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Holika Dahan 2026: जानिए क्यों की जाती है होली से पहले अग्नि की पूजा ? जानिए धार्मिक मान्यताएं
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Mon, 02 Mar 2026 07:22 PM IST
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सार
होलिका पूजा और दहन का खास महत्व होता है ऐसी मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान अग्नि की विधि-विधान से पूजा करने से मनुष्य के सभी दुखों का नाश होता है, घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
holika dahan
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व रंगों का त्योहार होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस साल 2 मार्च को होलिका दहन होगा और 4 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व में जितना महत्व रंगों का है उतना ही होलिका दहन का भी है। मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान अग्नि की विधि-विधान से पूजा करने से मनुष्य के सभी दुखों का नाश होता है, घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
होलिका दहन और अग्नि पूजा का महत्व
होली के दिन होलिका दहन से पूर्व अग्नि की पूजा करने का विधान है। अग्निदेव की पूजा और उनसे मिलने वाले आशीर्वाद से अच्छी सेहत और दीर्घायु प्राप्त होती है। होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का माध्यम भी है।
नारायण का ही रूप हैं अग्निदेव
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के अनन्य रूपों में से एक रूप अग्निदेव का है। अतः इस दिन अग्नि पूजा का विशेष महत्व है। अनेक पुराणों एवं वास्तु के अनुसार परमब्रह्म अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं, जो सभी जीवों के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं।
पंचतत्व में अग्नि का विशेष स्थान
अग्निदेव सभी जीवों के साथ एक समान न्याय करते हैं। सनातन धर्म को मानने वाले सभी लोग भक्त प्रह्लाद पर आए संकट को टालने और अग्निदेव द्वारा ताप के बदले उन्हें शीतलता देने की विनती करते हैं। मानव शरीर में आत्मारूपी अग्नि अपनी ऊर्जाएँ फैलाए हुए है, जिससे ही जीवन संचालित होता है।
होलिका दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ नया अन्न यानी गेहूं, जौ एवं चना की हरी बालियों को लेकर पवित्र अग्नि में समर्पित करना चाहिए। यह समर्पण नई फसल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
प्रसाद रूप में बालियों का सेवन
बालियों को अग्नि में सेककर परिवार के सभी सदस्यों को उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से घर में शुभता का आगमन होता है और पारिवारिक एकता भी मजबूत होती है। धर्मरूपी होली की अग्नि को अतिपवित्र माना गया है, इसलिए लोग इस अग्नि को अपने घर लाकर चूल्हा जलाते हैं। कहीं-कहीं इस अग्नि से अखंड दीप जलाने की भी परंपरा है।
दक्षिण-पूर्व दिशा में अखंड दीप का महत्व
माना जाता है कि इससे न केवल कष्ट दूर होते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि भी आती है। यदि आप होली की अग्नि से अखंड दीपक जला रहे हैं तो इसे घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना गया है। इस दिशा में दीपक रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों को प्रसिद्धि प्राप्त होती है।
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होलिका दहन और अग्नि पूजा का महत्व
होली के दिन होलिका दहन से पूर्व अग्नि की पूजा करने का विधान है। अग्निदेव की पूजा और उनसे मिलने वाले आशीर्वाद से अच्छी सेहत और दीर्घायु प्राप्त होती है। होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का माध्यम भी है।
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नारायण का ही रूप हैं अग्निदेव
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के अनन्य रूपों में से एक रूप अग्निदेव का है। अतः इस दिन अग्नि पूजा का विशेष महत्व है। अनेक पुराणों एवं वास्तु के अनुसार परमब्रह्म अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं, जो सभी जीवों के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं।
पंचतत्व में अग्नि का विशेष स्थान
अग्निदेव सभी जीवों के साथ एक समान न्याय करते हैं। सनातन धर्म को मानने वाले सभी लोग भक्त प्रह्लाद पर आए संकट को टालने और अग्निदेव द्वारा ताप के बदले उन्हें शीतलता देने की विनती करते हैं। मानव शरीर में आत्मारूपी अग्नि अपनी ऊर्जाएँ फैलाए हुए है, जिससे ही जीवन संचालित होता है।
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नया अन्न समर्पित करने की परंपराहोलिका दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ नया अन्न यानी गेहूं, जौ एवं चना की हरी बालियों को लेकर पवित्र अग्नि में समर्पित करना चाहिए। यह समर्पण नई फसल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
प्रसाद रूप में बालियों का सेवन
बालियों को अग्नि में सेककर परिवार के सभी सदस्यों को उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से घर में शुभता का आगमन होता है और पारिवारिक एकता भी मजबूत होती है। धर्मरूपी होली की अग्नि को अतिपवित्र माना गया है, इसलिए लोग इस अग्नि को अपने घर लाकर चूल्हा जलाते हैं। कहीं-कहीं इस अग्नि से अखंड दीप जलाने की भी परंपरा है।
दक्षिण-पूर्व दिशा में अखंड दीप का महत्व
माना जाता है कि इससे न केवल कष्ट दूर होते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि भी आती है। यदि आप होली की अग्नि से अखंड दीपक जला रहे हैं तो इसे घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना गया है। इस दिशा में दीपक रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों को प्रसिद्धि प्राप्त होती है।