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हिमाचल विधानसभा: सीएम सुक्खू बोले- पीपीपी मोड पर रोपवे परियोजनाएं आगे बढ़ाएगी सरकार

Wed, 02 Sep 2026 02:39 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 02 Sep 2026 02:39 PM IST
सार

 मानसून सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की स्थिति, इनकी लागत, निजी निवेश और पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किए। 

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Himachal: CM says high cost of ropeway construction is a major challenge; govt to advance projects via PPP mod
विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : आईपीआर विभाग

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की स्थिति, इनकी लागत, निजी निवेश और पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किए। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में रोपवे सरकार की प्राथमिकता में हैं, लेकिन इनकी लागत बहुत अधिक होने के कारण कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पीपीपी और ईएपी मोड पर रोपवे बनाने के लिए तैयार है और निजी निवेशकों का स्वागत किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि शिमला में रोपवे लगाने की योजना पर भी काम करने की कोशिश की गई थी। टेंडर के आकलन में इसकी लागत करीब 2,700 करोड़ रुपये आई। अधिक लागत के कारण इस परियोजना पर फैसला नहीं हो सका और इसे रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पिछली कैबिनेट बैठक में पीपीपी और ईएपी मोड पर जाने की बात रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था करने पर विचार कर रही है, जिसमें रोपवे के पीपीपी मोड की अवधि 30 से 35 साल तक सीमित की जा सके। उन्होंने रोपवे निर्माण में निजी निवेशकों से हिमाचल में आने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार उनका स्वागत करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास करीब 1,200 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है और निजी निवेशकों को शिमला आने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि रोपवे के माध्यम से प्रदेश के उन क्षेत्रों को जोड़ा जाए, जहां अभी पहुंच सीमित है। पर्यटन की दृष्टि से अनछुए क्षेत्रों को रोपवे से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। यदि वन संरक्षण अधिनियम यानी एफसीए की मंजूरी के कारण परियोजनाओं में देरी हो रही है तो सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रयास करेगी। भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने हिमानी चामुंडा रोपवे की स्थिति को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार क्योरी से बिलिंग को जोड़ने वाली योजना पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उषा कंपनी ने शिमला और हिमानी चामुंडा दोनों परियोजनाएं ली थीं, लेकिन चार साल तक मामला चलता रहा और कोई काम नहीं हुआ। चिंतपूर्णी के विधायक राकेश कालिया ने चिंतपूर्णी रोपवे को सुविधाजनक बनाने का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुझाव पर उपमुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी और सरकार रोपवे के लिए खुले मन से तैयार है।
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चुराह के विधायक हंसराज ने चंबा में प्रस्तावित तीन रोपवे परियोजनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या इन तीनों परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार के स्तर पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोपवे परियोजनाओं के प्रस्तावों में कई पहलुओं को देखना पड़ता है। कई मामलों में समझौता ज्ञापन यानी एमओयू करने की बात होती है। उन्होंने कहा कि रोपवे सरकार की प्राथमिकता में हैं, लेकिन केवल अध्ययन के लिए पैसा खर्च करना सरकार के लिए संभव नहीं है।  विधायक केवल सिंह पठानिया ने धर्मशाला-नड्डी जिपलाइन का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि पीपीपी मोड में परियोजना के लिए निवेशक क्यों नहीं आ रहे हैं और इसकी फॉरेस्ट क्लीयरेंस कब तक मिल जाएगी। उन्होंने धर्मशाला रोपवे की वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन की बहुत संभावनाएं हैं और रोपवे के माध्यम से अनछुए क्षेत्रों तक पहुंच बनाई जा सकती है। 


इससे पहले कसौली के विधायक संजय अवस्थी के मूल सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एडीबी से प्राप्त ऋण और मदद से प्रदेश में कोई रोपवे परियोजना स्वीकृत या निर्माणाधीन नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पीपीपी मोड के तहत छह रोपवे परियोजनाएं हैं। उद्योग मंत्री ने बताया कि कुल्लू जिले में पलचान-रोहतांग रोपवे की अनुमानित लागत 340 करोड़ रुपये है और इसे अक्तूबर 2028 तक पूरा करने की निर्धारित समय सीमा है। परियोजना के पहले चरण में टावरों का निर्माण पूरा हो चुका है और वर्तमान में रोप डालने का काम चल रहा है। दूसरे चरण में टावरों का निर्माण कार्य जारी है, जबकि तीसरे चरण का निर्माण कार्य शुरू होना बाकी है।

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