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Tonk News: शिक्षा, महंगाई और विदेश नीति तक सरकार पर बरसे सचिन पायलट, पेपर लीक मामले में एनटीए पर उठाए सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
Published by: टोंक ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 07:56 AM IST
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सार
टोंक विधायक सचिन पायलट ने महंगाई, पेट्रोल-डीजल कीमतों, नीट पेपर लीक और निकाय चुनावों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। पायलट ने कहा कि सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान हटाकर सिर्फ सत्ता बचाने में लगी है, जबकि युवा, किसान और आम आदमी लगातार परेशान हो रहे हैं।
पायलट नै की पीड़ित परिवार से मुलाकात
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विस्तार
पूर्व उपमुख्यमंत्री और टोंक विधायक सचिन पायलट ने सोमवार को अपने दौरे के दौरान बहुचर्चित धर्मांतरण और आत्महत्या मामले के मृतक कुणाल गुर्जर के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों में भी शिरकत की।
मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद रोज पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। अगर बढ़ोतरी करनी ही थी तो चुनाव से पहले जनता को बता देते लेकिन चुनाव के समय सिर्फ भाषण दिए गए। अब कहा जा रहा है कि बचत करनी है, खाने के तेल का कम उपयोग करना है और सोना नहीं खरीदना है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से चौतरफा महंगाई बढ़ती है। खाने-पीने की चीजों से लेकर हर वस्तु महंगी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार का महंगाई पर कोई ध्यान नहीं है। सरकार का एकमात्र एजेंडा सिर्फ चुनाव जीतना, विपक्ष को प्रताड़ित करना और विपक्ष के लोगों को बदनाम करना रह गया है।
नीट पेपर लीक मामले पर उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार नीट पेपर लीक हुआ है 2024, 2025 और 2026 में। सरकार हर बार जांच सीबीआई को सौंपकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है। जब मामला उजागर हो जाता है, तभी परीक्षा रद्द की जाती है। ऐसे कितने पेपर होंगे जिनमें नकल हुई होगी या पेपर लीक हुआ होगा, लेकिन उन्हें रद्द नहीं किया गया।
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उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में सरकार को युवाओं और विद्यार्थियों की चिंता होती तो जिम्मेदारी तय की जाती, लोगों को बर्खास्त किया जाता और इस्तीफे लिए जाते लेकिन सरकार ऐसा करने को तैयार नहीं है। 22 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी और कई छात्र आत्महत्या तक कर चुके हैं।
ये भी पढ़ें: Rajasthan: गृह मंत्री शाह को भाटी का खून से पत्र, गिरल आंदोलन पर गरमाई सियासत; मदन राठौड़ ने उठाए गंभीर सवाल
सचिन पायलट ने कहा कि कल वे झुंझुनू गए थे, जहां एक गरीब दलित परिवार के बच्चे ने आत्महत्या कर ली। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। सरकार को सिर्फ सत्ता से प्रेम है और वह किसी भी तरह सत्ता में बने रहना चाहती है। महंगाई और बेरोजगारी की सरकार को कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में पूरी कांग्रेस पार्टी और विपक्ष एकजुट होकर आंदोलन करेगा ताकि सरकार की आंखें खुलें और बचे हुए कार्यकाल में जनता के हित में काम किया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर तंज कसते हुए पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार विदेश यात्राएं कर रहे हैं और देश की जनता को बचत के प्रवचन दे रहे हैं। गरीब जनता की जेब पर महंगाई का डाका डाला जा रहा है लेकिन सरकार के मंत्री अपने पद बचाने में लगे हैं। चाहे शिक्षा मंत्री हों या पेट्रोलियम मंत्री, कोई इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि जो विभाग लगातार फेल हो रहे हैं, उन्हें जवाबदेह बनाया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
नीट पेपर लीक पर आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि 22 लाख बच्चे मध्यम वर्ग, गरीब और ग्रामीण परिवारों से आते हैं। उन्होंने 2-3 साल मेहनत की है। पेपर लीक छात्र नहीं करते, बल्कि शिक्षा माफिया करोड़ों रुपए खर्च कर पेपर खरीदते हैं और उसे आगे फैलाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार ऐसे शिक्षा माफियाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही हैं? कितने लोगों को पकड़ा गया है? कितनी संस्थाओं पर कार्रवाई हुई है? उन्होंने कहा कि पेपर लीक का खुलासा सरकार या पुलिस ने नहीं किया। बच्चों ने बताया कि गेस पेपर और मुख्य पेपर एक जैसे हैं। दिल्ली में शिकायत होने के बाद मामला सामने आया और मजबूरी में परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
सचिन पायलट ने कहा कि एनटीए अब नेशनल ट्रॉमा एजेंसी बन चुकी है और पेपर लीक मामले में अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है। शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, विदेश नीति और ऊर्जा नीति हर मोर्चे पर सरकार विफल साबित हुई है।
अमेरिका के विदेश मंत्री के जयपुर दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि हर सरकार ने संतुलित विदेश नीति बनाई थी ताकि सभी देशों से अच्छे संबंध बने रहें लेकिन देश के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति, विदेश नीति, वित्तीय नीति और आंतरिक सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि कोई देश हमें यह बताए कि हम रूस से तेल नहीं खरीद सकते या हमें किसी विशेष देश से निश्चित मात्रा में सामान खरीदना होगा तो यह विदेश नीति की सफलता नहीं कही जा सकती।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के साथ भारत को बराबरी के स्तर पर संवाद करना चाहिए। चीन हमारी सीमाओं पर दबाव बना रहा है, अमेरिका सीजफायर की घोषणा कर रहा है और भारत की ऊर्जा नीति पर भी दबाव डाला जा रहा है। पायलट ने कहा कि भारत को अपनी जरूरत के अनुसार वेनेजुएला, ईरान या रूस से तेल खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यह पहली बार हो रहा है कि भारत को इस तरह निर्देशित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई नीतियों का असर कपास, सोयाबीन और छोटे किसानों पर पड़ेगा। देश की रीढ़ किसान हैं और यदि उन्हें सुरक्षित नहीं रखा गया तो विदेश नीति और आर्थिक नीति पर चर्चा का कोई फायदा नहीं होगा।
निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर सचिन पायलट ने कहा कि सरकार को कई बार कोर्ट की फटकार पड़ चुकी है। कोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं लेकिन सरकार ने अब तक छात्रसंघ, पंचायत और नगर निकाय चुनाव नहीं कराए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निकाय चुनाव नहीं होंगे, तब तक बजट जारी नहीं किया जाएगा। राजस्थान को इससे हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव से डर रही है क्योंकि चुनाव होने पर उसकी पोल खुल जाएगी और कांग्रेस बंपर जीत दर्ज करेगी।
मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद रोज पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। अगर बढ़ोतरी करनी ही थी तो चुनाव से पहले जनता को बता देते लेकिन चुनाव के समय सिर्फ भाषण दिए गए। अब कहा जा रहा है कि बचत करनी है, खाने के तेल का कम उपयोग करना है और सोना नहीं खरीदना है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से चौतरफा महंगाई बढ़ती है। खाने-पीने की चीजों से लेकर हर वस्तु महंगी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार का महंगाई पर कोई ध्यान नहीं है। सरकार का एकमात्र एजेंडा सिर्फ चुनाव जीतना, विपक्ष को प्रताड़ित करना और विपक्ष के लोगों को बदनाम करना रह गया है।
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नीट पेपर लीक मामले पर उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार नीट पेपर लीक हुआ है 2024, 2025 और 2026 में। सरकार हर बार जांच सीबीआई को सौंपकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है। जब मामला उजागर हो जाता है, तभी परीक्षा रद्द की जाती है। ऐसे कितने पेपर होंगे जिनमें नकल हुई होगी या पेपर लीक हुआ होगा, लेकिन उन्हें रद्द नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में सरकार को युवाओं और विद्यार्थियों की चिंता होती तो जिम्मेदारी तय की जाती, लोगों को बर्खास्त किया जाता और इस्तीफे लिए जाते लेकिन सरकार ऐसा करने को तैयार नहीं है। 22 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी और कई छात्र आत्महत्या तक कर चुके हैं।
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सचिन पायलट ने कहा कि कल वे झुंझुनू गए थे, जहां एक गरीब दलित परिवार के बच्चे ने आत्महत्या कर ली। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। सरकार को सिर्फ सत्ता से प्रेम है और वह किसी भी तरह सत्ता में बने रहना चाहती है। महंगाई और बेरोजगारी की सरकार को कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में पूरी कांग्रेस पार्टी और विपक्ष एकजुट होकर आंदोलन करेगा ताकि सरकार की आंखें खुलें और बचे हुए कार्यकाल में जनता के हित में काम किया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर तंज कसते हुए पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार विदेश यात्राएं कर रहे हैं और देश की जनता को बचत के प्रवचन दे रहे हैं। गरीब जनता की जेब पर महंगाई का डाका डाला जा रहा है लेकिन सरकार के मंत्री अपने पद बचाने में लगे हैं। चाहे शिक्षा मंत्री हों या पेट्रोलियम मंत्री, कोई इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि जो विभाग लगातार फेल हो रहे हैं, उन्हें जवाबदेह बनाया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
नीट पेपर लीक पर आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि 22 लाख बच्चे मध्यम वर्ग, गरीब और ग्रामीण परिवारों से आते हैं। उन्होंने 2-3 साल मेहनत की है। पेपर लीक छात्र नहीं करते, बल्कि शिक्षा माफिया करोड़ों रुपए खर्च कर पेपर खरीदते हैं और उसे आगे फैलाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार ऐसे शिक्षा माफियाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही हैं? कितने लोगों को पकड़ा गया है? कितनी संस्थाओं पर कार्रवाई हुई है? उन्होंने कहा कि पेपर लीक का खुलासा सरकार या पुलिस ने नहीं किया। बच्चों ने बताया कि गेस पेपर और मुख्य पेपर एक जैसे हैं। दिल्ली में शिकायत होने के बाद मामला सामने आया और मजबूरी में परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
सचिन पायलट ने कहा कि एनटीए अब नेशनल ट्रॉमा एजेंसी बन चुकी है और पेपर लीक मामले में अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है। शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, विदेश नीति और ऊर्जा नीति हर मोर्चे पर सरकार विफल साबित हुई है।
अमेरिका के विदेश मंत्री के जयपुर दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि हर सरकार ने संतुलित विदेश नीति बनाई थी ताकि सभी देशों से अच्छे संबंध बने रहें लेकिन देश के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति, विदेश नीति, वित्तीय नीति और आंतरिक सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि कोई देश हमें यह बताए कि हम रूस से तेल नहीं खरीद सकते या हमें किसी विशेष देश से निश्चित मात्रा में सामान खरीदना होगा तो यह विदेश नीति की सफलता नहीं कही जा सकती।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के साथ भारत को बराबरी के स्तर पर संवाद करना चाहिए। चीन हमारी सीमाओं पर दबाव बना रहा है, अमेरिका सीजफायर की घोषणा कर रहा है और भारत की ऊर्जा नीति पर भी दबाव डाला जा रहा है। पायलट ने कहा कि भारत को अपनी जरूरत के अनुसार वेनेजुएला, ईरान या रूस से तेल खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यह पहली बार हो रहा है कि भारत को इस तरह निर्देशित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई नीतियों का असर कपास, सोयाबीन और छोटे किसानों पर पड़ेगा। देश की रीढ़ किसान हैं और यदि उन्हें सुरक्षित नहीं रखा गया तो विदेश नीति और आर्थिक नीति पर चर्चा का कोई फायदा नहीं होगा।
निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर सचिन पायलट ने कहा कि सरकार को कई बार कोर्ट की फटकार पड़ चुकी है। कोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं लेकिन सरकार ने अब तक छात्रसंघ, पंचायत और नगर निकाय चुनाव नहीं कराए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निकाय चुनाव नहीं होंगे, तब तक बजट जारी नहीं किया जाएगा। राजस्थान को इससे हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव से डर रही है क्योंकि चुनाव होने पर उसकी पोल खुल जाएगी और कांग्रेस बंपर जीत दर्ज करेगी।