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Sikar News: खाटूश्यामजी में फाल्गुनी लक्खी मेले का समापन, सूरजगढ़ का निशान चढ़ाया गया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
Published by: सीकर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Mar 2025 04:43 PM IST
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सार
खाटूश्यामजी के वार्षिक फाल्गुनी मेले का समापन हो गया है। बाबा के शिखर बंद पर सूरजगढ़ का निशान फहराया गया। मेले के दौरान बाबा श्याम का अलौकिक शृंगार किया गया।
खाटूश्यामजी में फाल्गुनी लक्खी मेले का समापन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीकर जिले के खाटूश्यामजी में हर वर्ष आयोजित होने वाले वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेले का आज समापन हो गया। 12 दिन तक चले इस मेले में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और लाखों भक्तों ने बाबा श्याम के दर्शन कर पुण्य प्राप्त किया। मेले का समापन सूरजगढ़ के निशान चढ़ने के साथ हुआ, जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
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फाल्गुनी लक्खी मेला हर साल फाल्गुन माह की द्वादशी तिथि को समाप्त होता है। इस दिन सूरजगढ़ का निशान बाबा श्याम के मंदिर में चढ़ाया जाता है और इस परंपरा को लेकर यहां हर साल भक्तों का हुजूम जुटता है। मंगलवार सुबह सूरजगढ़ का 377वां निशान मंदिर के शिखर पर चढ़ाया गया। यह निशान श्याम दरबार के मंदिर पर चढ़ाने के साथ ही मेले के समापन की औपचारिकता पूरी हो गई।
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समापन समारोह के दौरान सूरजगढ़ श्याम दरबार के मुख्य पुजारी हजारी प्रसाद इंदौरिया ने अपने नेतृत्व में सफेद ध्वज चढ़ाया। यह सफेद ध्वज श्याम बाबा के निशान के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसे चढ़ाने के बाद ही यह माना जाता है कि मेले का आधिकारिक समापन हो गया है।
प्राचीन समय से चली आ रही सूरजगढ़ का निशान चढ़ाने की परंपरा
निशान चढ़ाने की परंपरा सालों से चली आ रही है। इस निशान में नील घोड़े की तस्वीर अंकित होती है, जो श्याम बाबा के दर्शन की प्रतीक मानी जाती है। इसे शुद्धता और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस निशान को बड़े श्रद्धा भाव से देखते हैं और मानते हैं कि यह बाबा श्याम का आशीर्वाद लेकर आता है।
मेला क्षेत्र में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और आयोजन की भव्यता को देखकर यह कहा जा सकता है कि इस मेले का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। भक्तों का कहना है कि इस मेले में शामिल होने से न केवल वे बाबा श्याम के दर्शन करते हैं। बल्कि उनका मन भी शांति और संतोष से भर जाता है।
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इस बार के फाल्गुनी लक्खी मेले में कई धार्मिक अनुष्ठान, भजन संध्या तथा श्याम भक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। भक्तों ने ढेर सारी श्रद्धा और आस्था के साथ इन आयोजनों में भाग लिया। विशेष रूप से खाटूश्यामजी के मुख्य मंदिर में प्रत्येक दिन विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने श्याम बाबा के चरणों में अपनी आस्थाएं अर्पित कीं।

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