राजस्थान: चुनाव में मतदाता जागरूकता अभियान पर रोक रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मतदाता जागरूकता अभियान पर रोक लगाने के राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत ने आयोग को 48 घंटे के भीतर सामाजिक संगठन के आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक सामाजिक संगठन को राज्य में चल रहे स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
अदालत ने कहा कि ऐसे संगठनों की ओर से मतदाता जागरूकता के प्रयासों को प्रतिबंधित करने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह संगठन के अनुरोध पर 48 घंटे के भीतर पुनर्विचार करे।
पीठ मजदूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस) की सह-संस्थापक और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय तथा निखिल डे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अनुमति देने से इनकार किया गया था
याचिका में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की अनुमति देने से इनकार किया गया था। इसके लिए चुनाव वाले क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने का हवाला दिया गया था।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, "राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ताओं के आवेदन के साथ संलग्न सूची के अनुसार मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की अनुमति देने के अनुरोध पर पुनर्विचार करे। आयोग 48 घंटे के भीतर इस पर फैसला ले। उसका पिछला आदेश रद्द किया जाता है।"
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने जोर देकर कहा कि निर्वाचन आयोग केवल इसलिए मतदाता जागरूकता गतिविधियों पर अपना एकाधिकार नहीं जता सकता, क्योंकि वह खुद भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
राजस्थान निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हर किसी को मतदाता जागरूकता अभियान चलाने का अधिकार है। आपको इसका स्वागत करना चाहिए।" सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राजस्थान निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता संगठन वर्ष 2004 से यह अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनाव में उपलब्ध विकल्पों के प्रति जागरूक करना है। इसमें नोटा (इनमें से कोई नहीं) के विकल्प की जानकारी देना भी शामिल है।
प्रशांत भूषण ने कहा कि इस अभियान का एक अन्य उद्देश्य मतदाताओं को चुनाव में किसी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने के बदले पैसे या अन्य प्रलोभन स्वीकार करने से रोकना और चुनावी अनियमितताओं के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित गतिविधियां पूरी तरह गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष हैं। इनमें किसी भी उम्मीदवार का समर्थन या विरोध नहीं किया जाता। अभियान के तहत छोटे-छोटे समूह गांवों में जाकर लोगों के साथ संवाद के माध्यम से उन्हें जागरूक करते हैं।
याचिका का विरोध करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसने संगठन के आवेदन पर विचार किया था। आयोग को आशंका थी कि प्रस्तावित अभियान किसी अन्य व्यक्ति के इशारे पर चलाया जा सकता है। आयोग ने यह भी बताया कि वह पहले से ही अपने स्तर पर मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
हालांकि, न्यायमूर्ति बागची ने आयोग के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि उसके अपने जागरूकता कार्यक्रम दूसरे संगठनों को इसी तरह के प्रयास करने से रोकने का आधार नहीं बन सकते।
'यह आपके अधिकार क्षेत्र में आने वाली बात नहीं'
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "यह आपके अधिकार क्षेत्र में आने वाली बात नहीं है। यदि आप जागरूकता अभियान चला रहे हैं तो इससे किसी अन्य संस्था के ऐसे प्रयास करने में बाधा नहीं आनी चाहिए। आप लोगों को ऐसा करने से नहीं रोक सकते। वे आपके मददगार साबित होंगे।"
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग मतदाता जागरूकता की आड़ में की जाने वाली किसी भी भ्रष्ट गतिविधि को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन ऐसे अभियानों पर अपना एकाधिकार नहीं जमा सकता।
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न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "यदि वे मतदाता जागरूकता के नाम पर किसी तरह की भ्रष्ट गतिविधि में शामिल होते हैं तो उसे नियंत्रित करने के लिए आप मौजूद हैं। लेकिन आप मतदाता जागरूकता अभियानों को अपने नियंत्रण में नहीं ले सकते और न ही उन पर एकाधिकार जमा सकते हैं।"
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव चार चरणों में कराए जा रहे हैं। अंतिम चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 14 नवंबर को मतदान होना है, जबकि सरपंच और पंच पदों के लिए 16 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। इन चुनावों में 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। राज्य में 4.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं।