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रुपहले पर्दे से सियासत के मैदान तक...बेहद दिलचस्प है जया प्रदा का सियासी सफर

Tue, 26 Mar 2019 10:05 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prabudhh Jain Updated Tue, 26 Mar 2019 10:05 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Political career and rise and fall of Jaya Prada
जया प्रदा भाजपा में शामिल - फोटो : अमर उजाला
एक वक्त समाजवादी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहीं जया प्रदा ने अब हाथों में भाजपा का कमल थाम लिया है। मंगलवार 26 मार्च को वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। उन्हें यूपी के रामपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया गया है। अब उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां से होगा। रामपुर को आजम का गढ़ माना जाता है। दोनों नेताओं की पुरानी अदावत भी जगजाहिर है। यानी जंग दिलचस्प होगी। सपा-बसपा गठजोड़ के चलते भाजपा के लिए इस बार हालात बेहद सख्त दिख रहे हैं। इस लिहाज से जया प्रदा का भाजपा में शामिल होना बेहद अहम माना जा रहा है। 


 
Lok Sabha Elections 2019: Political career and rise and fall of Jaya Prada
जया प्रदा
सियासी सफर 

2004 और 2009 में जया रामपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं। दोनों ही मौकों पर उनके सामने कांग्रेस की नूर बानो थी जिन्हें शिकस्त का मुंह देखना पड़ा। बॉलीवुड में लंबे समय तक काम करने वालीं जया प्रदा साल 1994 में फिल्म अभिनेता से नेता बने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव की पार्टी तेलुगु देशम पार्टी का हिस्सा बनी थीं। इसके बाद जया एनटी रामाराव को छोड़कर, तेलुगु देशम के चंद्रबाबू नायडू वाले गुट में शामिल हो गईं। 1996 में जया आंध्र प्रदेश से ही राज्यसभा पहुंचीं। बाद में चंद्रबाबू से मनमुटाव होने के बाद जया प्रदा ने तेलुगु देशम को भी अलविदा कह दिया और समाजवादी पार्टी का हिस्सा बन गईं। 

 
Lok Sabha Elections 2019: Political career and rise and fall of Jaya Prada
भाजपा में शामिल हुईं जया प्रदा - फोटो : ANI
रामपुर से दो बार सांसद 

2004 लोकसभा चुनाव में जया प्रदा ने सपा के टिकट पर रामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और 85 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। ये वो दौर था जब सपा में अमर सिंह की तूती बोलती थी और वह मुलायम सिंह यादव के बेहद करीब थे। 2009 में जया प्रदा को यहां से दोबारा टिकट मिला। इसी दौर में उनकी आजम खां से अदावत भी शुरू हो गई थी। मामला गंभीर आरोपों तक पहुंच गया। उन्होंने आजम पर अपनी अभद्र तस्वीरें बंटवाने जैसे आरोप लगाए। अंदरुनी लड़ाई के बावजूद इस चुनाव में उन्होंने करीब 30 हजार वोटों से जीत हासिल की। आजम से उनकी अदावत चरम पर पहुंच गई थी। बाद में हालात और बिगड़ते चले गए। 
 
 
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Lok Sabha Elections 2019: Political career and rise and fall of Jaya Prada
लोकसभा में मुलायम सिंह यादव
सपा ने दिया झटका 

समाजवादी पार्टी में अमर सिंह के समीकरण बिगड़ते ही हालात भी बदल गए। जया प्रदा की भी सपा से दूरी बन गई। मामला इतना बिगड़ा कि फरवरी 2010 में अमर सिंह के साथ जया प्रदा को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सपा से निकाल दिया गया। 2011 में अमर सिंह और जया प्रदा ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मंच बनाई। अमर सिंह ने 2012 विधान सभा चुनाव में 403 सीटों में से 360 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। हालांकि कोई भी उम्मीदवार जीतने में सफल नहीं रहा। 2014 में दोनों ने आरएलडी ज्वाइन की। जया प्रदा को बिजनौर से लोकसभा चुनाव का टिकट मिला जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।  

 
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Lok Sabha Elections 2019: Political career and rise and fall of Jaya Prada
जया प्रदा-अमर सिंह (फाइल फोटो)
अमर सिंह विवाद

सपा के पूर्व महासचिव अमर सिंह कई मौकों पर कह चुके हैं कि वह अब भी मुलायम सिंह के साथ हैं, लेकिन अखिलेश यादव का रवैया सही नहीं है। दो साल पहले सपा में आए सियासी-पारिवारिक तूफान के लिए काफी हद तक जिम्मेदार अमर सिंह को भी माना जाता रहा है। बताया जाता है कि अखिलेश यादव ने अमर सिंह की लगातार बढ़ती दखलंदाजी के चलते ही पार्टी की कमान अपने हाथ में लेकर पिता मुलायम सिंह को संरक्षक बना दिया। 

बहरहाल, कमल थामने का फायदा जया प्रदा को कितना होता है ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन भाजपा में आने से जया प्रदा को एक बार चर्चा जरूर मिल गई है। अगर किस्मत भी मेहरबान रही तो उनके अच्छे दिन फिर लौट सकते हैं। 

 
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