CNG: कारों में सुपरहिट पर बाइकों में फ्लॉप क्यों हो रही सीएनजी तकनीक? जानें दोनों सेगमेंट की अलग कहानी
भारत में वैकल्पिक ईंधन अपनाने की दिशा में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, इस बदलाव की तस्वीर कारों और दोपहिया वाहनों में बिल्कुल अलग नजर आती है।
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भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने की प्रक्रिया एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। कार और दोपहिया वाहनों के बीच सीएनजी (CNG) को लेकर दो बिल्कुल अलग रुख देखने को मिल रहे हैं।
जहां चार पहिया वाहनों (पैसेंजर व्हीकल्स) में सीएनजी तकनीक सुपरहिट साबित हो रही है। जिसने वित्त वर्ष 2026 में 10 लाख से अधिक बिक्री का मील का पत्थर पार कर लिया है। वहीं दुनिया की पहली सीएनजी मोटरसाइकिल शुरुआती आकर्षण के बाद ग्राहकों के लिए तरसती नजर आ रही है।
ऑटो उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कुल कार बिक्री में सीएनजी का हिस्सा बढ़कर 21.7 प्रतिशत हो गया। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियों ने लगातार नए सीएनजी मॉडल लॉन्च कर इस बाजार को बड़ा किया है। लेकिन दोपहिया वाहनों की दुनिया में न तो बिक्री के स्तर पर और न ही नए मॉडल लॉन्च के मामले में ऐसा कोई उत्साह दिख रहा है।
दुनिया की पहली CNG बाइक 'बजाज फ्रीडम 125' की बिक्री में गिरावट क्यों आई?
बजाज ऑटो ने 5 जुलाई 2024 को 'फ्रीडम 125' लॉन्च की थी। इसे रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा था।
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शुरुआती दौर की सफलता:
शुरुआती उत्सुकता और डीलरों के पास भेजी गई गाड़ियों के दम पर इस बाइक ने वित्त वर्ष 2025 में 74,730 यूनिट्स की अच्छी-खासी बिक्री दर्ज की। -
दूसरे साल में भारी गिरावट:
अपने दूसरे ही साल में बजाज फ्रीडम की बिक्री में 76 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह केवल 17,959 यूनिट्स पर सिमट कर रह गई। -
हालिया बिक्री के आंकड़े:
यह गिरावट यहीं नहीं रुकी; अप्रैल 2026 में केवल 644 यूनिट्स और मई 2026 में महज 550 यूनिट्स ही बिक सकीं।
कारों में सीएनजी की सफलता और बाइकों में इसकी असफलता के क्या कारण हैं?
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थशास्त्र और भौतिक विज्ञान के नियमों ने बाइकों में सीएनजी के गणित को बिगाड़ दिया:
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कारों में स्पेस और रेंज का संतुलन:
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कार कंपनियों ने डुअल-सिलेंडर तकनीक का इस्तेमाल करके बूट स्पेस (डिक्की की जगह) को बचा लिया है।
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मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों के अंडर-फ्लोर बड़े टैंक 300 किमी से ज्यादा की सीएनजी रेंज देते हैं।
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अगर कोई रोज 50-60 किमी गाड़ी चलाता है, तो पेट्रोल के मुकाबले 3 रुपये प्रति किमी की बचत से कार की अतिरिक्त 1 लाख रुपये की शुरुआती कीमत आसानी से वसूल हो जाती है। कमर्शियल या टैक्सी चालकों के लिए यह और भी फायदेमंद है।
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दोपहिया वाहनों में स्पेस और रेंज की चुनौती:
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बजाज ने फ्रीडम 125 में मोटरसाइकिल चेसिस के अंदर 2 किलोग्राम का हाई-प्रेशर सीएनजी सिलेंडर सुरक्षित तरीके से फिट तो कर दिया। लेकिन इसने पेट्रोल टैंक की जगह छीन ली। सामान्य 10-12 लीटर का पेट्रोल टैंक घटकर केवल 2 लीटर का रह गया।
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2 किलो सीएनजी से वास्तविक दुनिया में केवल 100 किमी की रेंज ही मिल पाती है। इसके चलते रोजाना यात्रा करने वाले चालकों को मामूली बचत के लिए ऑटो-रिक्शा और टैक्सियों की लंबी-लंबी कतारों में बार-बार सीएनजी पंपों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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क्या इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों ने सीएनजी बाइक का रास्ता रोका?
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती पहुंच भी सीएनजी बाइकों की नाकामी की एक बड़ी वजह बनी:
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घर पर चार्जिंग की सुविधा:
हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने पूरी तरह से ईवी पर ध्यान केंद्रित किया, जो रात भर घर पर चार्ज करने की सबसे बड़ी सुविधा देते हैं। -
बजाज के अपने पोर्टफोलियो का अंतर:
बजाज के अपने ब्रांड्स में यह अंतर साफ दिखता है। जहां एक तरफ सीएनजी फ्रीडम 125 की बिक्री वित्त वर्ष 2026 में धड़ाम से गिरी। वहीं बजाज के 'चेतक इलेक्ट्रिक' ने 16% की बढ़त हासिल की। चेतक की बिक्री वित्त वर्ष 2025 की 2,60,033 यूनिट्स से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 3,02,674 यूनिट्स पर पहुंच गई।
विशेषज्ञों का सीएनजी तकनीक के भविष्य पर क्या कहना है?
एक शीर्ष वैश्विक सलाहकार फर्म के वरिष्ठ ऑटोमोटिव विश्लेषक का कहना है कि किसी भी नई तकनीक को बाजार में अपनी जगह बनाने में समय लगता है:
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बाजार की परिपक्वता:
फ्रीडम 125 ने दोपहिया बाजार में एक नई श्रेणी बनाकर एक बड़ा नवाचार किया था। शुरुआती साल के बाद बिक्री में आई यह कमी बाजार के परिपक्व होने, ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं और किसी भी नई तकनीक को अपनाने के स्वाभाविक चक्र का हिस्सा है। -
उपयोग के आधार पर चुनाव:
जहां शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, वहीं जिन इलाकों में रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, वहां अधिक दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए सीएनजी अभी भी एक आकर्षक विकल्प हो सकता है। -
तीन पावरट्रेन का सह-अस्तित्व:
बाजार में सीएनजी से ईवी की ओर पूरी तरह से बदलाव के बजाय ग्राहक अब अपनी जरूरत, बचत और सुविधा के आधार पर तकनीक चुन रहे हैं। आने वाले समय में आईसीई (पेट्रोल/डीजल), सीएनजी और इलेक्ट्रिक - तीनों पावरट्रेन अलग-अलग ग्राहक वर्गों की जरूरतों को पूरा करते हुए एक साथ बाजार में बने रहेंगे।
दोपहिया बाजार में सीएनजी का आगे का रास्ता कैसा दिखता है?
उद्योग के ताजा रुख से लगता है कि अन्य कंपनियां अब सीएनजी दोपहिया बाजार में उतरने से कतरा रही हैं:
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टीवएस का रुख:
टीवीएस ने 'भारत मोबिलिटी एक्सपो 2025' की शुरुआत में अपने जुपिटर सीएनजी कॉन्सेप्ट को प्रदर्शित किया था। हालांकि, डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी कंपनी ने इसे बाजार में लॉन्च नहीं किया है। -
योजना पर पुनर्विचार:
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि बजाज फ्रीडम की गिरती बिक्री को देखकर टीवीएस ने अपने सीएनजी मॉडल को लॉन्च करने के फैसले पर पुनर्विचार किया है। -
भविष्य की दिशा:
लगभग सभी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स का पूरा ध्यान अब इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो रहा है। जिससे दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में सीएनजी का भविष्य काफी धुंधला नजर आ रहा है।