रेलवे भर्ती फर्जीवाड़ा: डमी कैंडिडेट घोटाले में CBI की कार्रवाई, राजेंद्र मीणा बर्खास्त; 140 लोगों को नोटिस
Nagaur News: रेलवे भर्ती फर्जीवाड़े में डमी कैंडिडेट से नौकरी पाने का मामला उजागर हुआ। सीबीआई ने नागौर में 140 लोगों को नोटिस भेजे और जांच शुरू की। आरोपी राजेंद्र मीणा समेत दो महिलाएं बर्खास्त की गईं। रेलवे ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
विस्तार
रेलवे भर्ती में डमी उम्मीदवार के माध्यम से नौकरी हासिल करने के बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद पूरे राजस्थान में सनसनी फैल गई है। सीबीआई की जयपुर यूनिट ने इस घोटाले की गहन जांच शुरू कर दी है। टीम नागौर के सर्किट हाउस पहुंचकर पूछताछ कर रही है, जबकि 140 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। यह नोटिस उन लोगों को भेजे गए हैं, जिनका नाम राजेंद्र कुमार मीणा के साथ वित्तीय लेन-देन में सामने आया है।
सीबीआई की सख्त जांच, 140 लोगों को भेजे गए नोटिस
सीबीआई की जयपुर यूनिट के डीएसपी आशीष रस्तोगी के नेतृत्व में जांच टीम ने नागौर जिले के अलाय, भेड़ और चावंडिया गांवों के करीब 140 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि वे राजेंद्र मीणा से हुए वित्तीय लेन-देन पर अपना स्पष्टीकरण दें या बयान दर्ज कराएं। सीबीआई की टीम वर्तमान में सर्किट हाउस से पूछताछ कर रही है। इलाके में जांच को लेकर माहौल गर्म है और लोगों में भय का वातावरण है।
2013 में मिली नौकरी, 2019 में डमी कैंडिडेट से पदोन्नति परीक्षा
जांच में सामने आया है कि मामला वर्ष 2013 से जुड़ा है, जब राजेंद्र कुमार मीणा को रेलवे के ग्रुप-डी पद पर नौकरी मिली थी। वर्ष 2019 में पदोन्नति परीक्षा (CBT) के दौरान मनीष मीणा नामक युवक ने राजेंद्र की जगह परीक्षा दी। मनीष दौसा जिले की महुआ तहसील के बोरखेड़ा गांव का रहने वाला है। परीक्षा पास होने के बाद राजेंद्र मीणा को वेस्ट सेंट्रल रेलवे, कोटा मंडल में गुड्स ट्रेन गार्ड के पद पर पदोन्नति मिल गई और वह कई वर्षों तक नौकरी करता रहा।
फर्जीवाड़े का खुलासा और बर्खास्तगी
सीबीआई ने इस पूरे घोटाले में 12 जून को प्रकरण दर्ज किया। जांच में राजेंद्र मीणा दोषी पाया गया, जिसके बाद 30 जून को रेलवे प्रशासन ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। कोटा के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने पुष्टि की कि राजेंद्र को पहले निलंबित किया गया था और जांच पूरी होने पर बर्खास्त कर दिया गया।
दो महिला कर्मचारी भी फर्जीवाड़े में शामिल
इस फर्जीवाड़े में दो महिला कर्मचारी सपना मीणा और आशा मीणा का नाम भी सामने आया है। सपना मीणा टीआरडी विभाग में हेल्पर थी, जबकि आशा मीणा सोगरिया स्टेशन पर पॉइंट्सवुमन के पद पर कार्यरत थी। दोनों ने भी डमी कैंडिडेट के माध्यम से परीक्षा पास की थी। जांच में सामने आया कि इनकी जगह दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल लक्ष्मी मीणा ने परीक्षा दी थी। शिकायत सपना मीणा के पति मनीष मीणा ने की थी, जो लगातार उच्च अधिकारियों तक पहुंचते रहे। इसी शिकायत के बाद सीबीआई ने कार्रवाई शुरू की और इस दौरान राजेंद्र मीणा का नाम भी उजागर हुआ।
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भ्रष्टाचार की जड़ तक जाएगी जांच
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह जांच भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने की दिशा में बड़ा कदम है। सीबीआई टीम यह भी पता लगा रही है कि भर्ती प्रक्रिया में इस तरह के डमी कैंडिडेट नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर सक्रिय थे। वित्तीय लेन-देन से जुड़े नोटिसों को लेकर प्रभावित गांवों में लोगों में दहशत है और कई लोग अपने स्पष्टीकरण की तैयारी में जुट गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
यह मामला रेलवे भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। डमी उम्मीदवारों के माध्यम से परीक्षा पास कराना न केवल योग्य उम्मीदवारों के साथ धोखा है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। सीबीआई की जांच में आने वाले दिनों में और नाम सामने आने की संभावना है। रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
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