राष्ट्रीय शिक्षा नीति: हिमाचल में नर्सरी से पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आयु मानदंड निर्धारित, जानें क्या बदला
बालवाटिका-1 (नर्सरी) से पहली कक्षा तक के लिए न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित की गई है। यह नियम राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नर्सरी से पहली कक्षा तक प्रवेश के लिए आयु मानदंड स्पष्ट किए हैं। इसके अनुसार, बालवाटिका-1 (नर्सरी) से पहली कक्षा तक के लिए न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित की गई है। यह नियम राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। शिक्षा विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, बालवाटिका-1(नर्सरी) में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 3 वर्ष होनी चाहिए। बालवाटिका-2 (एलकेजी) के लिए 4 वर्ष और बालवाटिका-3 (यूकेजी) के लिए पांच वर्ष की आयु अनिवार्य है। पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
मानदंड केवल न्यूनतम आयु निर्धारित करते हैं: विभाग
यह आयु एडमिशन के शैक्षणिक वर्ष में 30 सितंबर या उससे पहले तक पूरी होनी आवश्यक है। यह मानदंड 12 मार्च 2026 को जारी विभाग के पिछले पत्र के क्रम में जारी किए गए हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये मानदंड केवल न्यूनतम आयु निर्धारित करते हैं। बालवाटिका-1, बालवाटिका-2 या बालवाटिका-3 में प्रवेश के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है। यदि कोई अभिभावक अपने बच्चे को निर्धारित न्यूनतम आयु से अधिक होने पर भी इन कक्षाओं में प्रवेश दिलाना चाहता है, तो उसे मना नहीं किया जाएगा। जैसे चार साल के बच्चे को नर्सरी, पांच वर्षीय को एलकेजी व छह वर्ष के बच्चे को यूकेजी में प्रवेश दिया जा सकता है।
नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य
सरकार ने सभी संबंधित स्कूलों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ आरटीई अधिनियम और आरटीई हिमाचल प्रदेश नियम 2025 के तहत कार्रवाई होगी। अन्य प्रासंगिक निर्देशों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षा नीति 2020 के तहत बदलाव
ये नए आयु मानदंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप हैं। नीति का उद्देश्य बच्चों के लिए एक संरचित और आयु उपयुक्त सीखने का माहौल सुनिश्चित करना है। इससे प्रारंभिक शिक्षा में एकरूपता आएगी। अतिरिक्त शिक्षा सचिव अनिल चौहान ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है।