Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- भर्ती नियमों में प्रावधान न हो, तो वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति की मांग करना हक नहीं
भर्ती नियमों में प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) तैयार करने का प्रावधान नहीं है, तो कोई भी अभ्यर्थी चयनित उम्मीदवार के पदभार न संभालने के कारण रिक्त हुए पद पर नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं जता सकता।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मेरिट के आधार पर खाली पद पर नियुक्ति की मांग को लेकर दायर याचिका में स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती नियमों में प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) तैयार करने का प्रावधान नहीं है, तो कोई भी अभ्यर्थी चयनित उम्मीदवार के पदभार न संभालने के कारण रिक्त हुए पद पर नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं जता सकता। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा चूंकि आईआईटी मंडी के 2016 के नियमों में वेटिंग लिस्ट का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। इसलिए संस्थान को नियुक्ति के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने संस्थान को महत्वपूर्ण सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में समय और जनता के पैसे का भारी खर्च होता है। ऐसे में बार-बार नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बजाय, संस्थानों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करके प्रतीक्षा सूची का प्रावधान शामिल करना चाहिए।
जिसके तहत उम्मीदवारों को नई भर्ती प्रक्रिया के इंतजार के बिना खाली पदों पर समायोजित किया जा सकेगा। याचिकाकर्ता ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईटीआई) मंडी में सहायक रजिस्ट्रार के पद के लिए आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के बाद 6 फरवरी, 2025 को परिणाम घोषित किया गया। याचिकाकर्ता मेरिट सूची में चौथे स्थान पर था। जब चयनित शीर्ष तीन उम्मीदवारों में से दो ने पद पर ज्वाइन नहीं किया, तो याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उसे आईटीआई मंडी में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति दी जाए, क्योंकि वह मेरिट सूची में अगले स्थान पर था। चयनित उम्मीदवारों के ज्वाइन न होने की वजह से यह पद खाली रह गया था। आईटीआई मंडी की ओर से दलील दी गई कि संस्थान के नॉन-फैकल्टी स्टाफ भर्ती नियम-2016 के तहत नियमों में वेटिंग लिस्ट तैयार करने का कोई प्रावधान नहीं है। संस्थान का कहना था कि चयन सूची जारी होने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया पूरी मान ली जाती है, चाहे चयनित उम्मीदवार कार्यभार संभालें या नहीं।
तीन साल बाद भी क्षेत्रीय योजनाएं अधूरी, टीसीपी सचिव व्यक्तिगत रूप से तलब
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में नगर नियोजन (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) नियमों के कार्यान्वयन में हो रही अत्यधिक देरी और अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 13 जनवरी 2023 से लंबित निर्देशों का पालन न होने पर नाराजगी जताते हुए सचिव (नगर नियोजन) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राज्य के विभिन्न जिलों (विशेषकर शिमला, कुल्लू और कांगड़ा) के लिए क्षेत्रीय और सेक्टर योजनाओं को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। खंडपीठ ने 18 नवंबर 2024 की उस अधिसूचना को स्थगित रखा है, जिसमें पर्यटन इकाइयों और विशेष व्यावसायिक भवनों के लिए मंजिलों की संख्या 13 से बढ़ाकर 20 करने का प्रस्ताव था।
बड़ोग और कुमारहट्टी में छह मंजिल से ऊपर नहीं बनेगा कोई भवन
अदालत ने कहा कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अधिनियम की धारा 31-ए के तहत भवनों के लिए स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट और मिट्टी की जांच अनिवार्य है, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। कोर्ट ने पाया कि सोलन में कुछ परियोजनाओं के नक्शे पंचायतों की ओर से हस्ताक्षरित किए गए थे। अदालत ने इसे राज्य की जिम्मेदारी का पूर्ण आत्मसमर्पण करार देते हुए कहा कि केवल पंचायत की मंजूरी पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा दायर उस आवेदन पर भी विचार किया, जिसमें भूमि की कमी का हवाला देते हुए पुराने आदेशों में संशोधन की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली सुनवाई को सचिव को यह स्पष्ट करना होगा कि अदालती आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया। अदालत ने 13 जनवरी 2023 को विकास योजनाओं के बाद क्षेत्रीय योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अनुपालन नहीं हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी। सोलन जिले के बड़ोग और कुमारहट्टी क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त आदेश दिया है कि इस क्षेत्र में कोई भी इमारत 6 मंजिल से ऊपर नहीं बनाई जाएगी।