{"_id":"69f2fa2e23e8bf490a0bb0e4","slug":"buddh-purnima-2026-vaishakh-purnima-date-time-puja-vidhi-daan-significance-2026-04-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Buddh Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा कल, जानिए नियम, दान और वैशाख पूर्णिमा का महत्व","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Buddh Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा कल, जानिए नियम, दान और वैशाख पूर्णिमा का महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:21 PM IST
विज्ञापन
सार
Buddh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और महानिर्वाण हुआ था। बुद्ध पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व होता है।
बुद्ध पूर्णिमा 2026
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
Buddh Purnima 2026: शुक्रवार, 01 मई को बुद्ध पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। वैशाख माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा, पीपल पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दान, पूजा और जप करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और भगवान बुद्ध की पूजा करने का विधान होता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध पूर्णिमा भी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर भगवान विष्णु ने नौवां अवतार भगवान बुद्ध के रूप में लिया था। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 01 मई को है। ऐसे में आइए जानते हैं वैखाख पूर्णिमा की तिथि और महत्व के बारे में।
बुद्ध पूर्णिमा 2026 तिथि
वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल रात को 09 बजकर 12 से आरंभ हो रही है, जिसका समापन 01 मई को रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा 01 मई 2026 को मनाई जाएगी।
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान बुद्ध जिनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था , उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था। सिद्धार्थ का जन्म एक राजा के यहां हुआ जिनके पास सुख-सुविधा और ऐशोआराम की सभी तरह की विलासिता से भरा-पूरा जीवन था । लेकिन सिद्धार्थ बचपन में ही सत्य की खोज के लिए राजमहल को त्यागकर बाहर निकल पड़े। वर्षों की तपस्या और साधना के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन ही इन्हें ज्ञान की प्राप्त हुई। बुद्ध पूर्णिमा के दिन दया, अहिंसा, ध्यान और ज्ञान की खोज और इसी रास्ते पर चलने का अवसर मिला। भगवान बुद्ध की अहिंसा की शिक्षा से दुनिया पर असर दिखा और लोगों को शांति, करुणा और सद्भाव से जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी।
बुद्ध पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन खिलाना चाहिए साथ ही वस्त्र और कुछ धन का दान करें । इससे जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें और सफेद चीजों का दान करें। बुद्ध पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन जल से भरा घड़ा, पंखा, छाता और कपड़े दान करने से पुरखों की कृपा प्राप्ति होती है।
बुद्ध पूर्णिमा के कुछ नियमों का ध्यान से पालन करना आवश्यक होता है। इस दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए, किसी से बेवजह लड़ाई-झगड़ों से बचना चाहिए , किसी को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। इस दिन धैर्य और शांति और संयमित रहकर लोगों से व्यवहार करना चाहिए। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से हमें यह शिक्षा मिलती है कि असली शांति और सुख बाहर नहीं बल्कि खुद के अंदर मौजूद होती है। व्यक्ति को पहले स्वयं पर विजय करना चाहिए।
Trending Videos
बुद्ध पूर्णिमा 2026 तिथि
वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल रात को 09 बजकर 12 से आरंभ हो रही है, जिसका समापन 01 मई को रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा 01 मई 2026 को मनाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान बुद्ध जिनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था , उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था। सिद्धार्थ का जन्म एक राजा के यहां हुआ जिनके पास सुख-सुविधा और ऐशोआराम की सभी तरह की विलासिता से भरा-पूरा जीवन था । लेकिन सिद्धार्थ बचपन में ही सत्य की खोज के लिए राजमहल को त्यागकर बाहर निकल पड़े। वर्षों की तपस्या और साधना के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन ही इन्हें ज्ञान की प्राप्त हुई। बुद्ध पूर्णिमा के दिन दया, अहिंसा, ध्यान और ज्ञान की खोज और इसी रास्ते पर चलने का अवसर मिला। भगवान बुद्ध की अहिंसा की शिक्षा से दुनिया पर असर दिखा और लोगों को शांति, करुणा और सद्भाव से जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी।
Vat Savitri Vrat 2026: इस दिन रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, पूजा के लिए मिलेंगे 4 खास मुहूर्त
बुद्ध पूर्णिमा पर दान का महत्वबुद्ध पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन खिलाना चाहिए साथ ही वस्त्र और कुछ धन का दान करें । इससे जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें और सफेद चीजों का दान करें। बुद्ध पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन जल से भरा घड़ा, पंखा, छाता और कपड़े दान करने से पुरखों की कृपा प्राप्ति होती है।
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा कल, सुख-समृद्धि और लाभ के लिए करें ये 5 सरल उपाय
बुद्ध पूर्णिमा के नियमबुद्ध पूर्णिमा के कुछ नियमों का ध्यान से पालन करना आवश्यक होता है। इस दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए, किसी से बेवजह लड़ाई-झगड़ों से बचना चाहिए , किसी को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। इस दिन धैर्य और शांति और संयमित रहकर लोगों से व्यवहार करना चाहिए। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से हमें यह शिक्षा मिलती है कि असली शांति और सुख बाहर नहीं बल्कि खुद के अंदर मौजूद होती है। व्यक्ति को पहले स्वयं पर विजय करना चाहिए।
