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बच्चों को मिलता रहे सही पोषण इसलिए रोज़ 18 किमी नाव चलाकर उन तक पहुंचती हैं ये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

Sat, 28 Nov 2020 10:05 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Sat, 28 Nov 2020 10:05 AM IST
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an anganwadi worker rows 18 km daily to feed children
आंगनबाड़ी की सक्रिय कार्यकर्ता हैं रेलु - फोटो : social media

कहते हैं न कि यदि किसी व्यक्ति में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा हो तो उसके लिए कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती है। वह हर मुश्किल को धता बताकर उस पर पार पाने का हौसला रखता है। ऐसी ही जिंदादिली की अद्भुत मिसाल हैं रेलू वसावे। महाराष्ट्र के नंदूरबार में रहने वाली रेलू एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए रेलू से जुड़ी अन्य बातें। 

 

 

 

 

an anganwadi worker rows 18 km daily to feed children
आंगनबाड़ी में काम करती हैं रेलु वसावे - फोटो : amarujala

यह है रेलू का काम
27 वर्षीया रेलू वसावे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के सुदूरवर्ती आदिवासी गांव चिमलखाड़ी में स्थित आंगनबाड़ी में कार्य करती हैं। रेलू वसावे 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और उनके विकास पर काम करती हैं। वे उनके स्वास्थ्य और वज़न पर भी नजर रखती हैं और साथ ही अनुसार पोषण सम्बंधी खुराक भी देती हैं।

an anganwadi worker rows 18 km daily to feed children
रेलू रखती हैं बच्चोंं के पोषण का ध्यान - फोटो : social media

कोराेना के कारण उठाया कदम
दरअसल, पूर्व में क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी आया करती थीं, और स्वयं की तथा 6 वर्ष के कम उम्र के बच्चों के पोषण की जांच और खुराक आंगनबाड़ी से लिया करती थीं। किंतु काेरोना महामारी के डर के कारण क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी तक नहीं पहुंच पाईं तो रेलू ने स्वयं उन लोगों महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं तक पहुंचने की ठानी। 

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an anganwadi worker rows 18 km daily to feed children
नाव चलाकर जाती हैं रेलू - फोटो : अमर उजाला।

रोज चलाती हैं 18 किमी नाव
दरअसल, रेलू के गांव तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग नहीं है और वहां तक नदी मार्ग से नाव द्वारा ही पहुंचा जा सकता है। ऐसे में महिलाओं के घर तक पहुंचने के लिए रेलू ने भी नाव का सहारा लिया और वे रोज़ाना 18 किमी नाव चलाकर अपने 25 नवजात और कुपोषित बच्चे तथा सात गर्भवती महिलाओं के पास पहुंचती हैं।

 

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an anganwadi worker rows 18 km daily to feed children
रेलू ने मछुआरे से उधार ले रखी है नाव - फोटो : social media

उधार की नाव से जाती हैं रेलू
इस काम के लिए एक स्थानीय मछुआरे से रेलू ने नाव उधार पर ले रखी है। सुबह 7:30 बजे रेलू आंगनबाड़ी पहुंचती हैं और दोपहर तक काम करती हैं। उसके बाद वे नाव से महिलाओं के घर पहुंचती हैं और वहां से देर शाम लौटती हैं। अक्सर वे अकेले ही सारा सामान लेकर नाव से जाती हैं। कभी-कभी उनकी रिश्तेदार संगीता, जो कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं उनके साथ होती हैं। नाव से पहुंचने के बाद भी रेलू की परेशानियां कम नहीं होतीं और कई घरों तक पहुंचने के लिए उन्हें ऊंचे स्थानों पर चढ़ाई भी करनी पड़ती है।

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