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Rajasthan News: पुलिसकर्मियों ने पेश की अनूठी मिसाल, महिला कुक के बेटे की शादी में 1.11 लाख का मायरा भरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: उदयपुर ब्यूरो Updated Mon, 16 Mar 2026 09:44 PM IST
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सार

Udaipur News: उदयपुर के प्रतापनगर थाना पुलिसकर्मियों ने थाने में 25 वर्षों से काम कर रही महिला कुक मीराबाई के बेटे की शादी में 1.11 लाख रुपये का मायरा भरकर मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की। पुलिसकर्मी ढोल-नगाड़ों के साथ उनके घर पहुंचे।

Udaipur News: Police Personnel Contribute ₹1.11 Lakhs as 'Mayra' at Wedding of a Female Cook's Son
पुलिकर्मियों ने महिला कुक के बेटे की शादी में भरा 1 लाख 11 हजार का मायरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उदयपुर शहर के प्रतापनगर थाना पुलिसकर्मियों ने इंसानियत और अपनत्व का उदाहरण पेश करते हुए थाने में लंबे समय से कार्यरत महिला कुक के परिवार की खुशी में सहभागिता निभाई। थाने में पिछले 25 वर्षों से भोजन बना रही मीराबाई के बेटे की शादी के अवसर पर पुलिसकर्मियों ने सामूहिक रूप से 1 लाख 11 हजार रुपये का मायरा भरकर उन्हें सम्मानित किया। पुलिसकर्मी ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक अंदाज में उनके घर पहुंचे।

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ढोल-नगाड़ों के साथ घर पहुंचे पुलिसकर्मी
जानकारी के अनुसार, प्रतापनगर थाना पुलिस के स्टाफ ने मीराबाई के बेटे की शादी के मौके पर सामूहिक रूप से मायरा भरने का निर्णय लिया। थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में पुलिसकर्मी साफा पहनकर ढोल-नगाड़ों की धुन पर सुंदरवास स्थित मीराबाई के घर पहुंचे। पुलिसकर्मियों के हाथों में नोटों और कपड़ों से सजे थाल थे, जिनके साथ वे पारंपरिक रीति से मायरा लेकर पहुंचे।
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पारंपरिक तरीके से किया गया सम्मान
मीराबाई के घर पहुंचने पर उनके परिवार ने पुलिसकर्मियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस दौरान थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित ने मीराबाई को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसके बाद पुलिस टीम की ओर से 1 लाख 11 हजार रुपये की राशि पैरावणी के साथ भेंट की गई। इस भावुक क्षण के दौरान मीराबाई की आंखें नम हो गईं।

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25 वर्षों से थाने में बना रही हैं भोजन
सब इंस्पेक्टर रेणू खोईवाल ने बताया कि मीराबाई पिछले 25 वर्षों से प्रतापनगर थाने में भोजन बना रही हैं। वे सभी पुलिसकर्मियों के खाने-पीने का ध्यान एक मां की तरह रखती हैं और भोजन तैयार होने के बाद सभी को बार-बार खाने के लिए बुलाती हैं। इसी अपनत्व को देखते हुए थाने के स्टाफ ने उनके बेटे की शादी के अवसर पर मायरा भरने का निर्णय लिया।
 
जीवन संघर्ष की कहानी भी आई सामने
मीराबाई ने बताया कि शादी के एक साल बाद ही सड़क हादसे में उनके पति का निधन हो गया था। उस समय उनका बेटा मुकेश गायरी गर्भ में था। इसके बाद उन्होंने आसपास के घरों में झाड़ू-पोछा और अन्य काम कर बेटे का पालन-पोषण किया। बाद में एक थानाधिकारी के घर भोजन बनाने का काम मिला और वहीं से उन्हें प्रतापनगर थाने में भोजन बनाने की जिम्मेदारी मिल गई।
 
भाइयों के नहीं आने पर पुलिस परिवार बना सहारा
मीराबाई के तीन भाइयों में से दो भाई पारिवारिक नाराजगी के कारण मायरा भरने कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। ऐसे में प्रतापनगर थाना पुलिस के कर्मचारियों ने आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी निभाई। इस पहल को स्थानीय स्तर पर मानवीय संवेदना और सामाजिक सहयोग की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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