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Tyre: FY26 में बढ़िया प्रदर्शन के बाद भारतीय टायर कंपनियों के सामने नई चुनौती! बढ़ती लागत-भारी निवेश से दबाव

Thu, 30 Jul 2026 06:47 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 30 Jul 2026 06:47 PM IST
सार

FY26 में टायर इंडस्ट्री में डिमांड बढ़ी, मुनाफा बेहतर हुआ और लगातार निवेश हुआ। लेकिन FY27 में मार्जिन पर दबाव और ज्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) की जरूरत होगी।

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Indian Tyre Makers Face Margin Pressure and Higher Capex Outlay in FY27: Report
Tyre companies - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत के टायर उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनियों के सामने लागत और मुनाफे को लेकर बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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ब्रोकरेज फर्म इक्किरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) की रिपोर्ट के अनुसार, देश की तीन बड़ी टायर निर्माता कंपनियों अपोलो टायर्स (Apollo Tyres), सिएट (CEAT) और एमआरएफ (MRF) की बिक्री में तो उछाल आया है। लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण उनके मार्जिन पर दबाव पड़ने और पूंजीगत व्यय बढ़ने की संभावना है।

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वित्त वर्ष 2025-26 में टायर कंपनियों का प्रदर्शन कैसा रहा?

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय टायर उद्योग के लिए मांग, मुनाफा और निवेश के लिहाज से बेहद सकारात्मक साबित हुआ:

  • राजस्व में दर्ज की गई बढ़त:
    सिएट (CEAT) 15.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (YoY) के साथ सबसे आगे रही। इसके बाद एमआरएफ (MRF) ने 10.8 प्रतिशत और अपोलो टायर्स ने 9.0 प्रतिशत की स्टैंडअलोन रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की। अपोलो और सिएट दोनों ने FY25 की तुलना में FY26 में काफी तेजी दिखाई।

  • मांग और वॉल्यूम में दोहरे अंकों की वृद्धि:
    रिप्लेसमेंट मार्केट (पुराने टायर बदलने की मांग) और ओईएम (वाहन निर्माताओं) की ओर से मजबूत मांग के कारण उद्योग के वॉल्यूम में दोहरे अंकों की वृद्धि हुई।

  • जीएसटी और निर्यात का असर:
    वित्त वर्ष के उत्तरार्ध (सेकंड हाफ) में जीएसटी दरों के युक्तीकरण (रैशनलाइजेशन) से मांग को और बल मिला। वहीं, निर्यात साल की पहली छमाही में तो मजबूत रहा, लेकिन बाद में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण इसमें थोड़ी सुस्ती आ गई।

  • कच्चे माल की दरों में राहत से सुधरा मुनाफा:
    FY26 में कच्चे तेल की कीमतें निचले स्तर पर रहने से क्रूड से जुड़े कच्चे माल जैसे कार्बन ब्लैक, सिंथेटिक रबर और रसायनों की कीमतें स्थिर रहीं। इससे तीनों प्रमुख कंपनियों की बिक्री के मुकाबले कच्चे माल की लागत का प्रतिशत कम हुआ और उनके मुनाफे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

 

Indian Tyre Makers Face Margin Pressure and Higher Capex Outlay in FY27: Report
TYRE - फोटो : AI

वित्त वर्ष 2026-27 में टायर कंपनियों के सामने क्या-क्या चुनौतियां होंगी?

इक्किरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि FY27 में कंपनियों के लिए परिस्थितियां काफी कठिन रहने वाली हैं:

  • प्राकृतिक रबर की कीमतों में उछाल:
    बाजार में प्राकृतिक रबर के दाम काफी तेजी से बढ़ चुके हैं।

  • कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव:
    वैश्विक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ गई हैं, जिससे क्रूड से जुड़े कच्चे माल महंगे हो रहे हैं।

  • रुपये की कमजोरी:
    अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में गिरावट आई है, जिससे विदेशों से मंगाए जाने वाले कच्चे माल की आयात लागत बढ़ गई है।

  • मार्केट लीडर्स की चिंता:
    इन सभी वजहों से उत्पादन लागत और प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। देश की सबसे बड़ी टायर निर्माता एमआरएफ (MRF) ने भी अपनी FY26 की वार्षिक रिपोर्ट में जिंसों (कमोडिटीज) की ऊंची कीमतों को मार्जिन के लिए बड़ा झटका बताया है।

 

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कंपनियों के पूंजीगत व्यय और क्षमता विस्तार की क्या योजनाएं हैं?

लागत के दबाव के बावजूद कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए अपना कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) कम नहीं कर रही हैं:

  • अपोलो टायर्स का विस्तार:
    अपोलो टायर्स ने अपने स्टैंडअलोन कैपेक्स को लगभग दोगुना कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने आंध्र प्रदेश और हंगरी में पैसेंजर कार रेडियल टायरों के उत्पादन विस्तार के लिए अपनी प्रतिबद्ध पूंजी में बड़ी बढ़ोतरी की है।

  • सिएट और एमआरएफ का निवेश:
    सिएट (CEAT) ने पैसेंजर व्हीकल, ट्रक व बस रेडियल, टू-व्हीलर और स्पेशलिटी टायरों की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश किया है। वहीं, एमआरएफ (MRF) ने भी अपने कैपेक्स के साथ-साथ प्रतिबद्ध निवेशों में भारी वृद्धि दर्ज की है। यह दर्शाता है कि पूरे उद्योग में कैपेक्स चक्र तेजी से बढ़ रहा है और यह FY27 में भी जारी रहेगा।

 

Indian Tyre Makers Face Margin Pressure and Higher Capex Outlay in FY27: Report
टायर - फोटो : AI

'प्रीमियम प्रोडेक्ट्स' को लेकर टायर कंपनियां क्या नया कर रही हैं?

बाजार में प्रीमियम गाड़ियों और आधुनिक तकनीक वाले टायरों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसे भुनाने के लिए कंपनियां नए-नए उत्पाद लॉन्च कर रही हैं:

  • अपोलो टायर्स (Apollo Tyres):
    कंपनी ने अपने 'अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस' पोर्टफोलियो को मजबूत किया है और अपने प्रीमियम ब्रांड 'फ्रेडस्टीन' के तहत बड़े ओईएम (ऑटो कंपनियों) के साथ साझेदारी बढ़ाई है।

  • सिएट (CEAT):
    सिएट ने नए प्रीमियम मोटरसाइकिल टायर पेश किए हैं। कंपनी ने रन फ्लैट टेक्नोलॉजी और काम टायर जैसे आधुनिक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पेश करने के साथ-साथ वर्ष के दौरान 240 नए उत्पाद लॉन्च किए।

  • एमआरएफ (MRF):
    एमआरएफ भारत में पैसेंजर वाहनों के लिए 20-इंच के ओई टायरों की आपूर्ति करने वाला पहला घरेलू निर्माता बन गया है। इसके अलावा, कंपनी ने विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए डिजाइन किए गए 'अकॉस्टिक फोम टायर्स' भी बाजार में उतारे हैं।


भारतीय टायर उद्योग का आगे का भविष्य कैसा दिखता है?

संक्षेप में कहें तो, महंगे कच्चे माल के कारण FY27 में टायर कंपनियों की लाभप्रदता थोड़ी सुस्त पड़ सकती है। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, प्रीमियम प्रोडक्ट्स और नई तकनीकों में लगातार किए जा रहे बड़े निवेश यह दर्शाते हैं कि देश की दिग्गज टायर कंपनियां अल्पकालिक चुनौतियों से बेपरवाह होकर बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत करने और लंबी अवधि के विकास के अवसरों को भुनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

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