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Sawai Madhopur: जयपुर की बबीता कैसे बनी ‘खदीजा’? ATS जांच में खुल रहे आतंकी नेटवर्क के चौंकाने वाले राज

Mon, 22 Jun 2026 09:45 PM IST
सवाई ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: सवाई ब्यूरो Updated Mon, 22 Jun 2026 09:45 PM IST
सार

राजस्थान एटीएस ने जयपुर ग्रामीण क्षेत्र से बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के महिला स्लीपर सेल मॉड्यूल से जुड़ी हुई थी। पूछताछ में ऑनलाइन कट्टरपंथ, धर्म परिवर्तन, पाकिस्तानी संपर्कों और संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसे कई गंभीर पहलू सामने आने का दावा किया जा रहा है। 
 

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Babita from Gangapur City Sawai Madhopur becomes a sleeper cell
सवाई माधोपुर की बबीता पर है स्लीपर सेल होने का शक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्थान एंटी-टेररिज्म स्क्वाड ने जयपुर के ग्रामीण इलाके में जाल बिछाकर जैश-ए-मोहम्मद की कथित महिला स्लीपर सेल को दबोच लिया है। पकड़ी गई महिला बबीता धाकड़ उर्फ ‘खदीजा’ राजस्थान की ही मूल निवासी है और लंबे समय से देश विरोधी नेटवर्क के लिए काम कर रही थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी राजस्थान में आतंकवाद के बदलते स्वरूप और महिलाओं को निशाना बनाने की पाकिस्तानी साजिश का एक बड़ा प्रमाण है। आरोपी महिला सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीधे सीमा पार बैठे आकाओं के निर्देश ले रही थी।
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गंगापुर की बबीता से ‘खदीजा’ बनने तक की कहानी
सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं। बबीता धाकड़ मूल रूप से राजस्थान के करौली जिले की नादौती तहसील के गांव बमौरी की रहने वाली है। उसके पिता लालाराम धाकड़ गंगापुर सिटी की कर्मचारी कॉलोनी में रहते थे। वर्षों पहले यहां से मकान बेचकर जयपुर शिफ्ट हो गए। 
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जानकारों ने बताया कि बबीता की ससुराल हिंडौन में थी, जहां काफी समय से पति से अनबन के चलते तलाक की कार्यवाही चल रही है और बबीता अपने पिता के साथ लंबे समय से जयपुर में ही रह रही है। उसके पिता खादी विभाग में कार्यरत थे और मां का निधन हो चुका है। इसी दौरान कुछ समय पहले वह इंटरनेट पर कुछ ऐसे संदिग्ध ग्रुप्स और प्रोफाइल्स के संपर्क में आई, जो युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम करते हैं।
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ऑनलाइन ब्रेनवॉश और धर्म परिवर्तन का दावा
जांच में सामने आई मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:
  • डिजिटल ब्रेनवॉश: पाकिस्तानी हैंडलर्स ने बबीता को भारत विरोधी सामग्री और प्रोपेगैंडा वीडियो दिखाकर उसका मानसिक ब्रेनवॉश किया।
  • ऑनलाइन कलमा: पूरी तरह प्रभावित होने के बाद बबीता ने इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन कलमा पढ़ा और अपना नाम बदलकर ‘खदीजा’ रख लिया।
  • पाकिस्तानी संपर्क: धर्म परिवर्तन के बाद वह कथित रूप से जैश-ए-मोहम्मद के स्लीपर सेल मॉड्यूल के रूप में सक्रिय हो गई और देश के भीतर की संवेदनशील जानकारियां जुटाने लगी।

मोबाइल में मिले आतंकी नेटवर्क से जुड़े नंबर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एटीएस ने बबीता के पास से मिले स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों की तकनीकी फॉरेंसिक जांच शुरू की, तो देश के बड़े आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड से उसके कथित संबंध सामने आए। बबीता के मोबाइल कॉन्टैक्ट्स और चैट हिस्ट्री में भारत के सबसे वांटेड आतंकियों के करीबी नेटवर्क के नंबर सक्रिय पाए गए हैं।

दो बड़े आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव का दावा
मुख्य रूप से दो बड़े आतंकी नेटवर्कों से संबंध सामने आने का दावा किया गया है। बबीता के मोबाइल से जैश कमांडर कारी जरार के नेटवर्क के नंबर मिले हैं। कारी जरार 2016 में जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में हुए भारतीय सेना के कैंप पर आत्मघाती हमले का मुख्य आरोपी माना जाता है। इसके अलावा उसके फोन से कुख्यात आतंकी मसूद अजहर के साले यूसुफ अजहर उर्फ गोरी के नेटवर्क के नंबर भी मिले हैं। यूसुफ अजहर 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 के अपहरण की साजिश में शामिल रहा था।

क्या पाकिस्तान भागने की थी तैयारी?
खुफिया एजेंसियों की इस कार्रवाई से जैश-ए-मोहम्मद द्वारा हाल ही में शुरू की गई एक नई और खतरनाक रणनीति का भी खुलासा होने का दावा किया जा रहा है। जैश ने भारत में सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए अपनी एक विशेष महिला विंग शुरू की है, जिसे ‘जमात-उल-मुमिनात’ नाम दिया गया है।

महिलाओं को बनाया जा रहा था निशाना!
इस विंग का मुख्य काम भारत के भीतर रहने वाली महिलाओं और युवतियों को ऑनलाइन माध्यमों से ढूंढना, उन्हें कट्टरपंथी बनाना और फिर उन्हें स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल करना बताया जा रहा है। बबीता इसी विंग की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी थी। जांच एजेंसियों के अनुसार वह लगातार भारत विरोधी साजिशों को अंजाम दे रही थी और सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आने से पहले ही भारत की सीमा लांघकर पाकिस्तान भागने की फिराक में थी, जिसके लिए उसके पाकिस्तानी आकाओं ने कथित तौर पर पूरा रूट मैप तैयार कर लिया था।

राजस्थान में स्थानीय मददगारों की तलाश तेज
वर्तमान में मिलिट्री इंटेलिजेंस और राजस्थान एटीएस की संयुक्त टीमें बबीता उर्फ खदीजा को एक अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर रखकर लगातार पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि बबीता ने जयपुर ग्रामीण, सवाई माधोपुर या सेना के अन्य ठिकानों के आसपास रहकर अब तक कितनी संवेदनशील, रणनीतिक और गोपनीय सूचनाएं सीमा पार भेजी हैं।


यह भी पढ़ें: कोटा-बीकानेर के बाद अब जयपुर पर सवाल! महिला अस्पताल में जमीन पर बैठी मिली प्रसूता, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

इसके साथ ही राजस्थान पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि प्रदेश के भीतर बबीता को लॉजिस्टिकल सपोर्ट, इंटरनेट डेटा, फर्जी सिम कार्ड या वित्तीय मदद पहुंचाने वाले स्थानीय मददगार कौन हैं। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क से कुछ और स्थानीय लोग जुड़े हो सकते हैं, जिनकी धरपकड़ के लिए एटीएस की टीमें अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं।
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