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Rajasthan: डंकी रूट से गया था विदेश, 22 दिन से इटली की मोर्चरी में पड़ा बेटे का शव; अंतिम दर्शन को तरस रही मां

Fri, 03 Jul 2026 11:08 PM IST
श्री गंगानगर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्री गंगानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्री गंगानगर Published by: श्री गंगानगर ब्यूरो Updated Fri, 03 Jul 2026 11:08 PM IST
सार

श्री गंगानगर जिले के रामसिंहपुर निवासी सुखवंत सिंह की इटली के रोम में 10 जून को हार्ट अटैक से मौत हो गई। सात साल पहले डंकी रूट से विदेश गए सुखवंत का शव पिछले 22 दिनों से रोम की एक मोर्चरी में रखा है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार शव भारत नहीं ला पा रहा है। 75 वर्षीय मां सुखदेव कौर अपने बेटे के अंतिम दर्शन के लिए सरकार और समाज से मदद की आस लगाए बैठी हैं।
 

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Son went abroad via Donkey route his body has been lying in an Italian morgue for 22 days
सुखवंत सिंह और उनकी तस्वीर दिखाती उनकी मां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीगंगानगर जिले के रामसिंहपुर की रहने वाली 75 वर्षीय सुखदेव कौर का इकलौता सहारा उनका बेटा सात साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में डंकी रूट से विदेश चला गया था, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। 10 जून को इटली की राजधानी रोम में हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। उसके शव को 22 दिन बीत जाने के बावजूद भारत नहीं लाया जा सका है। आर्थिक तंगी के कारण मां अब भी अपने बेटे के अंतिम दर्शन के लिए तरस रही है।
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पति के निधन के बाद बेटों के सहारे चल रहा था परिवार
साल 2009 में पति मीत सिंह के निधन के बाद सुखदेव कौर दोनों बेटों के सहारे जीवन-यापन कर रही थीं। वर्ष 2019 में बड़े बेटे सुखवंत सिंह ने विदेश जाने का फैसला लिया। परिवार ने बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं माना। पिछले सात वर्षों में सुखवंत कई देशों में भटकता रहा और आखिरकार इटली पहुंच गया।
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नागरिकता मिलने से 18 दिन पहले हो गई मौत
छोटे भाई बबलू ने बताया कि 10 जून को रोम में सुखवंत सिंह को हार्ट अटैक आया, जिससे उनकी मौत हो गई। महज 18 दिन बाद, यानी 28 जून को उन्हें इटली की नागरिकता मिलने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही उनकी जिंदगी खत्म हो गई। अब 22 दिनों से सुखवंत का शव रोम के एक अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। शव को भारत लाने में लाखों रुपये का खर्च आएगा, जो इस गरीब परिवार के लिए संभव नहीं है।
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घर चलाने के लिए फिर मजदूरी करने को मजबूर मां
बबलू ने बताया कि भाई ने जो कुछ कमाया था, वह इटली की नागरिकता की प्रक्रिया में ही खर्च हो गया। घर बनाने के लिए उन्होंने कुछ पैसे जरूर भेजे थे। भाई की मौत का सदमा इतना गहरा था कि वह करीब 20 दिन तक घर से बाहर नहीं निकला। अब राशन खत्म होने पर मां सुखदेव कौर फिर से दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हो गई हैं। परिवार के पास न तो इतने पैसे हैं और न ही सरकारी मदद या आवश्यक प्रक्रिया की पूरी जानकारी है।


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बस एक आखिरी इच्छा- बेटे का अंतिम दर्शन
सुखदेव कौर का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी बस यही एक इच्छा बाकी है कि बेटे का शव जल्द से जल्द घर पहुंचे, ताकि वह अंतिम बार उसका चेहरा देख सकें और पूरे रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कर सकें।
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