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Rajasthan: देश से अलग है वागड़ की श्रावण परंपरा, एक महीने नहीं...यहां पूरे 45 दिन गूंजता है 'हर-हर महादेव'

Mon, 03 Aug 2026 12:05 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो Updated Mon, 03 Aug 2026 12:05 PM IST
सार

बांसवाड़ा और डूंगरपुर के वागड़ अंचल में श्रावण मास की शुरुआत हरियाली अमावस्या से मानी जाती है, जिससे यहां श्रावण का पर्व करीब डेढ़ माह तक मनाया जाता है। पहले सोमवार को मंदारेश्वर शिव मंदिर में महाकाल की तर्ज पर भस्म आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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Rajasthan Unique Tradition Vagar Region Celebrates 45-Day Long Shravan Festival
महाकाल की तर्ज पर मंदारेश्वर शिव मंदिर में भस्म आरती के बाद श्रृंगारित शिवलिंग - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान के वागड़ अंचल, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले में श्रावण मास को लेकर देशभर से अलग परंपरा है। भारत के अधिकांश हिस्सों में श्रावण मास आषाढ़ पूर्णिमा के बाद शुरू हो गया है और आज श्रावण के पहले सोमवार को शिवालयों में शिवभक्त उमड़ रहे हैं। वहीं, वागड़ क्षेत्र में डेढ़ माह तक श्रावण माह की धूम रहती है।
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डेढ़ महीने तक श्रद्धा, अनुष्ठान और भक्ति में लीन रहते हैं शिवभक्त
परंपरागत रूप से वागड़ में श्रावण मास हरियाली अमावस्या से शुरू होता है, लेकिन अब स्थानीय लोग देश के अन्य राज्यों की परंपरा भी अपना रहे हैं। इस कारण आषाढ़ पूर्णिमा के बाद से ही व्रत, पूजन और जलाभिषेक शुरू कर रहे हैं, जबकि लोक परंपरा के अनुसार श्रद्धालु हरियाली अमावस्या के बाद से ही श्रावण मास के अनुष्ठान आरंभ करते हैं। इससे श्रावण की अवधि डेढ़ माह तक चलती है और शिवभक्त पूरे डेढ़ महीने तक श्रद्धा, अनुष्ठान और भक्ति में लीन रहते हैं।
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श्रावण मास के बीच हरियाली अमावस्या मनाई जाती है
देश में सामान्यतः हिंदी महीनों की गणना पूर्णिमा से पूर्णिमा तक की जाती है, लेकिन गुजरात और वागड़ अंचल में अमावस्या से अमावस्या तक माह की गणना होती है। यही कारण है कि जब देश के अन्य भागों में श्रावण मास के बीच हरियाली अमावस्या मनाई जाती है, तब वागड़ क्षेत्र में उसी दिन से श्रावण मास की शुरुआत मानी जाती है। इसे अमांत और पूर्णिमांत पद्धति के आधार पर श्रावण का आरंभ कहा जाता है।
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महाकाल की तर्ज पर हुई भस्म आरती
डेढ़ माह का श्रावण वागड़ में 30 जुलाई से शुरू हो चुका है। तीन अगस्त को श्रावण के पहले सोमवार के अवसर पर शिवालयों में शिवभक्तों ने अपने आराध्य की कृपा प्राप्त करने के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए। शहर के प्रसिद्ध मंदारेश्वर शिव मंदिर में सोमवार सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर भस्म आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं अन्य शिवालयों में भी भक्तों ने पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए और जलाभिषेक किया।

 

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