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Himachal: बर्फ में दो दिन जिंदा रहने के लिए करते रहे संघर्ष, मौत के बाद भी शवों के पास बैठा रहा कुत्ता

संवाद न्यूज एजेंसी, भरमौर (चंबा)। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 28 Jan 2026 11:33 AM IST
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सार

 दोनों दो दिन अपने कुत्ते के साथ जिंदगी से जंग लड़ते रहे। इसके बाद भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण दोनों युवाओं की मौत हो गई।

Himachal: Two cousins struggled to survive for two days in the snow, dog remained sitting by their dead bodi
विकसित राणा और पीयुष, शव के पास पालतू कुत्ता। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र भरमौर की भरमाणी धार में ट्रैकिंग के दौरान लापता हुए दो ममेरे भाइयों के शव आखिरकार सोमवार को बरामद कर लिए गए। हालांकि, इस दौरान यह बात सामने आई की दोनों दो दिन अपने कुत्ते के साथ जिंदगी से जंग लड़ते रहे। इसके बाद भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण दोनों युवाओं की मौत हो गई। मृतकों की पहचान पीयुष (13) पुत्र विक्रमजीत निवासी घरेड़ और विकसित राणा (18) पुत्र दिवंगत संजय कुमार निवासी मलकोटा भरमौर के रूप में हुई है। हालांकि, कुत्ते ने वफादारी निभाई और चार दिन तक शवों के पास बैठा रहा। जानकारी के अनुसार दोनों युवक 22 जनवरी को ट्रैकिंग करने और वीडियो बनाने के उद्देश्य से भरमाणी धार की ओर ट्रैकिंग पर निकले थे। रात के समय अचानक आए बर्फीले तूफान में उनका टेंट क्षतिग्रस्त हो गया। 23 जनवरी की सुबह बर्फीले तूफान ने ने उन्हें पूरी तरह घेर लिया।

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युवक को फोन कर मदद की गुहार लगाई
 हालात बिगड़ते देख दोनों ने गांव के एक युवक को फोन कर मदद की गुहार लगाई। पुलिस और पर्वतारोहण दल ने भरमाणी माता मंदिर से तीन से चार फीट बर्फ में पैदल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। शाम करीब पांच बजे तक विकसित राणा से फोन पर संपर्क बना रहा, लेकिन जीपीएस लोकेशन भेजने के बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। खराब मौसम के कारण बचाव दल को अभियान बीच में रोककर लौटना पड़ा। 24 और 25 जनवरी को दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ड्रोन और सेना के हेलिकाप्टरों की मदद से युवाओं की तलाश की गई। 26 जनवरी को हेलिकाप्टर के जरिये एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय युवाओं के बचाव दल को पहाड़ी क्षेत्र में उतारा गया, जहां दोनों युवक मृत अवस्था में मिले। शवों को हेलिकाप्टर से भरमौर लाया गया।

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पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं। नागरिक उपमंडल अधिकारी भरमौर विकास शर्मा ने दोनों युवाओं के शव मिलने की पुष्टि की है। भरमाणी मंदिर की धार पर वीडियो बनाने के लिए पहुंचा पीयूष राणा आठवीं कक्षा का छात्र था। उसके परिवार में माता-पिता, दो भाई और तीन बहने हैं। वहीं, विकसित राणा ने दसवीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और वह ब्लॉग बनाता था। पिता की भी मौत हो चुकी है। अब घर पर मां और दादी हैं। इनके साथ पिटबुल नस्ल के कुत्ते का नाम जोनू है।

बचाव दल हेलिकाप्टर से उतरा तो कुत्ते के भौंकने की आवाज सुनी
चंबा जिला के भरमौर में बर्फबारी में लापता दो युवकों की तलाश के दौरान एक दिल दहला देने वाला मंजर सामने आया। रेस्क्यू टीम को पीयूष का शव तो मिला, साथ में उसके पालतू की बफादारी ने सभी को भावुक कर दिया, जो 4 दिन से बिना खाए-पिए पीयूष के पास बैठा था। इस वफादारी की सब ओर चर्चा है। भरमाणी धार में दो युवाओं के साथ उनका कुत्ता भी फंसा था। चार दिन भूखे-प्यासे रहकर प्रचंड ठंड में वह अपने मालिक पीयूष (13) निवासी घरेड़ की रखवाली करता रहा। सोमवार को जैसे ही बचाव दल हेलिकॉप्टर से उतरा तो एक पेड़ के नीचे कुत्ते के भौंकने की आवाज सुनाई दी। नजदीक जाकर देखा तो पीयूष का शव वहां पड़ा था। जब वह उसके पास जाने लगे तो कुत्ते ने भौंकना शुरू कर दिया। चार दिन से यह कुत्ता मालिक की रखवाली कर रहा था। उसे तो यह भी पता नहीं था कि वह जिसकी रखवाली कर रहा है, वह अब इस दुनिया से जा चुका है। बर्फ में कुत्ता कांप रहा था, लेकिन वह अपने मालिक के शव से दूर नहीं जा रहा था, ताकि उसे कोई भी छ न सके। इस मंजर को देखकर बचाव दल भी हैरान रह गया। उन्होंने सबसे पहले कुत्ते को पकड़कर उसका मुंह बांधा और उसे वहां से हटाया। इसके बाद पीयूष के शव को हेलिकाप्टर के जरिये भरमौर पहुंचाया। स्थानीय लोगों ने जैसे ही उस शव को देखा तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए। जब उन्होंने कुत्ते की वफादारी सुनी तो वह उसे सहलाने लगे। कुत्ते को देखकर यही लग रहा था कि यदि कुछ दिन और बचाव दल वहां नहीं पहुंचता तो कुत्ते की भी मौत हो जाती। 

तीन फीट बर्फ में चलकर 30 पर्यटकों की बचाई जान
 किन्नौर और रामपुर जा रहे 30 पर्यटकों के लिए यह बर्फ उस समय दुखदायी बन गई, जब निहरी से 10 किलोमीटर दूर चौकी में फंस गए। जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन को मिली तो राजस्व विभाग निहरी में कार्यरत ऑफिस कानूनगो गंगा राम तीन फीट बर्फ में 10 किलोमीटर पैदल चलकर चौकी गांव पहुंचे। सूचना के अनुसार बौद्ध स्थल रिवालसर से 30 बौद्ध अनुयायियों से भरे वाहन ऊपरी हिमाचल के किन्नौर, रामपुर जा रहे थे। इन्हीं बौद्ध अनुयायियों को बर्फ से रेस्क्यू करने के लिए प्रशासन की तरफ से गंगा राम पहुंच गए। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से पहले इन पर्यटकों को चौकी गांव स्थित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह और लोगो के घरों में ठहराया। बाद में 25 जनवरी की शाम तक इनके रहने और खाने का इंतजाम भी किया। इसी दौरान लोक निर्माण विभाग के एसडीओ और जेई जेसीबी लेकर सड़क खोलने में लग गए। कार्यकारी तहसीलदार निहरी टेक चंद ने बताया कि उक्त बौद्ध अनुयायियों के साथ अन्य वाहन चालकों को भी 25 जनवरी की शाम तक सड़क बहाल कर रवाना कर दिया था।

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