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Shimla News: 4 दिन में फतह की 7 हजार मीटर से अधिक ऊंची चोटी
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टीम व्हाइट एक्सपेडिशन ने रचा इतिहास
माउंट नुन पर चार सदस्यीय टीम ने की चढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालय की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों में शुमार 7,135 मीटर ऊंचे माउंट नुन पर टीम व्हाइट एक्सपेडिशन ने शानदार उपलब्धि हासिल की है।
टीम के चार पर्वतारोहियों ने महज चार दिनों में माउंट नुन की ट्रू समिट तक पहुंचकर सफल आरोहण किया। इस टीम में सोलन जिले के चायल की निकिता ठाकुर भी शामिल रहीं। इसे पर्वत के इतिहास में सबसे तेज सफल चढ़ाइयों में से एक बताया जा रहा है। अभियान का नेतृत्व नेपाल के राहुल उर्फ रिक्की माउंटेनियर ने किया। इनके साथ निकिता ठाकुर के अलावा राकेश नेगी और विशाल ठाकुर ने चुनौतीपूर्ण अभियान में हिस्सा लिया। चारों पर्वतारोहियों ने बेहतरीन टीमवर्क, तकनीकी दक्षता और मजबूत शारीरिक एवं मानसिक तैयारी के दम पर यह कठिन लक्ष्य हासिल किया।
अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को खड़ी बर्फीली दीवारों, गहरी दरारों (क्रेवास), कठिन रॉक वॉल्स और तेज हवाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 7 हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और मौसम में तेजी से बदलाव ने अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। इतनी ऊंचाई पर महज चार दिनों में सफल आरोहण के लिए पहले से बेहतर एक्लीमेटाइजेशन, असाधारण शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और तकनीकी पर्वतारोहण कौशल की जरूरत होती है। टीम ने अपनी तैयारी और अनुभव के साथ मौसम तथा पर्वतीय परिस्थितियों का आकलन करते हुए रणनीति बनाई और सुरक्षित तरीके से ट्रू समिट तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
रफ्तार से ज्यादा जरूरी है सही फैसला : राहुल
टीम लीडर राहुल उर्फ रिक्की माउंटेनियर ने कहा कि यह उपलब्धि केवल तेज चढ़ाई का परिणाम नहीं है। इसके पीछे लंबे समय की तैयारी, पर्वतारोहण का अनुभव और पूरी टीम के बीच बेहतर तालमेल रहा। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण में गति महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी सही निर्णय, सुरक्षा और बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करना है।
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माउंट नुन पर चार सदस्यीय टीम ने की चढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालय की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों में शुमार 7,135 मीटर ऊंचे माउंट नुन पर टीम व्हाइट एक्सपेडिशन ने शानदार उपलब्धि हासिल की है।
टीम के चार पर्वतारोहियों ने महज चार दिनों में माउंट नुन की ट्रू समिट तक पहुंचकर सफल आरोहण किया। इस टीम में सोलन जिले के चायल की निकिता ठाकुर भी शामिल रहीं। इसे पर्वत के इतिहास में सबसे तेज सफल चढ़ाइयों में से एक बताया जा रहा है। अभियान का नेतृत्व नेपाल के राहुल उर्फ रिक्की माउंटेनियर ने किया। इनके साथ निकिता ठाकुर के अलावा राकेश नेगी और विशाल ठाकुर ने चुनौतीपूर्ण अभियान में हिस्सा लिया। चारों पर्वतारोहियों ने बेहतरीन टीमवर्क, तकनीकी दक्षता और मजबूत शारीरिक एवं मानसिक तैयारी के दम पर यह कठिन लक्ष्य हासिल किया।
अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को खड़ी बर्फीली दीवारों, गहरी दरारों (क्रेवास), कठिन रॉक वॉल्स और तेज हवाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 7 हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और मौसम में तेजी से बदलाव ने अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। इतनी ऊंचाई पर महज चार दिनों में सफल आरोहण के लिए पहले से बेहतर एक्लीमेटाइजेशन, असाधारण शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और तकनीकी पर्वतारोहण कौशल की जरूरत होती है। टीम ने अपनी तैयारी और अनुभव के साथ मौसम तथा पर्वतीय परिस्थितियों का आकलन करते हुए रणनीति बनाई और सुरक्षित तरीके से ट्रू समिट तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
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रफ्तार से ज्यादा जरूरी है सही फैसला : राहुल
टीम लीडर राहुल उर्फ रिक्की माउंटेनियर ने कहा कि यह उपलब्धि केवल तेज चढ़ाई का परिणाम नहीं है। इसके पीछे लंबे समय की तैयारी, पर्वतारोहण का अनुभव और पूरी टीम के बीच बेहतर तालमेल रहा। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण में गति महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी सही निर्णय, सुरक्षा और बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करना है।
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