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Hindi News ›   Automobiles News ›   Highway Collapses: Ministry Removes 11 Officials, Punishes 11 More; Strict Action on Contractors, Says Gadkari

Highway Collapses: राजमार्गों के धंसने पर सख्त कार्रवाई, 11 अधिकारी सेवा से हटाए गए, 11 अन्य पर भी कार्रवाई

Thu, 30 Jul 2026 04:01 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 30 Jul 2026 04:01 PM IST
सार

देश में हाल के वर्षों में नए बने राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुल, फ्लाईओवर और सड़कों के धंसने या ढांचागत विफलता के मामलों के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सख्त कदम उठाए हैं। ऐसे मामलों के बाद मंत्रालय ने 11 अधिकारियों को सेवा से हटा दिया, जबकि 11 अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

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Highway Collapses: Ministry Removes 11 Officials, Punishes 11 More; Strict Action on Contractors, Says Gadkari
Highway Collapse Government Action - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नवनिर्मित राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलों, ओवरब्रिज और सड़कों के धंसने और संरचनात्मक विफलताओं (स्ट्रक्चरल फेलियर) के मामलों में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।

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संसद में पेश जानकारी के अनुसार, कार्य प्रदर्शन के मूल्यांकन के आधार पर 11 अधिकारियों को सेवा से हटा दिया गया है। जबकि कर्तव्य में लापरवाही और लापरवाही के आरोप में अन्य 11 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। संसद में यह बात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत द्वारा राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए बताई।

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Highway Collapses: Ministry Removes 11 Officials, Punishes 11 More; Strict Action on Contractors, Says Gadkari
Nitin Gadkari - फोटो : अमर उजाला

सड़क हादसों और संरचनात्मक विफलताओं पर क्या-क्या कार्रवाई की गई है?

विभिन्न राज्यों में पुलों, फ्लाईओवरों और राजमार्गों के इंफ्रास्ट्रक्चर में आई खामियों के बाद मंत्रालय ने अधिकारियों के साथ-साथ निजी कंपनियों पर भी कड़ी कार्रवाई की है:

  • अधिकारियों पर कार्रवाई:
    प्रदर्शन मूल्यांकन के बाद 11 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त/सेवामुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा, कर्तव्य में लापरवाही बरतने के लिए 11 अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

  • ठेकेदारों और सलाहकारों पर शिकंजा:
    कमियों की प्रकृति के आधार पर ठेकेदारों, कंसेषनराइजर्स और कंसल्टेंट्स के अनुबंध रद्द (टर्मिनेशन) कर दिए गए हैं। उन पर वित्तीय जुर्माना लगाने, प्रतिबंधित (डिबार) करने, ब्लैकलिस्ट करने और नॉन-परफॉर्मर घोषित करने जैसे कदम उठाए गए हैं।

  • ठेकेदारों के खर्च पर दोबारा निर्माण:
    परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों के निलंबन, इंजीनियरों की सेवा समाप्ति, ठेकेदारों तथा स्वतंत्र इंजीनियरिंग फर्मों पर प्रतिबंध के साथ-साथ नुकसान का पूरा पुनर्गठन (रीकंस्ट्रक्शन) ठेकेदारों के अपने खर्च पर कराया गया है।

किन-किन राज्यों में सामने आईं ऐसी घटनाएं?

केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 और 2026 के दौरान कुल 19 ऐसी घटनाएं सामने आईं। ये घटनाएं जिन 9 राज्यों से जुड़ी थीं, वे निम्नलिखित हैं:

  • गुजरात

  • कर्नाटक

  • केरल

  • मध्य प्रदेश

  • महाराष्ट्र

  • तमिलनाडु

  • उत्तर प्रदेश

  • पश्चिम बंगाल

  • मेघालय

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टनल का हिस्सा गिरा - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के धंसने की क्या वजह रही और वहां क्या एक्शन लिया गया?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के एक अलग सवाल का जवाब देते हुए नितिन गडकरी ने पूरी स्थिति और उस पर ली गई एक्शन रिपोर्ट की जानकारी दी:

  • गड्ढों की मरम्मत:
    प्रभावित स्थान पर दो गड्ढे हो गए थे, जिन्हें अनुबंध की शर्तों के तहत ठेकेदार ने अपने खर्च पर ठीक कर दिया है।

  • धंसने का मुख्य कारण:
    स्थानीय स्तर पर जलजमाव को इसका मुख्य कारण बताया गया है। स्थल पर विरोध और बाधाओं के कारण जल निकासी (ड्रेनेज) कनेक्शन और ढलान सुरक्षा (स्लोप प्रोटेक्शन) के काम में देरी हुई, जिससे भारी बारिश के दौरान पानी जमा हो गया।

  • अधिकारियों का निलंबन व नोटिस:
    इस मामले में अथॉरिटी इंजीनियर (थर्ड पार्टी) और ठेकेदार दोनों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा, अथॉरिटी इंजीनियर के टीम लीडर और ठेकेदार के प्रोजेक्ट मैनेजर को निलंबित कर दिया गया है।

  • स्वतंत्र जांच और ऑडिट:
    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और आईआईटी रुड़की द्वारा स्वतंत्र स्ट्रक्चरल और पेवमेंट ऑडिट कराया गया है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का क्या सुरक्षा ढांचा है?

मंत्रालय ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और जांच के लिए एनएचएआई के पास एक मौजूदा और सख्त ढांचा मौजूद है:

  • सुरक्षा और निरीक्षण नियम: इस ढांचे के तहत स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट, निवारक संरचनात्मक निरीक्षण (प्रिवेंटिव स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन) अनिवार्य किए गए हैं।

  • त्वरित रिपोर्टिंग तंत्र: किसी भी संरचनात्मक विफलता की जांच के लिए विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जाता है। इन समितियों को 3 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 7 दिनों के भीतर अंतिम विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होती है।

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