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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Haryana NCR Fuel Stations to Ban Petrol, Diesel Without Valid PUC Certificate From October 1

PUCC: एक अक्तूबर से हरियाणा एनसीआर में बिना पीयूसीसी नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, जानें नई तकनीक और नियम

Thu, 30 Jul 2026 05:06 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 30 Jul 2026 05:06 PM IST
सार

हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। आगामी 1 अक्तूबर से वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना पेट्रोल पंपों से पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। पर्यावरण मानकों और प्रदूषण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार इस नई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के माध्यम से राज्य के एनसीआर पेट्रोल पंपों पर लागू करने जा रही है।

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Haryana NCR Fuel Stations to Ban Petrol, Diesel Without Valid PUC Certificate From October 1
No PUC No Fuel Rule - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले वाहन मालिकों के लिए 1 अक्तूबर से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। राज्य सरकार इस नियम को लागू करने के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। इसका उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित करना और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान करना है।

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'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नियम को लागू करने के लिए क्या तैयारी की जा रही है?

इस कड़े नियम को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार हाई-टेक कैमरों का सहारा ले रही है:

  • ANPR कैमरों की स्थापना:
    हरियाणा सरकार ने एनसीआर के सभी 2,780 ईंधन स्टेशनों पर 30 सितंबर तक स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरे लगाने की घोषणा की है।

  • सख्त समय-सीमा:
    वर्तमान में किसी भी पेट्रोल पंप पर यह तकनीक नहीं लगी है, लेकिन सरकार ने अगस्त से इसके इंस्टॉलेशन का लक्ष्य तय किया है। 1 अक्तूबर से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।

  • चरणबद्ध शुरुआत:
    अधिकारियों के अनुसार, अगस्त महीने में फरीदाबाद, झज्जर और सोनीपत जैसे शहरों के 775 पेट्रोल पंपों पर ANPR सिस्टम लगाने का काम शुरू होगा। इसके बाद सितंबर में बाकी बचे सभी पेट्रोल पंपों को इस तकनीक से लैस कर दिया जाएगा।

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पेट्रोल पंपों पर वाहनों की जांच और सत्यापन कैसे होगा?

एएनपीआर (ANPR) कैमरे की मदद से ईंधन मिलने की प्रक्रिया पूरी तरह से तकनीक पर आधारित और स्वचालित होगी:

  • नंबर प्लेट की ऑटोमैटिक स्कैनिंग:
    जैसे ही कोई वाहन पेट्रोल पंप पर पहुंचेगा, ANPR सिस्टम तुरंत उसकी नंबर प्लेट को पढ़ेगा और उसके पीयूसी स्टेटस की जांच करेगा।

  • वाहन (VAHAN) डेटाबेस से जुड़ाव:
    हर पेट्रोल पंप को सीधे केंद्र सरकार के 'वाहन' डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, जहां गाड़ियों के प्रदूषण प्रमाणपत्र का रिकॉर्ड रहता है। इस जांच प्रक्रिया में केवल कुछ ही सेकंड का समय लगेगा।

  • ईंधन की बिक्री पर रोक: यदि किसी वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट एक्सपायर (अमान्य) हो चुका है या उपलब्ध नहीं है, तो सिस्टम खुद-ब-खुद उस वाहन को ईंधन की बिक्री रोक देगा।

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किन वाहनों के लिए यह नियम लागू होगा और इसका उद्देश्य क्या है?

प्रशासन ने साफ किया है कि इस कदम का मकसद लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना है:

  • सभी प्रकार के वाहनों पर लागू:
    पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और सभी व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों के पास ईंधन भरवाने के लिए वैध पीयूसी प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।

  • नियम का मुख्य उद्देश्य:
    अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि इसका उद्देश्य वाहन चालकों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर पीयूसी नवीनीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि खराब रखरखाव वाली गाड़ियों से होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके।

  • भारी जुर्माने का प्रावधान:
    पीयूसी प्रमाण पत्र इस बात की पुष्टि करता है कि वाहन का उत्सर्जन केंद्रीय मोटर वाहन नियमों द्वारा तय सीमा के भीतर है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना पीयूसी गाड़ी चलाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह नया नियम सीधे ईंधन की उपलब्धता को पीयूसी से जोड़कर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेगा।

एनसीआर के अन्य राज्यों में इस नीति को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के बाद पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक समान कदम उठाए जा रहे हैं:

  • CAQM का निर्देश:
    वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर राज्यों को प्रदूषण नियमों का पालन बढ़ाने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान करने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

  • अन्य राज्यों में स्थिति:
    दिल्ली में 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नीति पहले ही लागू की जा चुकी है। अब हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और राजस्थान भी इसे अपने एनसीआर क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।

  • क्षेत्रीय सहयोग:
    अधिकारियों का मानना है कि पूरे एनसीआर में एक साथ किए जा रहे इस प्रयास से वाहन उत्सर्जन के नियमों का पालन बेहतर होगा और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

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