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SC: 60 में से 47 लाख आपत्तियों का हुआ निपटारा, हाईकोर्ट ने दी जानकारी; 7 अप्रैल तक सभी मामलों पर फैसला संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:18 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बंगाल में एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इस सुनवाई में कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि राज्य में 60 में से 47 लाख आपत्तियों का निपटारा हो चुका है। उन्होंने कहा कि 7 अप्रैल तक सभी आपत्तियों का निपटारा हो जाएगा।
एसआईआर मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि मंगलवार तक 60 लाख में से 47 लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अदालत को बताया गया कि हर दिन करीब 1.75 लाख से 2 लाख आपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है और 7 अप्रैल तक सभी आपत्तियों का निपटारा कर लिया जाएगा।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट में दी ये जानकारी
वहीं, ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की दर काफी अधिक है और यह करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनलों को अपना काम करने दिया जाए, ताकि वे मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने से जुड़े मामलों का निपटारा कर सकें। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने हितों के अनुसार 100 प्रतिशत नाम शामिल करने या हटाने की मांग कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले में अगली सुनवाई 7 अप्रैल को हो सकती है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी को एक पूरक हलफनामा दाखिल कर ये बताने को कहा गया था कि एसआईआर अधिकारियों को मिली धमकियों पर उन्होंने क्या कार्रवाई की।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ एसआईआर की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायनन और कल्याण बनर्जी अदालत में पेश हुए। वहीं चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू पेश हुए।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के समय राष्ट्रपति की मौजूदगी!: जन्म आधारित नागरिकता से जुड़ा है केस, ट्रंप क्या बोले?
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वहीं, ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की दर काफी अधिक है और यह करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनलों को अपना काम करने दिया जाए, ताकि वे मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने से जुड़े मामलों का निपटारा कर सकें। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने हितों के अनुसार 100 प्रतिशत नाम शामिल करने या हटाने की मांग कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले में अगली सुनवाई 7 अप्रैल को हो सकती है।
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पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी को एक पूरक हलफनामा दाखिल कर ये बताने को कहा गया था कि एसआईआर अधिकारियों को मिली धमकियों पर उन्होंने क्या कार्रवाई की।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ एसआईआर की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायनन और कल्याण बनर्जी अदालत में पेश हुए। वहीं चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू पेश हुए।
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