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राजस्थान में चुनावी मुद्दा बने पाकिस्तानी हिंदू सरकार से चाहते क्या थे और मिला क्या?

Tue, 04 Dec 2018 07:06 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 04 Dec 2018 07:06 PM IST
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Rajasthan assembly election 2018: Politics on citizenship promise to Pakistani Hindu migrants
Pakistani Hindu Migrants - फोटो : BBC
राजस्थान में पाकिस्तान से आए हिन्दू अल्पसंख्यकों के पुनर्वास की मांग एक चुनावी मुद्दा बना हुआ है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने घोषणा पत्र में उनके कल्याण का वादा किया है लेकिन पाकिस्तान से भारत में नागरिकता की मुराद लेकर आए इन हिन्दुओं का कहना है भाजपा ने उन्हें निराश किया है।
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भाजपा कहती है कि कांग्रेस तो बांग्लादेशी और बर्मी घुसपैठियों के लिए आवाज उठाती रही है और उसे कब से इन हिन्दुओं की चिंता होने लगी। इन हिन्दुओं के लिए स्वर मुखरित करते रहे सीमान्त लोग संगठन के मुताबिक, पाकिस्तान से आए ऐसे सात हजार लोग हैं जो भारत की नागरिकता चाहते हैं। केंद्र ने नागरिकता के लिए प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन अब तक पांच सौ लोगों को ही भारत की नागरिकता मिल सकी है।
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नागरिकता के वादे

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में नागरिकता का वादा किया है लेकिन कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इन विस्थापितों के सर्वांगीण विकास का वचन दिया है। कांग्रेस ने इन पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए एक निकाय गठित करने का वादा किया है।राजस्थान में इससे पहले साल 2004-5 में 13 हजार पाकिस्तानी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता दी गई थी। इससे पहले भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान भी बड़ी तादाद में हिन्दू अल्पसंख्यक पनाह की गुहार करते हुए सरहद पार करके इस तरफ चले आए थे। इस तरह मरुस्थली भू भाग के जिलों में इनकी अच्छी उपस्थिति है।
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क्या कहते हैं ये लोग?

पाकिस्तान में पंजाब के रहीमयार खान जिले से आए गोविन्द भील अब भारत के नागरिक हैं। उन्हें कोई डेढ़ दशक पहले भारत की नागरिकता मिल गई थी पर अभी उनके कई नाते रिश्तेदार भारत में शरण लेने के बावजूद नागरिकता के लिए गुहार लगा रहे हैं। गोविन्द भील ने बीबीसी से कहा कि भाजपा से बड़ी उम्मीद थी लेकिन उसने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके मुकाबले कांग्रेस ने घोषणा पत्र में हमारी समस्या पर ज्यादा कुछ करने का वादा किया है। भाजपा ने हमारे पुनर्वास पर कोई खास काम नहीं किया। भील कहते हैं कि जाहिर है हमारे लोग कांग्रेस का रुख करेंगे।


सीमान्त लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा कभी खुद भी पाकिस्तान से भारत आ बसे थे।  वह कहते है कि कांग्रेस ने हमारे तमाम मुद्दों पर ठीक से अपनी प्रतिबद्धता का इजहार किया है मगर भाजपा ने इन हिंदू विस्थापितों की उपेक्षा की है। इससे हमारे लोग मायूस हुए हैं क्योंकि उन्हें भाजपा से कुछ अधिक आशाएं थीं। वे कहते है कि केंद्र सरकार ने दो साल पहले एक आदेश जारी कर इस समुदाय के पुनर्वास का निर्देश दिया था मगर इसके क्रियान्वन की रफ़्तार बेहद धीमी रही। भारतीय कानून के मुताबिक, भारत में सात साल की रिहाइश के बाद ही कोई पाकिस्तानी हिन्दू नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है।
 

वापस भेजे गए थे कई लोग

केंद्र सरकार ने इन हिंदुओं के लिए लम्बी अवधि का वीजा देने की मांग स्वीकार कर ली थी। इसके तहत उन्हें नागरिकता न मिलने के बावजूद भारत में नौकरी-व्यापार करने की छूट मिल गई थी। इन हिन्दुओं में ज्यादातर या तो दलित हैं या फिर भील आदिवासी समुदाय से हैं। इनमें से हर एक पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव की कहानी सुनाता मिलता है। पिछले साल पुलिस ने जोधपुर में एक भील परिवार के नौ सदस्यों को जबरन पाकिस्तान वापस भेज दिया था। इस पर काफी हंगामा भी हुआ था और संगठन के लोग मामले को राजस्थान हाई कोर्ट तक ले गए थे।

हाईकोर्ट ने चंदू भील और उसके परिजनों को पाकिस्तान भेजने पर रोक लगा दी थी लेकिन आदेश पर तामील होने से पहले ही अधिकारियों ने चंदू भील और परिवार को थार एक्सप्रेस से रवाना कर दिया था।
बाद में हाईकोर्ट ने स्वत: इन विस्थापितों की बेबसी का संज्ञान लिया और सरकार को जरूरी निर्देश दिए। इन हिंदुओं में से एक गोविन्द भील कहते हैं कि चंदू और उसका परिवार मिन्नतें करता रहा लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। यह पहली बार हुआ जब पनाह की फरियाद लेकर आए किसी हिन्दू को जबरन उस तरफ भेज दिया गया हो।

क्या कहती हैं पार्टियां?

राज्य कांग्रेस के सचिव सुशील असोपा कहते है कि कांग्रेस को पता है कि ये लोग कमजोर वर्गों से हैं और इनकी आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है। लिहाजा एक निकाय गठित कर इनके मुकम्मल पुनर्वास की बात की गई है।

वे कहते हैं कि बीजेपी ने इन विस्थापितों के लिए कुछ नहीं किया। इस पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है।

त्रिवेदी ने बीबीसी से कहा कि कांग्रेस ने पाकिस्तान से आए हिन्दू और सिख समुदाय के लोगों के काम में रोड़े अटकाए। चूंकि राज्यसभा में बहुमत नहीं है, इसलिए नागरिकता कानून में बदलाव नहीं हो सका। फिर भी सरकार ने वीजा नियमों में बदलाव कर इन विस्थापितों के लिए लंबी अवधि का वीजा दिया। अब वे पैन कार्ड ले सकते है, नौकरी कर सकते है, जमीन-जायदाद खरीद सकते हैं। यानी वोटिंग को छोड़कर उन्हें सभी सहूलियतें दी गई हैं।

सुधांशु त्रिवेदी कहते है कि भाजपा इस मुद्दे पर पूरी तरह संवेदनशील है और जो भी जरूरी होगा, किया जाएगा। भाजपा प्रवक्ता त्रिवेदी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि मैं पूछना चाहता हूं उन लोगों से, जिनका दिल बांग्लादेशी घुसपैठियों और बर्मा के रोहिंग्या मुसलमानों के लिए धड़कता है लेकिन पाकिस्तान से आए हिन्दू और सिखों के लिए उन्होंने न कुछ कहा, न किया।

इन पाकिस्तानी हिंदुओं का बसेरा राजस्थान के जोधपुर में है, जहां वे मुश्किल हालात में जीवन बसर कर रहे हैं। धरती दोनों तरफ एक जैसी है लेकिन एक कांटेदार बाड़ मरुस्थल पर दो देशों की सीमा रेखा बनाती है। उस तरफ भी सूरज की रोशनी है और हवा बहती है। मगर ये हिंदू विस्थापित कहते हैं कि कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, कोई यूं ही अपना घर-मकाम नहीं छोड़ता।
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