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Shimla Rain: मानसून बरपा रहा कहर, संजौली कॉलेज के पास भूस्खलन से कई मकानों को खतरा, रझाणा में दो गाड़ियां दबीं

Sat, 11 Jul 2026 10:41 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 11 Jul 2026 10:41 AM IST
सार

संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल में भारी भूस्खलन से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है। रझाणा में भूस्खलन की चपेट में आने से दो गाड़ियां मलबे में दब गईं। मिनी कुफ्टाधार में रास्ता ढह गया है। शांकली में भवन का एक हिस्सा गिर गया है।

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monsoon rain is wreaking havoc in shimla; a landslide near Sanjauli College endangers several houses
मलबे में दबी गाड़ी, भूस्खलन से मकानों को खतरा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लगातार दो दिन हुई भारी बारिश से जगह-जगह नुकसान हुआ है।  संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल में भारी भूस्खलन से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है। रझाणा में भूस्खलन की चपेट में आने से दो गाड़ियां मलबे में दब गईं। मिनी कुफ्टाधार में रास्ता ढह गया है। शांकली में भवन का एक हिस्सा गिर गया है। संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में एक बार फिर भारी भूस्खलन हुआ है। शनिवार तड़के करीब 4:00 बजे हुए इस भूस्खलन से इलाके में दहशत का माहौल है। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन कई मकानों पर खतरा पैदा हो गया है। भूस्खलन संजौली कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग के साथ हुआ, जहां सड़क के नीचे का ढंगा ढहकर नीचे बने रिहायशी मकानों की ओर आ गया। 

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रास्ता भी बीच से टूट गया
इससे मकानों तक जाने वाला रास्ता भी बीच से टूट गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन से चार भवन खतरे की जद में हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। घटना के बाद स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और बारिश के बीच खुले में खड़े होकर मदद का इंतजार करते रहे। लोगों का कहना है कि बार-बार फोन करने के बाद कुछ पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और एहतियात के तौर पर मकान खाली करने की सलाह दी। हालांकि, प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं है।

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पूरे क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक निरीक्षण कराया जाए: स्थानीय लोग
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि सुबह से ही वे पार्षद, विधायक और मेयर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को लगातार फोन कर रहे हैं, लेकिन न तो उनका फोन उठाया जा रहा है और न ही कोई उनकी मदद के लिए मौके पर पहुंचा है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में एक निजी निर्माण कार्य के लिए नगर निगम से अनुमति दी गई थी, जिसके बाद पहाड़ी की खुदाई की गई। उनका कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण खुदाई वाली जगह कमजोर हो गई और इसी वजह से भूस्खलन हुआ। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए और पूरे क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक निरीक्षण कराया जाए।

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28 जून 2025 को भी हुआ था भूस्खलन 
गौरतलब है कि इसी स्थान पर 28 जून 2025 को भी भीषण भूस्खलन हुआ था। उस समय पहाड़ी से मलबा और चट्टानें सीधे रिहायशी मकानों में जा घुसी थीं, जिससे कई बच्चे और महिलाएं अपने घरों में फंस गए थे। एक बार फिर उसी क्षेत्र में भूस्खलन होने से स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल है।

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