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Sirohi News: 11 बहनों के इकलौते भाई की जैन दीक्षा कल, 30 साल की उम्र में सांसारिक जीवन त्यागकर बनेंगे मुनिराज
Fri, 26 Jun 2026 08:43 PM IST
सिरोही ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
Published by: सिरोही ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 08:43 PM IST
सार
11 बहनों के इकलौते भाई 30 वर्षीय हर्षित जितेंद्र संघवी अब संयम का मार्ग अपनाने जा रहे हैं। 27 जून को होने वाली जैन दीक्षा से पहले सिरोड़ी में तीन दिवसीय जिनवर पथ प्रयाण रत्नत्रयी महामहोत्सव का शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ।
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30 साल के हर्षित कल लेंगे जैन दीक्षा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संयम जीवन ग्रहण करने जा रहे 30 वर्षीय हर्षित जितेंद्र संघवी के जिनवर पथ प्रयाण रत्नत्रयी महामहोत्सव की शुरुआत आज से गुरु भगवंतों के सिरोड़ी में मंगल प्रवेश के साथ हुई। कांडला हाईवे मार्ग पर स्थित सिरोड़ी गांव में आयोजित इस तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव के दौरान 11 बहनों के इकलौते भाई हर्षित संघवी 27 जून को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे। हर्षित संघवी को पावापुरी तीर्थ में सूरीमंत्र आराधक आचार्य रविरत्नसूरी एवं आचार्य जयेशरत्नसूरी ने उनके गृह ग्राम सिरोड़ी में दीक्षा प्रदान करने के लिए 27 जून का शुभ मुहूर्त दिया था।
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भव्य वरघोड़ा समारोह
- फोटो : अमर उजाला
वरघोड़े के साथ हुआ भव्य स्वागत
महोत्सव के पहले दिन दादा शांतिलाल पूनमचंद संघवी और दादी लीलाबेन संघवी की ओर से गांव में भव्य वरघोड़ा निकाला गया। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक उत्साह के बीच हर्षित संघवी का भावभीना स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। पूरे गांव में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। हर्षित 11 बहनों के इकलौते भाई हैं। उनकी एक बहन करीब 13 वर्ष पहले दीक्षा लेकर साध्वी बन चुकी हैं, जिनका नाम साध्वी श्रुतरेखाश्रीजी है।
महोत्सव के पहले दिन दादा शांतिलाल पूनमचंद संघवी और दादी लीलाबेन संघवी की ओर से गांव में भव्य वरघोड़ा निकाला गया। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक उत्साह के बीच हर्षित संघवी का भावभीना स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। पूरे गांव में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। हर्षित 11 बहनों के इकलौते भाई हैं। उनकी एक बहन करीब 13 वर्ष पहले दीक्षा लेकर साध्वी बन चुकी हैं, जिनका नाम साध्वी श्रुतरेखाश्रीजी है।
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दीक्षा का मुहूर्त पत्र
- फोटो : अमर उजाला
धर्म अध्ययन और तपस्या में बिताया जीवन
अहमदाबाद और सिरोड़ी में दवा व्यवसाय से जुड़े हर्षित संघवी का परिवार धार्मिक संस्कारों वाला रहा है। बचपन से ही धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था रही। उन्होंने जैन दर्शन और आध्यात्मिक साहित्य का व्यापक अध्ययन किया, जिसमें पंच प्रतिक्रमण, चार प्रकरण, त्रण भाष्य, दो कर्म ग्रंथ, वैराग्य शतक, संस्कृत ग्रंथ, इन्द्रिय पराजय शतक, प्रशमरति और श्रमण क्रिया सूत्र शामिल हैं।
चारित्र आराधना के लिए उन्होंने उपधान तप, 64 प्रहरी पौषध, विहार यात्राएं, नवाणु यात्रा और छरि पालित संघ यात्राएं कीं। इसके अलावा श्री शत्रुंजयजी, गिरनारजी, शंखेश्वरजी, सम्मेद शिखरजी, अर्बुदगिरि महातीर्थ, 199 कल्याणक भूमियों तथा कुलपाकजी सहित अनेक प्रमुख जैन तीर्थों की यात्राएं कर आध्यात्मिक साधना की। दीक्षा से पूर्व उन्होंने सिद्धितप, वर्धमान तप की 17 ओलियां, भक्तामर तप तथा 11, 8 और 6 उपवास जैसी कठोर तपस्याएं भी की हैं।
अहमदाबाद और सिरोड़ी में दवा व्यवसाय से जुड़े हर्षित संघवी का परिवार धार्मिक संस्कारों वाला रहा है। बचपन से ही धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था रही। उन्होंने जैन दर्शन और आध्यात्मिक साहित्य का व्यापक अध्ययन किया, जिसमें पंच प्रतिक्रमण, चार प्रकरण, त्रण भाष्य, दो कर्म ग्रंथ, वैराग्य शतक, संस्कृत ग्रंथ, इन्द्रिय पराजय शतक, प्रशमरति और श्रमण क्रिया सूत्र शामिल हैं।
चारित्र आराधना के लिए उन्होंने उपधान तप, 64 प्रहरी पौषध, विहार यात्राएं, नवाणु यात्रा और छरि पालित संघ यात्राएं कीं। इसके अलावा श्री शत्रुंजयजी, गिरनारजी, शंखेश्वरजी, सम्मेद शिखरजी, अर्बुदगिरि महातीर्थ, 199 कल्याणक भूमियों तथा कुलपाकजी सहित अनेक प्रमुख जैन तीर्थों की यात्राएं कर आध्यात्मिक साधना की। दीक्षा से पूर्व उन्होंने सिद्धितप, वर्धमान तप की 17 ओलियां, भक्तामर तप तथा 11, 8 और 6 उपवास जैसी कठोर तपस्याएं भी की हैं।
तीन दिवसीय दीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
तीन दिवसीय महोत्सव का कार्यक्रम
महोत्सव के पहले दिन सुबह 7 बजे गुरु भगवंतों का मंगल प्रवेश एवं सामैया, सुबह 9 बजे शक्रस्तव अभिषेक, दोपहर 1 बजे 'मामा लाव्या मामेरो' कार्यक्रम, दोपहर 2 बजे हल्दी समारोह, शाम 4 बजे श्रमण वेश रंगने का कार्यक्रम, गीत-सांझी एवं मेहंदी, शाम 7:30 बजे जिनवर जुहार एवं आरती तथा रात 8 बजे बांदोली और 8:30 बजे माता-पिता वंदनावली का आयोजन किया गया।
महोत्सव के पहले दिन सुबह 7 बजे गुरु भगवंतों का मंगल प्रवेश एवं सामैया, सुबह 9 बजे शक्रस्तव अभिषेक, दोपहर 1 बजे 'मामा लाव्या मामेरो' कार्यक्रम, दोपहर 2 बजे हल्दी समारोह, शाम 4 बजे श्रमण वेश रंगने का कार्यक्रम, गीत-सांझी एवं मेहंदी, शाम 7:30 बजे जिनवर जुहार एवं आरती तथा रात 8 बजे बांदोली और 8:30 बजे माता-पिता वंदनावली का आयोजन किया गया।
11 बहनों के इकलौते भाई हैं हर्षित
- फोटो : अमर उजाला
आबूगोड जैन समाज को दिया आमंत्रण
जैन ट्रस्ट एवं पंच महाजन जैन संघ सिरोड़ी के तत्वावधान में आयोजित इस त्रि दिवसीय महोत्सव के लिए संघवी परिवार ने समूचे आबूगोड जैन समाज को आमंत्रित किया है। आयोजक शांतिलाल संघवी, जितेंद्र कुमार, नरेश कुमार, विमल, कमल तथा हिरीबाई पूनमचंदजी परिवार ने बताया कि सिरोड़ी गांव के लिए यह गौरव का विषय है कि आबूगोड क्षेत्र के प्रथम दीक्षार्थी हर्षित संघवी को प्रथम आचार्य भगवंत आचार्य रविरत्नसूरीजी महाराज के सान्निध्य में जैन दीक्षा प्राप्त होगी।
जैन ट्रस्ट एवं पंच महाजन जैन संघ सिरोड़ी के तत्वावधान में आयोजित इस त्रि दिवसीय महोत्सव के लिए संघवी परिवार ने समूचे आबूगोड जैन समाज को आमंत्रित किया है। आयोजक शांतिलाल संघवी, जितेंद्र कुमार, नरेश कुमार, विमल, कमल तथा हिरीबाई पूनमचंदजी परिवार ने बताया कि सिरोड़ी गांव के लिए यह गौरव का विषय है कि आबूगोड क्षेत्र के प्रथम दीक्षार्थी हर्षित संघवी को प्रथम आचार्य भगवंत आचार्य रविरत्नसूरीजी महाराज के सान्निध्य में जैन दीक्षा प्राप्त होगी।