Toll Tax: गुरुग्राम और जयपुर के बीच चला रहे हैं गाड़ी? एक अगस्त से टोल से जुड़ा हो रहा है बड़ा बदलाव
गुरुग्राम और जयपुर के बीच यात्रा करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए 1 अगस्त से एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। अब राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) के इस पूरे कॉरिडोर पर किसी भी टोल प्लाजा पर रुककर टोल शुल्क चुकाने की जरूरत नहीं होगी। जानें पूरी डिटेल्स।
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विस्तार
नेशनल हाईवे 48 (NH-48) के गुरुग्राम-जयपुर कॉरिडोर पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए 1 अगस्त से एक बड़ा और राहत भरा बदलाव लागू होने जा रहा है। इस पूरे रूट पर अब यूजर फीस यानी टोल टैक्स चुकाने के लिए गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। क्योंकि यह पूरा कॉरिडोर अब बैरियर-मुक्त टोल संग्रह प्रणाली में बदलने जा रहा है।
यह ऐतिहासिक बदलाव राजस्थान स्थित शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के सक्रिय होने के साथ संभव हुआ है। इसके लागू होते ही 270 किलोमीटर लंबे गुरुग्राम-जयपुर कॉरिडोर पर स्थित सभी टोल प्लाजा पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-फ्री तकनीक से लैस हो गए हैं।
गुरुग्राम-जयपुर कॉरिडोर पर क्या बदलाव हुआ है और यह कैसे बैरियर-फ्री बना?
अधिकारियों के अनुसार, शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम के 1 अगस्त से चालू होते ही यह देश के सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों में से एक पर इस तकनीक के पूर्ण क्रियान्वयन को पूरा कर देगा:
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सफलतापूर्वक अपग्रेड हुए टोल प्लाजा:
NH-48 पर स्थित दौलतपुरा और मनोहरपुरा टोल प्लाजा को पहले ही इस नई प्रणाली में अपग्रेड किया जा चुका था। अब शाहजहांपुर के भी इस नेटवर्क में शामिल होने से वाहन चालक पूरे गुरुग्राम-जयपुर स्ट्रेच पर बिना किसी टोल बूथ पर रुके यात्रा कर सकेंगे। -
NH-48 की विशालता:
दिल्ली से चेन्नई तक 2,807 किलोमीटर लंबा NH-48 भारत के सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक है, जो 7 राज्यों से होकर गुजरता है। -
पूरे दिल्ली-जयपुर कॉरिडोर का लक्ष्य:
अधिकारियों ने यह भी बताया कि जैसे ही कुकरोला (शिफ्ट किया गया खेड़की दौला) टोल प्लाजा MLFF में अपग्रेड हो जाएगा, NH-48 पर पूरा दिल्ली-जयपुर कॉरिडोर भी पूरी तरह से बैरियर-मुक्त हो जाएगा।
मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम क्या है और यह काम कैसे करता है?
मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जो वाहनों की रफ्तार धीमी किए बिना या उन्हें रोके बिना टोल संग्रह को संभव बनाती है:
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तकनीक का संयोजन:
यह सिस्टम टोल गैंट्री (सड़क के ऊपर लगे फ्रेम) के नीचे से गुजरने वाले वाहन के फास्टैग (FASTag) और वाहन पंजीकरण संख्या (VRN) को पहचानने के लिए उच्च क्षमता वाले रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर्स और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों का एक साथ उपयोग करता है। वाहन के गुजरते ही लिंक किए गए फास्टैग खाते से टोल राशि अपने आप कट जाती है। -
MLFF तकनीक के मुख्य लाभ:
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यात्रा के समय में बचत: टोल बूथों पर कतार में खड़े होने का समय खत्म होता है, जिससे सफर तेजी से पूरा होता है।
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टोल प्लाजा पर भीड़ से मुक्ति: बैरियर हटने से गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के लगातार बनी रहती है।
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ईंधन की बचत: गाड़ियों को बार-बार रोकने और चालू करने की जरूरत न होने से ईंधन की खपत घटती है।
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वाहनों के उत्सर्जन में कमी: ईंधन की कम खपत से जहरीले धुएं और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण को लाभ होता है।
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सुगम यातायात: राजमार्गों पर यातायात का प्रवाह बेहद सुचारू और सुरक्षित बना रहता है।
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वाहन चालकों के लिए फास्टैग बैलेंस को लेकर एनएचएआई (NHAI) के क्या नियम हैं?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने MLFF सक्षम गलियारों से गुजरने वाले सभी वाहन चालकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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पर्याप्त बैलेंस रखना अनिवार्य:
यात्रा शुरू करने से पहले चालकों को अपने फास्टैग खाते में पर्याप्त राशि सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। -
अपूर्ण या निष्क्रिय फास्टैग पर ई-नोटिस:
यदि किसी वाहन में अपर्याप्त बैलेंस, अमान्य फास्टैग या गैर-कार्यात्मक (Non-functional) फास्टैग पाया जाता है, तो टोल न चुकाने के संबंध में सिस्टम द्वारा तुरंत एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस (E-Notice) जारी किया जाएगा। -
72 घंटे का समय और पेनाल्टी नियम:
वाहन चालकों को नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा। यदि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो लागू टोल शुल्क से दोगुना जुर्माना (पेनाल्टी) लगाया जाएगा।
भारत में MLFF नेटवर्क का विस्तार कहां-कहां हो रहा है?
देश भर में राजमार्गों के आधुनिकीकरण के तहत इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है:
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वर्तमान में 5 टोल प्लाजा पर चालू:
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गुजरात में NH-48 पर चोरयासी (Choryasi)
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दिल्ली में अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) पर मुंडका (Mundka)
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हरियाणा में NH-44 पर घरौंडा (Gharaunda)
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राजस्थान में NH-48 पर मनोहरपुरा (Manoharpura)
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राजस्थान में NH-48 पर दौलतपुरा (Daulatpura)
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12 अन्य टोल प्लाजा के लिए दिए गए ठेके:
एनएचएआई की टोल कार्यान्वयन एजेंसी 'इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड' (IHMCL) ने 12 और टोल प्लाजा के लिए कॉन्ट्रैक्ट आवंटित किए हैं:
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गुजरात में NH-48 पर बोराईच (Boraich)
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तमिलनाडु में NH-48 पर नेमिली/श्रीपेरंबुदूर (Nemili/Sriperumbudur) व चेनासमुद्रम (Chenasamudram), और NH-45 पर परानूर (Paranur)
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आंध्र प्रदेश में NH-44 पर कासेपल्ली (Kasepalli), अमकाथडू (Amakathadu) और मरूर (Marur)
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महाराष्ट्र में NH-50 पर चालकवाड़ी (Chalakwadi) और हिवरगांव पावसा (Hiwargaon Pavsa)
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असम में NH-31 पर मदनपुर (Madanpur)
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हरियाणा में NH-19 पर बदरपुर-फरीदाबाद (Badarpur-Faridabad)
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104 अतिरिक्त टोल प्लाजा के लिए टेंडर:
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 104 और टोल प्लाजा के लिए निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित की गई हैं, जो इस प्रणाली के देशव्यापी विस्तार का संकेत है।
देशभर में इस सिस्टम को पूरी तरह लागू करने का क्या लक्ष्य रखा गया है?
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, सरकार ने देश के राजमार्ग नेटवर्क को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की समय-सीमा तय की है:
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मार्च 2029 तक का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक सभी चार-लेन और उससे अधिक चौड़े राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे पर 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' टोलिंग सिस्टम को पूरी तरह लागू करना है।
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भविष्य का प्रभाव: इस योजना के पूरा होने से देश भर के करोड़ों वाहन चालकों के लिए प्रतीक्षा समय कम होगा, ट्रैफिक जाम खत्म होगा और टोल संग्रह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व कुशल बनेगी।