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कोटा: पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल को पुलिस का नोटिस, 10 नवंबर को थाने में तलब
Tue, 03 Nov 2026 05:14 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Tue, 03 Nov 2026 05:14 PM IST
सार
लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल को पुलिस ने नोटिस दिया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत जारी नोटिस में सात दिन के भीतर थाने में उपस्थित होने को कहा गया है।
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प्रहलाद गुंजल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता को कथित तौर पर धमकियां देने के मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल को नोटिस दिया है। अनंतपुरा थाने के पुलिस निरीक्षक महेश कुमार अपनी टीम के साथ कांग्रेस नेता के आवास पर पहुंचे और उन्हें नोटिस सौंपा। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35/3 के तहत नोटिस देकर सात दिन के भीतर पूछताछ के लिए थाने में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। रानपुर थाने में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन के इस मामले की जांच अनंतपुरा थाना पुलिस कर रही है।
बिना अनुमति सभा और धमकी का मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला आसूचना अधिकारी पुष्पेंद्र चौधरी की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने 21 अक्तूबर की शाम करीब सात बजे कोलाना गांव में हुई घटना के आधार पर मामला दर्ज कराया था। पुलिस के अनुसार गुंजल ने मंदिर में बिना प्रशासनिक अनुमति के सभा की, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए लोगों को उकसाया और धमकी दी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223(a), 132 और 308(2) के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने सबूत के तौर पर सभा के एक मिनट 17 सेकंड के वीडियो की पेन ड्राइव को रिकॉर्ड पर लिया है।
वायरल वीडियो में दिए गए बयान
दर्ज मामले के अनुसार वायरल वीडियो में प्रहलाद गुंजल लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता के खिलाफ टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने जनसभा के दौरान अधिकारियों पर चाटुकारिता का आरोप लगाया और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर थाना प्रभारी के पूजा करने वाले चित्र का उल्लेख किया। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता परिवर्तन होने पर वे ओएसडी की स्थिति बिगाड़ देंगे। उन्होंने क्षेत्र में जुल्म और लोगों को उजाड़ने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन करने की बात कही थी।
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पुलिस कार्रवाई पर गुंजल का पलटवार
पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रहलाद गुंजल ने कहा कि धारा 35 का नोटिस सामान्य प्रक्रिया है। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें 10 नवंबर को थाने आने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे गिरफ्तारी से नहीं डरते हैं। गुंजल ने दावा किया कि राजनीतिक दुर्भावना से काम करने वाले सभी लोगों का हिसाब-किताब होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा लगाई गई धाराएं कानूनी रूप से सही नहीं हैं क्योंकि संबंधित व्यक्ति संविदा कर्मचारी हैं और सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह वीडियो मुखबिर से मिला है जो दो वर्ष पुराना भी हो सकता है।
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बिना अनुमति सभा और धमकी का मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला आसूचना अधिकारी पुष्पेंद्र चौधरी की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने 21 अक्तूबर की शाम करीब सात बजे कोलाना गांव में हुई घटना के आधार पर मामला दर्ज कराया था। पुलिस के अनुसार गुंजल ने मंदिर में बिना प्रशासनिक अनुमति के सभा की, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए लोगों को उकसाया और धमकी दी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223(a), 132 और 308(2) के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने सबूत के तौर पर सभा के एक मिनट 17 सेकंड के वीडियो की पेन ड्राइव को रिकॉर्ड पर लिया है।
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वायरल वीडियो में दिए गए बयान
दर्ज मामले के अनुसार वायरल वीडियो में प्रहलाद गुंजल लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता के खिलाफ टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने जनसभा के दौरान अधिकारियों पर चाटुकारिता का आरोप लगाया और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर थाना प्रभारी के पूजा करने वाले चित्र का उल्लेख किया। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता परिवर्तन होने पर वे ओएसडी की स्थिति बिगाड़ देंगे। उन्होंने क्षेत्र में जुल्म और लोगों को उजाड़ने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन करने की बात कही थी।
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पुलिस कार्रवाई पर गुंजल का पलटवार
पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रहलाद गुंजल ने कहा कि धारा 35 का नोटिस सामान्य प्रक्रिया है। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें 10 नवंबर को थाने आने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे गिरफ्तारी से नहीं डरते हैं। गुंजल ने दावा किया कि राजनीतिक दुर्भावना से काम करने वाले सभी लोगों का हिसाब-किताब होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा लगाई गई धाराएं कानूनी रूप से सही नहीं हैं क्योंकि संबंधित व्यक्ति संविदा कर्मचारी हैं और सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह वीडियो मुखबिर से मिला है जो दो वर्ष पुराना भी हो सकता है।