{"_id":"6359e18c7aaf504d0b2b5e6c","slug":"bhai-dooj-27-october-significance-importance-and-tilak-shubh-muhurt","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhai Dooj 2022: भाईदूज आज भी, जानिए क्या हैं पूजा के नियम और क्यों लगाते है इस दिन भाई-बहन यमुना में डुबकी","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Bhai Dooj 2022: भाईदूज आज भी, जानिए क्या हैं पूजा के नियम और क्यों लगाते है इस दिन भाई-बहन यमुना में डुबकी
Thu, 27 Oct 2022 07:12 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 27 Oct 2022 07:12 AM IST
सार
जो बहनें 27 अक्तूबर को भाई दूज का त्योहार मना रही हैं वे सुबह 11 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक भाईदूज का त्योहार मना सकती है।
विज्ञापन
परंपरा के अनुसार इस दिन भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं। बहनें अपने भाईयों के मस्तक पर चंदन, अक्षत अथवा रोली का तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं फिर दाहिने हाथ में कलावा बांधती हैं।
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दीपों का पर्व दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाईदूज का त्योहार भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक माना गया है। भाईदूज को यम द्वितीया,भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह पर्व 26 और 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना करती है। मत्स्य पुराण के अनुसार 'भाईदूज' को मृत्यु के देवता 'यम' को प्रसन्न करने के लिये उनका षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है आज के दिन जो भाई-बहन मथुरा में यमुनाजी के विश्राम घाट पर स्नान करते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यमराज उनके सभी पापों को क्षमा कर देते हैं। स्नान के बाद दोपहर में बहन के घर भोजन करने और उसे उपहार देने से भाई-बहन दोनों पर यम और यमुना मैया की कृपा रहती है।
कैसे मनाएं भाईदूज
परंपरा के अनुसार इस दिन भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं। बहनें अपने भाईयों के मस्तक पर चंदन, अक्षत अथवा रोली का तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं फिर दाहिने हाथ में कलावा बांधती हैं। कलावा बांधते समय बहनों को यह मंत्र को बोलना चाहिए।
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
उसके पश्चात बहन अक्षत और पुष्प से आशीर्वाद देते हुए भाई के उत्तम स्वास्थ्य एवं कार्य-व्यापार में कामयाबी की कामना करती है। भाई को मिठाई आदि खिलाती है। उपहार स्वरूप भाई भी बहनों को वस्त्राभूषण देकर उन पर अपने स्नेह की बर्षा करते हैं।ध्यान रहे कि तिलक लगाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो,ऐसा करने से भाई को दीर्घायु और धन-सम्पन्नता का आशीर्वाद मिलता है एवं बहन अपना सिर ढककर भाई के तिलक करें।इस दिन भाई-बहन काले रंग के वस्त्र न पहनें,पूजा मैं काले वस्त्र पहनना अशुभ माना गया है। संध्या के समय बहनें भाइयों की लम्बी उम्र की कामना एवं उनकी कीर्ति के लिए यमदेव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से घर के दरवाजे पर सरसों या तिल के तेल वाला चार मुखवाला दीप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाती हैं और यम देवता से परिवार को अनहोनी से बचाने की कामना करती हैं।
विज्ञापन
यमुना मैं स्नान का महत्व-
धार्मिक मान्यता के अनुसार भाई दूज या यम द्वितीया के दिन भाई-बहन का साथ-साथ यमुना नदी में स्नान करने का बहुत महत्व है।इस दिन भाई-बहन हाथ पकड़कर यमुना में डुबकी लगाते हैं।शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से यम की फांस और पापों से मुक्ति मिलती है। इसी मान्यता के साथ यम और यमुना का पूजन कर विश्रामघाट पर भाई-बहन स्नान करते हैं और धर्मराज-यमुनाजी के मंदिर के दर्शन करते हैं। यमुना नदी के पवित्र जल में डुबकी लगाने के बाद दोपहर में बहन के घर जाकर भोजन करके कुछ उपहार दिया जाता है। इस दिन बहन के घर भोजन करने और उसे भेंट देकर खुश करने से भाई के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यदि अपनी सगी बहन न हो तो ममेरी, फुफेरी या मौसेरी बहनों को उपहार देकर ईश्वर का आर्शीवाद प्राप्त कर सकते हैं। जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथ का बना हुआ भोजन करता है, उसे धर्म, धन, अर्थ, आयुष्य और अनेकों प्रकार के सुख मिलते हैं। साथ ही इस दिन संध्या के समय तुलसी के नीचे,शिवमंदिर में,पीपल के नीचे,घर के बाहर एवं निर्जन स्थान पर चार बत्तियों से युक्त दीपक जलाकर दीप-दान करना भी बहुत फलदायी होता है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन सुबह चन्द्रमा के दर्शन करने से भाई-बहन के जीवन में सुख-शांति आती है।
भाई दूज 27 अक्तूबर-शुभ मुहूर्त
जो बहनें 27 अक्तूबर को भाई दूज का त्योहार मना रही हैं वे सुबह 11 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक भाईदूज का त्योहार मना सकती है। इसके अलावा भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में भी रहेगा। 27 अक्तूबर का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
November Horoscope 2022: नवंबर महीने में किसका होगा भाग्योदय, किसे मिलेंगे शानदार मौके? पढ़ें मासिक राशिफल
विज्ञापन
कैसे मनाएं भाईदूज
परंपरा के अनुसार इस दिन भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं। बहनें अपने भाईयों के मस्तक पर चंदन, अक्षत अथवा रोली का तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं फिर दाहिने हाथ में कलावा बांधती हैं। कलावा बांधते समय बहनों को यह मंत्र को बोलना चाहिए।
विज्ञापन
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
उसके पश्चात बहन अक्षत और पुष्प से आशीर्वाद देते हुए भाई के उत्तम स्वास्थ्य एवं कार्य-व्यापार में कामयाबी की कामना करती है। भाई को मिठाई आदि खिलाती है। उपहार स्वरूप भाई भी बहनों को वस्त्राभूषण देकर उन पर अपने स्नेह की बर्षा करते हैं।ध्यान रहे कि तिलक लगाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो,ऐसा करने से भाई को दीर्घायु और धन-सम्पन्नता का आशीर्वाद मिलता है एवं बहन अपना सिर ढककर भाई के तिलक करें।इस दिन भाई-बहन काले रंग के वस्त्र न पहनें,पूजा मैं काले वस्त्र पहनना अशुभ माना गया है। संध्या के समय बहनें भाइयों की लम्बी उम्र की कामना एवं उनकी कीर्ति के लिए यमदेव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से घर के दरवाजे पर सरसों या तिल के तेल वाला चार मुखवाला दीप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाती हैं और यम देवता से परिवार को अनहोनी से बचाने की कामना करती हैं।
विज्ञापन
यमुना मैं स्नान का महत्व-
धार्मिक मान्यता के अनुसार भाई दूज या यम द्वितीया के दिन भाई-बहन का साथ-साथ यमुना नदी में स्नान करने का बहुत महत्व है।इस दिन भाई-बहन हाथ पकड़कर यमुना में डुबकी लगाते हैं।शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से यम की फांस और पापों से मुक्ति मिलती है। इसी मान्यता के साथ यम और यमुना का पूजन कर विश्रामघाट पर भाई-बहन स्नान करते हैं और धर्मराज-यमुनाजी के मंदिर के दर्शन करते हैं। यमुना नदी के पवित्र जल में डुबकी लगाने के बाद दोपहर में बहन के घर जाकर भोजन करके कुछ उपहार दिया जाता है। इस दिन बहन के घर भोजन करने और उसे भेंट देकर खुश करने से भाई के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यदि अपनी सगी बहन न हो तो ममेरी, फुफेरी या मौसेरी बहनों को उपहार देकर ईश्वर का आर्शीवाद प्राप्त कर सकते हैं। जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथ का बना हुआ भोजन करता है, उसे धर्म, धन, अर्थ, आयुष्य और अनेकों प्रकार के सुख मिलते हैं। साथ ही इस दिन संध्या के समय तुलसी के नीचे,शिवमंदिर में,पीपल के नीचे,घर के बाहर एवं निर्जन स्थान पर चार बत्तियों से युक्त दीपक जलाकर दीप-दान करना भी बहुत फलदायी होता है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन सुबह चन्द्रमा के दर्शन करने से भाई-बहन के जीवन में सुख-शांति आती है।
भाई दूज 27 अक्तूबर-शुभ मुहूर्त
जो बहनें 27 अक्तूबर को भाई दूज का त्योहार मना रही हैं वे सुबह 11 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक भाईदूज का त्योहार मना सकती है। इसके अलावा भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में भी रहेगा। 27 अक्तूबर का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
November Horoscope 2022: नवंबर महीने में किसका होगा भाग्योदय, किसे मिलेंगे शानदार मौके? पढ़ें मासिक राशिफल