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E20 Petrol: E20 पेट्रोल से घटेगा 2-6% माइलेज, पर इंजन को नहीं होगा कोई नुकसान; गडकरी ने संसद में दी जानकारी
Thu, 30 Jul 2026 05:16 PM IST
जागृति शुक्ला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Thu, 30 Jul 2026 05:16 PM IST
सार
E20 Fuel: क्या E20 पेट्रोल आपकी कार का माइलेज कम कर सकता है? सरकार के अनुसार इससे दो से छह फीसदी तक फ्यूल एफिशिएंसी घट सकती है, लेकिन इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। आइए जानते हैं E20 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने क्या कहा।
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नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर दी बड़ी जानकारी
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
Ethanol Blended Petrol: देश में सरकार E20 पेट्रोल को तेजी से बढ़ावा दे रही है। हालांकि इससे माइलेज घटने को लेकर सवाल थम नहीं रहे हैं। इसके लागू होने के साथ ही लोगों के मन में कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है और क्या इससे इंजन को नुकसान पहुंचता है।
इन्हीं सवालों को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को संसद (लोकसभा) में एक लिखित जवाब में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) के असर पर देश को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर गाड़ी की कैटेगरी और उसकी उम्र के आधार पर फ्यूल इकॉनमी (माइलेज) 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने देश भर के वाहन मालिकों को आश्वस्त करते हुए साफ किया कि डायनामोमीटर पर इंजन की मजबूती की जांच और सड़क पर किए गए गाड़ियों के लाइव टेस्ट में E20 फ्यूल की वजह से इंजन में कोई भी खराबी या असामान्य घिसाव नहीं देखा गया है।
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क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार इसे इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत बढ़ावा दे रही है, ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण घटाया जा सके।
कितना कम हो सकता है माइलेज?
नितिन गडकरी के अनुसार, वाहन की कैटेगरी और उम्र के आधार पर E20 पेट्रोल से माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि यह असर सभी वाहनों में एक जैसा नहीं होगा। अलग-अलग मॉडल और इंजन तकनीक के हिसाब से इसका प्रभाव बदल भी सकता है।
क्या इंजन को नुकसान पहुंचाता है E20?
E20 पेट्रोल के फायदे क्या हैं?
सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल के कई फायदे हैं। इससे एक्सेलरेशन बेहतर मिलता है। राइड क्वालिटी में सुधार होता है। कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 प्रतिशत तक कम होता है और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटती है। साथ ही पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है।
किन संस्थानों ने की जांच?
पुरानी गाड़ियों को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
भारत में कब शुरू हुआ EBP कार्यक्रम?
कितने वाहन इस्तेमाल कर रहे हैं E20?
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इन्हीं सवालों को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को संसद (लोकसभा) में एक लिखित जवाब में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) के असर पर देश को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर गाड़ी की कैटेगरी और उसकी उम्र के आधार पर फ्यूल इकॉनमी (माइलेज) 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
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हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने देश भर के वाहन मालिकों को आश्वस्त करते हुए साफ किया कि डायनामोमीटर पर इंजन की मजबूती की जांच और सड़क पर किए गए गाड़ियों के लाइव टेस्ट में E20 फ्यूल की वजह से इंजन में कोई भी खराबी या असामान्य घिसाव नहीं देखा गया है।
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क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार इसे इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत बढ़ावा दे रही है, ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण घटाया जा सके।
कितना कम हो सकता है माइलेज?
नितिन गडकरी के अनुसार, वाहन की कैटेगरी और उम्र के आधार पर E20 पेट्रोल से माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि यह असर सभी वाहनों में एक जैसा नहीं होगा। अलग-अलग मॉडल और इंजन तकनीक के हिसाब से इसका प्रभाव बदल भी सकता है।
क्या इंजन को नुकसान पहुंचाता है E20?
- इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि ARAI, SIAM और इंडियन ऑयल ने BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों पर कई टेस्ट किए हैं। इनके परिक्षणों में इंजन में कोई खराबी नहीं आई और ना ही इंजन की लाइफ पर कोई असर पड़ा।
- साथ ही किसी तरह की असामान्य जंग या घिसाव भी नहीं मिला। जिसके बाद सरकार ने कहा कि सड़क और लैब टेस्ट में इंजन सुरक्षित पाया गया।
E20 पेट्रोल के फायदे क्या हैं?
सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल के कई फायदे हैं। इससे एक्सेलरेशन बेहतर मिलता है। राइड क्वालिटी में सुधार होता है। कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 प्रतिशत तक कम होता है और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटती है। साथ ही पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है।
किन संस्थानों ने की जांच?
- इसी दौरान गडकरी ने जानकारी दी कि भारत स्टेज-3 (BS-III), भारत स्टेज-4 (BS-IV) और भारत स्टेज-6 (BS-VI) E10 गैसोलीन वाले दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों पर E20 के असर का पता लगाने के लिए एक खास स्टडी कराई गई थी।
- यह स्टडी ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया), SIAM (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) और IOCL (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने मिलकर की थी। इस स्टडी में संबंधित सर्टिफिकेशन की जरूरतों के हिसाब से स्टैंडर्ड टेस्टिंग और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के साथ मिलकर तैयार किए गए खास टेस्ट प्रोटोकॉल शामिल थे।
- मंत्री ने कहा कि गाड़ी की कैटेगरी और उम्र के आधार पर गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हालांकि, डायनामोमीटर पर इंजन की मजबूती की जांच और सड़क पर गाड़ी के टेस्ट में E20 की वजह से किसी भी प्रकार की खराबी नहीं देखी गई।
पुरानी गाड़ियों को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
- मंत्री ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को कोई अचानक नहीं लाया गया है, बल्कि इसे चरणों में, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और व्यापक सलाह-मशविरे की प्रक्रिया से लागू किया गया है।
- इसमें नीति आयोग, ऑटोमेकर्स, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), ARAI, SIAM, IIP (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम) और अन्य तकनीकी संस्थान शामिल हैं।
भारत में कब शुरू हुआ EBP कार्यक्रम?
- भारत में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी। 2006 में E5 लॉन्च किया गया। 2013-14 में ब्लेंडिंग 1.53% थी।
- पिछले साढ़े तीन साल से E15+ पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। पिछले ढाई साल से E19 और E20 बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहे हैं।
कितने वाहन इस्तेमाल कर रहे हैं E20?
- गडकरी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में भारत की सड़कों पर 20 करोड़ से ज्यादा दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर चल रही हैं।
- इसके बावजूद अब तक इथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने या गाड़ी बंद होने का कोई भी प्रमाणित सबूत नहीं मिला है।