सज्जनगढ़ से प्लास्टिक कचरे का द एंड: पायलट प्रोजेक्ट शुरू, वाहनों की चेकिंग से लेकर जुर्माने तक की तैयारी!
विश्व पर्यावरण दिवस पर उदयपुर की सज्जनगढ़ सेंचुरी को प्लास्टिक फ्री ज़ोन घोषित कर दिया गया है। शुक्रवार से प्लास्टिक की पानी की बोतलों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू हो गया है।
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उदयपुर की प्रसिद्ध सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। शुक्रवार से सेंचुरी और बायो पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक की पानी की बोतलों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र को प्लास्टिक फ्री ज़ोन बनाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। वन विभाग का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करना और प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखना है।
आज से लागू हुआ प्लास्टिक फ्री ज़ोन
वन विभाग ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सज्जनगढ़ सेंचुरी को प्लास्टिक फ्री ज़ोन घोषित कर दिया है। इसके तहत पर्यटक अब सेंचुरी और बायो पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक की पानी की बोतलें लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है।
कांच की बोतलों में मिलेगा पानी
प्लास्टिक बोतलों के विकल्प के रूप में वन विभाग ने एक स्टार्टअप कंपनी के सहयोग से विशेष व्यवस्था की है। अब सेंचुरी की पार्किंग और किले पर स्थित रेस्टोरेंट में पर्यटकों को कांच की बोतलों में पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
एक कांच की बोतल की कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है। बोतल वापस जमा कराने पर पर्यटकों को 40 रुपये वापस लौटा दिए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और पुनः उपयोग योग्य संसाधनों को बढ़ावा देना है।
नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना
वन विभाग ने बताया कि शुरुआती दिनों में पर्यटकों को नए नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके बाद नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति प्लास्टिक की पानी की बोतल लेकर सेंचुरी क्षेत्र में प्रवेश करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा पर फोकस
डीएफओ यादवेंद्र सिंह चूंडावत ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य सेंचुरी क्षेत्र को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि अक्सर पर्यटक प्लास्टिक की बोतलें जंगलों, रास्तों और किले की दीवारों के आसपास फेंक देते हैं। इससे न केवल गंदगी फैलती है बल्कि वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है। नई व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
वाहनों की होगी जांच
नई व्यवस्था के तहत सेंचुरी में प्रवेश करने वाले सभी टैक्सी और निजी वाहनों की जांच की जाएगी। अधिकारियों की टीम यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक की पानी की बोतल अंदर न ले जा सके।
वन विभाग ने टैक्सी संचालकों को भी इस नियम के पालन की जिम्मेदारी दी है, ताकि पर्यटकों को पहले से इसकी जानकारी मिल सके और नियमों का प्रभावी तरीके से पालन हो।
पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने का प्रयास
वन विभाग का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम न केवल उदयपुर के प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, बल्कि पर्यटकों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बनेगा। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।