनावत ने CBI जांच की मांग की।
वर्तमान स्थिति (मार्च 2026 तक)
मामला अभी जांच के अधीन है। सदाचार समिति ने सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट भी लंबित है। अगर दोष सिद्ध हुआ तो तीनों विधायकों की सदस्यता पर संकट मंडरा सकता है।
यह मामला केवल तीन विधायकों तक सीमित नहीं है। यह MLA-LAD Fund (प्रत्येक विधायक को सालाना 5 करोड़ रुपये) के दुरुपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है। हनुमान बेनीवाल के संसद में मुद्दा उठाने से अब केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर दबाव बढ़ गया है।