जैसलमेर: रेगिस्तान में ड्रोन की उड़ान, पोकरण में पहली बार ड्रोनेथॉन-2026; 60 से ज्यादा कंपनियां आमने-सामने
जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना के पहले ड्रोनेथॉन-2026 का आगाज हुआ है। 14 से 16 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में 60 से अधिक रक्षा कंपनियां, तकनीकी संस्थान और स्टार्टअप अत्याधुनिक ड्रोन, निगरानी प्रणाली, लॉजिस्टिक्स ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एआई आधारित तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
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विस्तार
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक सोमवार को ड्रोन तकनीक की ताकत देखने को मिली। जैसलमेर जिले की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना के पहले ड्रोनेथॉन-2026 का आगाज हुआ। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में देश की रक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी 60 से अधिक कंपनियां अत्याधुनिक मानवरहित ड्रोन सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन कर रही हैं। पोकरण के रेगिस्तानी इलाके में हो रहा यह आयोजन रक्षा क्षेत्र में तेजी से बदलती तकनीक, स्वदेशी क्षमता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
16 सितंबर तक चलेगा आयोजन, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी होंगे शामिल
14 से 16 सितंबर तक चलने वाले ड्रोनेथॉन में एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी शामिल होंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य मानवरहित विमान प्रणालियों यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम (यूएएस) और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस) के क्षेत्र में देश की घरेलू औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा देना है। भारतीय वायुसेना की परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी तकनीकों की पहचान, उनका प्रदर्शन और क्षमता विकास इस आयोजन के प्रमुख केंद्र में है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों और तकनीकी संस्थानों को वायुसेना की जरूरतों से जोड़ना भी है।
60 से ज्यादा कंपनियां दिखा रहीं अपनी तकनीकी क्षमता
ड्रोनेथॉन-2026 में रक्षा निर्माता कंपनियों, तकनीकी संस्थानों और उभरते स्टार्टअप्स के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। 60 से अधिक कंपनियां अपने उत्पादों और तकनीकी प्रणालियों का प्रदर्शन कर रही हैं। कंपनियों को आधुनिक ड्रोन, निगरानी प्रणालियों, एंटी-ड्रोन सिस्टम और दूसरे तकनीकी समाधानों की क्षमता विशेषज्ञों और रक्षा अधिकारियों के सामने दिखाने का मौका मिल रहा है। आयोजन में लाइव और स्टैटिक डिस्प्ले के जरिए विभिन्न प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे रक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों को इन तकनीकों की उपयोगिता, क्षमता और संभावित परिचालन भूमिका को समझने का अवसर मिलेगा। पोकरण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में इन प्रणालियों का प्रदर्शन तकनीकी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निगरानी से लॉजिस्टिक्स तक, अलग-अलग कामों में ड्रोन की भूमिका
ड्रोनेथॉन में आईएसआर यानी निगरानी, जानकारी जुटाने और टोही के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं। वहीं लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी ड्रोन के जरिए कठिन और दुर्गम इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने की क्षमता दिखाई जा सकती है। मैपिंग और सर्वेक्षण से जुड़े ड्रोन बड़े इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने, नक्शे तैयार करने और बुनियादी ढांचे का निरीक्षण करने जैसे कामों में उपयोगी हो सकते हैं। इसके अलावा लॉइटरिंग म्यूनिशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी प्रणालियां भी आयोजन का हिस्सा हैं। इन तकनीकों के प्रदर्शन से रक्षा क्षेत्र में मानवरहित प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल और उनकी अलग-अलग भूमिकाएं सामने आ रही हैं।
एंटी-ड्रोन सिस्टम भी आकर्षण का केंद्र
ड्रोनेथॉन-2026 में काउंटर-ड्रोन यानी एंटी-यूएएस तकनीक पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। इन प्रणालियों का उद्देश्य अनधिकृत या संभावित खतरा पैदा करने वाले ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को प्रदर्शित करना है।
बदलती सुरक्षा परिस्थितियों में ड्रोन के साथ-साथ उनसे बचाव की तकनीक विकसित करना भी जरूरी हो गया है। ऐसे में पोकरण में यूएएस और सी-यूएएस तकनीकों का एक साथ प्रदर्शन रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सिग्नल आधारित तकनीक और अन्य काउंटर-ड्रोन समाधानों के जरिए इस क्षेत्र में विकसित हो रही क्षमताओं को सामने लाया जाएगा।
एआई और स्वायत्त नेविगेशन से बढ़ेगी क्षमता
ड्रोनेथॉन में स्वायत्त नेविगेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वायत्त नेविगेशन ड्रोन को तय मार्ग और निर्धारित कार्यों के दौरान संचालन में मदद करता है। वहीं एआई आधारित प्रणालियां डेटा के विश्लेषण, निगरानी और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती हैं। आयोजन के दौरान इन तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल और भविष्य की संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी स्वदेशी तकनीकों की पहचान करना है, जिन्हें भविष्य में रक्षा जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा सके।
रेगिस्तान में ड्रोन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा परीक्षण
पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का रेगिस्तानी भूगोल, गर्म मौसम, तेज हवाएं और खुला इलाका मानवरहित प्रणालियों के प्रदर्शन के लिए चुनौतीपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराता है। ऐसे माहौल में ड्रोन की उड़ान, नियंत्रण, संचार, नेविगेशन और निगरानी क्षमता का प्रदर्शन तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रत्येक कंपनी के उत्पाद की वास्तविक क्षमता, परीक्षण के विस्तृत मानक और प्रदर्शन के परिणाम संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट होंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य उद्योग जगत की तकनीकों को वायुसेना की परिचालन जरूरतों से जोड़ना और स्वदेशी समाधानों के विकास को बढ़ावा देना है।
युवाओं को भी अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश
ड्रोनेथॉन का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका शैक्षणिक और सामुदायिक प्रभाव भी है। आयोजन में विद्यार्थियों और स्थानीय युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार से परिचित कराने पर जोर दिया गया है। लाइव और स्टैटिक डिस्प्ले के जरिए उन्हें ड्रोन तकनीक की संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है। ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल अब केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के निरीक्षण, मैपिंग, सर्वेक्षण और दूसरे नागरिक कार्यों में भी मानवरहित प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। ऐसे में यह आयोजन ड्रोन तकनीक के व्यापक इस्तेमाल और भविष्य की संभावनाओं को समझने का अवसर भी दे रहा है।