RPSC पोर्टल में सेंध: विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों को जारी की साइबर एडवाइजरी, अलर्ट रहने की अपील
RPSC भर्ती पोर्टल में कथित छेड़छाड़ के बाद राजस्थान पुलिस ने विश्वविद्यालयों और सरकारी-निजी संस्थानों के लिए साइबर एडवाइजरी जारी की है। वेब पोर्टल सुरक्षा मजबूत करने और नियमित सिक्योरिटी ऑडिट की अपील की गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के भर्ती पोर्टल में कथित छेड़छाड़ के मामले के बाद राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने राज्य के विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी-निजी संगठनों के लिए विस्तृत साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने सभी संस्थानों से अपने वेब पोर्टलों की सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने, नियमित सिक्योरिटी ऑडिट कराने और संवेदनशील डिजिटल प्रणालियों को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपडेट करने की अपील की है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि हालिया RPSC भर्ती पोर्टल प्रकरण में अनधिकृत तरीके से पोर्टल में प्रवेश कर भर्ती परीक्षा के परिणाम, अभ्यर्थियों की वरीयता सूची और आवेदन संबंधी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। इस घटना ने संस्थागत वेब पोर्टलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।
यह भी पढें- Jhunjhunu News: एनएच-11 पर भीषण हादसा, कार और मिल्क टैंकर की आमने-सामने भिड़ंत, दो महिलाओं की मौत
साइबर क्राइम शाखा के अनुसार अधिकांश संस्थागत पोर्टलों में चार प्रमुख तकनीकी कमजोरियां देखने को मिलती हैं। इनमें सर्वर स्तर पर यूजर ऑथराइजेशन की पर्याप्त जांच नहीं होना, SQL Injection के जरिए डेटाबेस पर हमला संभव होना, पासवर्ड बदलने या रीसेट करने के दौरान उपयोगकर्ता की दोबारा पुष्टि का अभाव तथा लॉगिन, ओटीपी और पासवर्ड रीसेट पर प्रयासों की सीमा तय नहीं होना शामिल है। इन खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं और रिकॉर्ड में बदलाव कर सकते हैं।
पुलिस ने बताया कि हमलावर सबसे पहले वेबसाइट के URL और HTTP रिक्वेस्ट का विश्लेषण कर सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों की पहचान करते हैं। इसके बाद ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट और बॉट्स के जरिए सिस्टम की परमिशन व्यवस्था की जांच करते हैं। यदि सुरक्षा में कोई चूक मिलती है तो वे डेटा चोरी करने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने या सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने की कोशिश करते हैं।
एडवाइजरी में सभी संस्थानों को प्रत्येक रिक्वेस्ट पर सर्वर-साइड ऑथराइजेशन अनिवार्य रूप से लागू करने, क्रमिक आईडी (Sequential IDs) की जगह UUID/GUID का उपयोग करने, Prepared Statements और Parameterized Queries अपनाने तथा सभी इनपुट का सर्वर-साइड वैलिडेशन और सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पासवर्ड बदलने से पहले री-वेरिफिकेशन, संवेदनशील कार्यों के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA), लॉगिन और ओटीपी पर सीमित प्रयास तथा लगातार असफल प्रयास होने पर अकाउंट को अस्थायी रूप से लॉक करने जैसे सुरक्षा उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
साइबर क्राइम शाखा ने कहा है कि किसी भी प्रकार की साइबर सेंधमारी, डेटा चोरी या ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत निकटतम साइबर पुलिस थाना, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।