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Sirohi: खनन परियोजना के खिलाफ जनआंदोलन तेज, 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन का एलान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Thu, 15 Jan 2026 04:33 PM IST
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सार

Sirohi: सिरोही जिले में प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ पिछले चार महीनों से चल रहा जनआंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। ग्रामीणों ने 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन शुरू करने का एलान किया है।  ग्रामीणों का कहना है कि यह खनन परियोजना ग्रामीण जीवन की पूरी संरचना को नष्ट कर देगी।

Public movement against mining project intensifies in Sirohi indefinite mass protest announced January 28
सिरोही। प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर जनाक्रोश की अनदेखी पर जताया रोष, 28 जनवरी से अनिश्चितका
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विस्तार
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सिरोही जिले की चार ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले करीब एक दर्जन गांवों में प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ चल रहा जनआंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले लगभग चार महीनों से लगातार जारी विरोध के बाद क्षेत्रवासियों ने 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन शुरू करने का एलान किया है। आंदोलन को लेकर गांव-गांव बैठकों, जनसंपर्क और रणनीति निर्माण का सिलसिला तेज हो गया है।
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प्रशासन की चुप्पी से गुस्से में ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि यह खनन परियोजना न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि खेती, जल स्रोतों, चारागाह और ग्रामीण जीवन की पूरी संरचना को नष्ट कर देगी। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की चुप्पी से लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।
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भीमाना से शुरू हुआ था आंदोलन
खनन परियोजना के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत भीमाना गांव से हुई थी, जहां ग्रामीणों ने एकजुट होकर धरना दिया। इसके बाद पिंडवाड़ा उपखंड कार्यालय का घेराव किया गया, जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ हजारों ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान खनन परियोजना निरस्त करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गई। इसके बाद से क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लगातार धरने, जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

बिना जानकारी आगे बढ़ाई गई परियोजना 
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि खनन परियोजना को जनता को अंधेरे में रखकर आगे बढ़ाया गया। ग्रामीणों को इसकी जानकारी 19 सितंबर 2025 को भीमाना ग्राम पंचायत में आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई के दौरान मिली। इससे पहले न तो ग्राम सभाओं में कोई चर्चा हुई और न ही ग्रामीणों से सहमति ली गई। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और कंपनी की मिलीभगत से प्रक्रिया चुपचाप आगे बढ़ाई गई, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

800 हेक्टेयर से अधिक भूमि खनन के लिए प्रस्तावित
प्रस्तावित खनन क्षेत्र का कुल रकबा 800.9935 हेक्टेयर है। इसमें से 551.9535 हेक्टेयर निजी खातेदारी भूमि, 227.95 हेक्टेयर सरकारी भूमि और 21.09 हेक्टेयर चरागाह भूमि शामिल है। यह भूमि वर्षों से खेती, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका का मुख्य आधार रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश भूमि सिंचित और उपजाऊ है, लेकिन कंपनी के प्रस्ताव में इसे असिंचित दर्शाया गया है।

जनसुनवाई में विरोध, सहमति पत्रों पर फर्जीवाड़े का आरोप
19 सितंबर 2025 को हुई पर्यावरण जनसुनवाई में कंपनी के पक्ष में एक भी सहमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके विपरीत, ग्रामीणों की ओर से 100 से अधिक लिखित आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। बाद में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों में कंपनी के पक्ष में कई सहमति पत्र सामने आए, जिन पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप है। इस संबंध में रोहिड़ा और स्वरूपगंज थानों में शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों पर कार्रवाई न होना और आंदोलनकारियों को परेशान किया जाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। लोगों का कहना है कि कंपनी को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि जनता की आवाज को दबाया जा रहा है।

महाआंदोलन से पहले वाहन रैली
28 जनवरी से पहले क्षेत्र में व्यापक वाहन रैली निकाली जाएगी, जो सिरोही जिले के गांव-ढाणियों तक पहुंचेगी। रैली के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि खनन परियोजना किस प्रकार जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा सकती है, खेती प्रभावित कर सकती है और जंगलों को उजाड़ सकती है।

जनप्रतिनिधियों के आश्वासन अधूरे
अजारी में हुए घेराव के दौरान भाजपा विधायक और सांसद ने परियोजना की जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन चार महीने बीतने के बावजूद कोई जांच शुरू नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन पिंडवाड़ा एसडीएम, वन विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है।

आंदोलन के बाद प्रशासन की सक्रियता, नोटिसों पर सवाल
28 जनवरी के आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से वाटेरा गांव में 37 परिवारों को भू-राजस्व अधिनियम 1956 के तहत अतिक्रमण नोटिस जारी किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि ये मकान दशकों पुराने, पट्टासुदा और रजिस्ट्रीशुदा हैं, जिनमें बिजली-पानी कनेक्शन और सीसी सड़कें मौजूद हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि यह अतिक्रमण था, तो दशकों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

सीमेंट प्लांट को लेकर विरोधाभासी दावे
जनसुनवाई के दौरान कंपनी प्रतिनिधियों ने किसी भी सीमेंट प्लांट योजना से इनकार किया था, लेकिन दस्तावेजों में तत्कालीन एडीएम द्वारा सीमेंट प्लांट के लिए भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश सामने आए हैं। आरोप है कि जनसुनवाई के बाद एक जैसे प्रारूप और समान तिथि वाले सहमति पत्र जोड़े गए। वाटेरा में भाजपा संगठन के जिला मंत्री पवन राठौड़ द्वारा भरी सभा में “500 करोड़ रुपये देकर मुंह बंद कराने” का आरोप भी लगाया गया, लेकिन इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

किसी भी कीमत पर परियोजना नहीं होने देने का संकल्प
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई अंतिम दम तक लड़ी जाएगी। क्षेत्र की जनता पूरी तरह एकजुट है और किसी भी सूरत में इस खनन परियोजना को लागू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही, तो आंदोलन और अधिक व्यापक और उग्र रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

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पूर्व में दी जा चुकी है चेतावनी
18 दिसंबर को स्वरूपगंज में राष्ट्रीय पशुपालक संघ द्वारा परियोजना निरस्तीकरण की मांग को लेकर रैली और आंदोलन किया गया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका ने चेतावनी दी थी कि यदि परियोजना निरस्त नहीं हुई, तो 28 जनवरी को महाआंदोलन किया जाएगा। इसके बाद कई जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर परियोजना निरस्त करने की मांग की। क्षेत्र के सभी समाजों ने बैठकों के माध्यम से आंदोलन को समर्थन दिया है।
 
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