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Ikka Movie Review: दो सीन तक सिमटा सनी देओल का गुस्सा, फीका रहा रहमान डकैत का जादू; कैसी है फिल्म ‘इक्का’?
सार
Ikka Movie Review: सनी देओल और अक्षय खन्ना ने आखिरी बार 29 साल पहले फिल्म 'बॉर्डर' में साथ काम किया था। अब दोनों एक बार फिर से फिल्म ‘इक्का’ में साथ नजर आ रहे हैं जो शुक्रवार को ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। यहां जानिए कैसी है यह फिल्म?
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फिल्म 'इक्का'
- फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
'इक्का'
कलाकार
सनी देओल
,
अक्षय खन्ना
,
दीया मिर्जा
,
तिलोत्तमा शोम
,
संजीदा शेख
और
आकांक्षा रंजन कपूर
लेखक
अल्थिया कौशल
और
मयंक तिवारी
निर्देशक
सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा
निर्माता
सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा
और
सपना मल्होत्रा
रिलीज डेट
10 जुलाई 2026
रेटिंग
2/5
विस्तार
ऐसा लगने लगा है जैसे इन दिनों मेकर्स फिल्म की कहानी और उसके प्रेजेंटेशन को बेहतर करने से ज्यादा उसके ट्रेलर और टीजर को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। हाल ही के दिनों में कई ऐसी फिल्में आईं जिनके ट्रेलर जितने दमदार लगे, फिल्म उतनी ही बोरिंग निकली। ‘इक्का’ के साथ भी कुछ ऐसा ही है।
फिल्म के ट्रेलर में जब सबने सनी देओल और अक्षय खन्ना को एक-दूसरे के सामने देखा तो सब इस फिल्म के लिए बेहद उत्सुक हो गए पर यह फिल्म आपको उतना बांधकर नहीं रखती। पहले ही सीन से आप जानते हैं कि किसने क्या किया है और आप बस ढाई घंटे यह इंतजार करते हैं कि मेकर्स इसे प्रेजेंट कैसे करेंगे।
मेकर्स फिल्म को खूब खींचते हैं और फिर आखिरी 15 मिनट में सब हलवे जैसा परोस कर यह भी उम्मीद करते हैं कि हम शॉक्ड हो जाएं। कुल मिलाकर यह फिल्म लीगल ड्रामा तो है पर थ्रिलर बिल्कुल भी नहीं।
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फिल्म के ट्रेलर में जब सबने सनी देओल और अक्षय खन्ना को एक-दूसरे के सामने देखा तो सब इस फिल्म के लिए बेहद उत्सुक हो गए पर यह फिल्म आपको उतना बांधकर नहीं रखती। पहले ही सीन से आप जानते हैं कि किसने क्या किया है और आप बस ढाई घंटे यह इंतजार करते हैं कि मेकर्स इसे प्रेजेंट कैसे करेंगे।
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मेकर्स फिल्म को खूब खींचते हैं और फिर आखिरी 15 मिनट में सब हलवे जैसा परोस कर यह भी उम्मीद करते हैं कि हम शॉक्ड हो जाएं। कुल मिलाकर यह फिल्म लीगल ड्रामा तो है पर थ्रिलर बिल्कुल भी नहीं।
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फिल्म 'इक्का'
- फोटो : एक्स
कहानी
फिल्म की शुरुआत सोमा मित्तल (आकांक्षा रंजन कपूर) के मर्डर से होती है। इस मर्डर का इल्जाम बिजनेसमैन शौर्यमान गौर (अक्षय खन्ना) के ऊपर लगता है। अर्जुन अपनी तरफ से केस लड़ने के लिए वकील अर्जुन मेहरा (सनी देओल) को चुनता है, जो अब तक कोई केस नहीं हारा पर अर्जुन यह केस लड़ने से मना कर देता है।
दूसरी तरफ अर्जुन को पता चलता है कि उसकी बेटी को कैंसर है। शौर्या उसकी बेटी को बचाने के लिए मदद करने के लिए तैयार होता है पर बदले में वो चाहता है कि अर्जुन उसका केस लड़े। अब क्या अर्जुन अपनी बेटी के लिए उसूलाें के खिलाफ जाएगा? क्या वाकई शौर्या ने ही सोमा का कत्ल किया है? यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
फिल्म की शुरुआत सोमा मित्तल (आकांक्षा रंजन कपूर) के मर्डर से होती है। इस मर्डर का इल्जाम बिजनेसमैन शौर्यमान गौर (अक्षय खन्ना) के ऊपर लगता है। अर्जुन अपनी तरफ से केस लड़ने के लिए वकील अर्जुन मेहरा (सनी देओल) को चुनता है, जो अब तक कोई केस नहीं हारा पर अर्जुन यह केस लड़ने से मना कर देता है।
दूसरी तरफ अर्जुन को पता चलता है कि उसकी बेटी को कैंसर है। शौर्या उसकी बेटी को बचाने के लिए मदद करने के लिए तैयार होता है पर बदले में वो चाहता है कि अर्जुन उसका केस लड़े। अब क्या अर्जुन अपनी बेटी के लिए उसूलाें के खिलाफ जाएगा? क्या वाकई शौर्या ने ही सोमा का कत्ल किया है? यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
फिल्म 'इक्का'
- फोटो : सोशल मीडिया
अभिनय
सनी देओल पूरी फिल्म में शांत, धीमे और बुझे-बुझे से लगे हैं। पूरी फिल्म में मात्र दो सीन है जिसमें वो टेबल पर घूंसे मारकर चिल्लाते हैं और एक सीन है जिसमें वो कोर्ट में चीखते हैं। इमोशनल सीन में भी उनकी एक्टिंग असर नहीं करती। एक सीन में वो अपनी बेटी को भागकर अस्पताल देखने पहुंचते हैं और बेटी के पास पहुंचकर बस इतनी ही चिंता दिखाते हैं, जैसे वो पड़ाेसी की बच्ची हो।
दूसरी तरफ अक्षय खन्ना के पास एक बार फिर से करने के लिए कुछ नहीं है। उनका अभिनय बेजान सा महसूस होता है। इस फिल्म को देखने के बाद आप एक बात पर यकीन जरूर करेंगे कि एक कलाकार से उसका बेस्ट निकलवाने में निर्देशक का अहम रोल होता है। ये वही अक्षय हैं जिनको ‘धुरंधर’ में देखकर सब दीवाने हो गए थे पर यहां वाे बस रहमान डकैत के लुक में नजर आते हैं।
दीया मिर्जा एक बार फिर मां के रोल में हैं। इससे पहले वो ‘अल्फा’ में भी मां के छोटे राेल में नजर आई थीं। दीया के लिए यह जरूरी है कि अब वो कुछ बेहतर किरदार चुनें, जहां उनके पास करने के लिए इमोशनल सीन के अलावा भी कुछ हो।
तिलोत्तमा शोम ने अपना किरदार ठीक ठाक निभाया है। संजीदा शेख और आकांक्षा रंजन कपूर के पास ज्यादा कुछ करने को था नहीं। आकांक्षा को तो एक डॉयलॉग तक नहीं दिया। जज के किरदार में विजय विक्रम सिंह कुछ नया करते हैं।
सनी देओल पूरी फिल्म में शांत, धीमे और बुझे-बुझे से लगे हैं। पूरी फिल्म में मात्र दो सीन है जिसमें वो टेबल पर घूंसे मारकर चिल्लाते हैं और एक सीन है जिसमें वो कोर्ट में चीखते हैं। इमोशनल सीन में भी उनकी एक्टिंग असर नहीं करती। एक सीन में वो अपनी बेटी को भागकर अस्पताल देखने पहुंचते हैं और बेटी के पास पहुंचकर बस इतनी ही चिंता दिखाते हैं, जैसे वो पड़ाेसी की बच्ची हो।
दूसरी तरफ अक्षय खन्ना के पास एक बार फिर से करने के लिए कुछ नहीं है। उनका अभिनय बेजान सा महसूस होता है। इस फिल्म को देखने के बाद आप एक बात पर यकीन जरूर करेंगे कि एक कलाकार से उसका बेस्ट निकलवाने में निर्देशक का अहम रोल होता है। ये वही अक्षय हैं जिनको ‘धुरंधर’ में देखकर सब दीवाने हो गए थे पर यहां वाे बस रहमान डकैत के लुक में नजर आते हैं।
दीया मिर्जा एक बार फिर मां के रोल में हैं। इससे पहले वो ‘अल्फा’ में भी मां के छोटे राेल में नजर आई थीं। दीया के लिए यह जरूरी है कि अब वो कुछ बेहतर किरदार चुनें, जहां उनके पास करने के लिए इमोशनल सीन के अलावा भी कुछ हो।
तिलोत्तमा शोम ने अपना किरदार ठीक ठाक निभाया है। संजीदा शेख और आकांक्षा रंजन कपूर के पास ज्यादा कुछ करने को था नहीं। आकांक्षा को तो एक डॉयलॉग तक नहीं दिया। जज के किरदार में विजय विक्रम सिंह कुछ नया करते हैं।
फिल्म 'इक्का'
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन
शुरुआत से ही यह फिल्म 90 के दशक के टेम्पलेट पर चलती हुई नजर आती है। निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा को इस कोर्टरूम ड्रामा में इतना ज्यादा इमोशंस डालने की जरूरत नहीं थी कि उसका थ्रिल ही मर जाए।
शुरुआती एक घंटे में तो हर दो सीन के बाद एक इमोशनल सीन आता है। सीन अधूरे से लगते हैं कि जैसे बस कैमरा शुरू करके कलाकारों से डायलॉग बोलने को कह दिया गया हो। फिर आगे कोर्ट रूम सीन भी थोड़े बहुत देखने लायक हैं पर उतने दमदार नहीं जितनी उम्मीद थी। शायद यहां अक्षय और सनी एक दूसरे के खिलाफ वकील बने खड़े होते तो फिल्म बेहतर हो सकती थी। पूरी फिल्म में दो गाने हैं और दोनों ही बर्बाद हैं।
सबसे दुखद बात यह कि सनी देओल और अक्षय खन्ना जैसे दो बड़े कलाकारों को लेकर भी निर्देशक एक भी यादगार सीन नहीं दे पाए।
शुरुआत से ही यह फिल्म 90 के दशक के टेम्पलेट पर चलती हुई नजर आती है। निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा को इस कोर्टरूम ड्रामा में इतना ज्यादा इमोशंस डालने की जरूरत नहीं थी कि उसका थ्रिल ही मर जाए।
शुरुआती एक घंटे में तो हर दो सीन के बाद एक इमोशनल सीन आता है। सीन अधूरे से लगते हैं कि जैसे बस कैमरा शुरू करके कलाकारों से डायलॉग बोलने को कह दिया गया हो। फिर आगे कोर्ट रूम सीन भी थोड़े बहुत देखने लायक हैं पर उतने दमदार नहीं जितनी उम्मीद थी। शायद यहां अक्षय और सनी एक दूसरे के खिलाफ वकील बने खड़े होते तो फिल्म बेहतर हो सकती थी। पूरी फिल्म में दो गाने हैं और दोनों ही बर्बाद हैं।
सबसे दुखद बात यह कि सनी देओल और अक्षय खन्ना जैसे दो बड़े कलाकारों को लेकर भी निर्देशक एक भी यादगार सीन नहीं दे पाए।
फिल्म 'इक्का'
- फोटो : सोशल मीडिया
देखें या नहीं
बहुत ही ज्यादा सनी देओल और अक्षय खन्ना के फैन हाें तो देख सकते हैं। थ्रिलर फिल्म समझकर देखने ना जाएं। फिल्म में थ्रिल से ज्यादा इमोशनल ड्रामा है।
बहुत ही ज्यादा सनी देओल और अक्षय खन्ना के फैन हाें तो देख सकते हैं। थ्रिलर फिल्म समझकर देखने ना जाएं। फिल्म में थ्रिल से ज्यादा इमोशनल ड्रामा है।