Udaipur News: धर्म परिवर्तन मामले पर सियासत तेज, कांग्रेस बोली- नहीं हुआ धर्म परिवर्तन, ये आरएसएस का एजेंडा
उदयपुर के कानुवाड़ा गांव में कथित धर्म परिवर्तन मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा इसे अंतरराज्यीय षड्यंत्र बता रही है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि ग्रामीणों ने किसी भी तरह के धर्म परिवर्तन से इंकार किया है।
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ऋषभदेव थाना क्षेत्र के कानुवाड़ा गांव में सामने आए कथित धर्म परिवर्तन मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। एक ओर भाजपा इसे अंतरराज्यीय साजिश बता रही है तो वहीं कांग्रेस ने धर्म परिवर्तन के आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को आरएसएस के एजेंडे का हिस्सा बताया है। मंगलवार को जिला देहात कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद रघुवीर मीणा के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल कानुवाड़ा गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों और संबंधित परिवारों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
मीडिया से बातचीत में रघुवीर मीणा ने कहा कि ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि उन्होंने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया है और न ही किसी प्रकार के प्रलोभन या दबाव में धर्म बदलने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है और यह आरएसएस के एजेंडे का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।
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इससे पहले रविवार को उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत भी कानुवाड़ा गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों से बातचीत के बाद उन्होंने मामले को अंतरराज्यीय षड्यंत्र करार दिया था। रावत का दावा था कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित किया जा रहा था और कुछ लोग इसके प्रभाव में भी आ चुके हैं। सांसद रावत ने कहा था कि यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना को प्रभावित करने की सुनियोजित साजिश प्रतीत होती है, जिसकी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 6 जून को कानुवाड़ा-बिलखाई क्षेत्र में बाबूलाल के नेतृत्व में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। इस सभा में आसपास के 20 से अधिक गांवों के करीब 200 लोग शामिल हुए थे। ग्रामीण नानालाल की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गरीब आदिवासी परिवारों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन पादरियों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया। बाद में सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां धर्म परिवर्तन के आरोपों को गंभीर बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।