Rajasthan News: राज्यसभा में गूंजा अरावली में अवैध खनन और वन कटाव का मुद्दा, सांसद नीरज डांगी ने जताई चिंता
Sirohi News: राज्यसभा में सांसद नीरज डांगी ने अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में अवैध खनन और वन कटाव का मुद्दा उठाते हुए इसके पर्यावरणीय दुष्परिणाम बताए। उन्होंने वायु प्रदूषण, PM2.5 और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीतियों पर चिंता जताई।
विस्तार
सिरोही से जुड़े सांसद नीरज डांगी ने बुधवार को राज्यसभा में अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में हो रहे अवैध खनन और वन कटाव का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने इसके गंभीर दुष्परिणामों की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इस विषय में वस्तुस्थिति सामने आने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से रोकथाम के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाने पर चिंता की स्थिति बनी हुई है। सांसद ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान इस विषय को विस्तार से रखा।
अवैध खनन से कई पहाड़ियां गायब होने का दावा
सदन में बोलते हुए नीरज डांगी ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में अवैध खनन के कारण 128 में से 31 पहाड़ियां पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं। इसके साथ ही लगातार वन कटाव भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वनों के कटाव को रोकने में विफलता और NAAQS की रिपोर्ट के बावजूद PM2.5 को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाना सरकार की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उनके अनुसार राजस्थान के 34 में से 33 शहर National Ambient Air Quality Standard (NAAQS) से ऊपर प्रदूषण स्तर पर हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के लिए सांस लेना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि भिवाड़ी देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है, जबकि श्री गंगानगर और हनुमानगढ़ दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में गिने जाते हैं। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर जैसे शहरों में बच्चे खुले वातावरण में खेलते हुए भी PM2.5 के स्तर वाली हवा में सांस ले रहे हैं।
अरावली के क्षरण से संभावित पर्यावरणीय प्रभाव
सांसद नीरज डांगी ने अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि लगभग 2 अरब वर्ष पुरानी यह दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और इसकी लंबाई करीब 670 किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि अरावली श्रृंखला रेगिस्तान को रोकने के साथ ही मानसून को रोककर वर्षा कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन पर्वत श्रृंखलाओं का क्षरण जारी रहा तो पूर्वी राजस्थान में वर्षा में कमी आएगी, खेती पर असर पड़ेगा, भूजल स्तर और नीचे जाएगा तथा धूल भरी आंधियां दिल्ली तक पहुंच सकती हैं। इसके साथ ही थार मरूस्थल के पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में सरकार की एक समिति ने भी पाया था कि अवैध खनन के कारण 128 में से 31 पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं और कई स्थानों पर दरारें पड़ने लगी हैं।
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सोनिया गांधी की चिंता का भी उल्लेख
इस दौरान नीरज डांगी ने कहा कि कांग्रेस संसदीय पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने भी वन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि अपने एक लेख में सोनिया गांधी ने निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए कहा था कि 72000 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट आइलैंड के आदिवासी समुदायों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकता है और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर बना सकता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को बिना पर्याप्त विचार के आगे बढ़ाया जा रहा है और कई कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर अध्ययन का हवाला
सांसद डांगी ने अपने वक्तव्य में विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि Lancent Planetary Health में दिसंबर 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार PM2.5 में हर 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि से मृत्यु दर में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि 2025 लैसेंट काउंटडाउन के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग 17.2 लाख लोगों की मृत्यु PM2.5 के कारण होती है, जो वर्ष 2010 की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा 70 प्रतिशत है और इसकी आर्थिक लागत लगभग 30 लाख करोड़ रुपये यानी देश के सकल घरेलू उत्पाद का 9.5 प्रतिशत बताई गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2017 में 12.4 लाख मौतें वायु प्रदूषण के कारण दर्ज की गई थीं, जो कुल मौतों का 12.5 प्रतिशत थीं। हालांकि पर्यावरण मंत्रालय संसद में बार-बार यह कहता रहा है कि इन मौतों को निर्णायक रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता। डांगी ने कहा कि अरावली और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर विभिन्न संस्थाओं की राय को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति भी चिंता का विषय है।
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