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Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद फौरन करना चाहिए ये 5 काम, दूर होंगी सभी नकारात्मकता
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Tue, 03 Mar 2026 12:40 PM IST
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सार
Chandra Grahan Upay 2026: चंद्र ग्रहण आज देश में दिखाई देगा जिसके चलते इसका सूतक काल प्रभावी रहेगा। आज ग्रहण शाम को खत्म होगा। शास्त्रों में ग्रहण के खत्म होने के बाद कुछ उपाय बहुत ही प्रभावी माने जाते हैं।
Chandra Grahan 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Chandra Grahan Upay 2026: आज 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावकारी समय माना गया है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण की सूक्ष्म ऊर्जा में परिवर्तन होता है,जिससे नकारात्मकता बढ़ती है इसलिए इस समय जप, तप, स्नान और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से चंद्र ग्रहण के पश्चात स्नान करके श्रद्धा भाव से दान करना पुण्यदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इससे मानसिक अशांति, नकारात्मकता और कष्टों में कमी आती है तथा घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
स्नान और शुद्धि का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करना उत्तम बताया गया है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद ही दान का विधान बताया गया है। यह क्रम शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
चावल का दान
चंद्रमा का संबंध श्वेत रंग और शीतल स्वभाव से जोड़ा जाता है। इसलिए चंद्र ग्रहण के बाद सफेद वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया है। चावल का दान चंद्र दोष की शांति के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चावल दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है।
दूध और दही का दान
दूध, दही और अन्य श्वेत पदार्थ चंद्रमा के कारक माने गए हैं। ग्रहण के बाद इनका दान करने से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है। जरूरतमंदों को दूध या उससे बने पदार्थों का दान करना विशेष पुण्यदायी बताया गया है।
सफेद वस्त्र शुद्धता और सादगी का प्रतीक माने जाते हैं। चंद्र ग्रहण के बाद सफेद वस्त्रों का दान करने से चंद्रमा की शुभता प्राप्त होने की मान्यता है। इसके अलावा चांदी का संबंध भी चंद्र ग्रह से माना गया है। सामर्थ्य अनुसार चांदी का सिक्का या छोटा आभूषण दान करना भी शुभ फलदायी बताया गया है।
ग्रहण के पश्चात अन्न दान को श्रेष्ठ माना गया है। विशेषकर खीर, मीठे चावल या अन्य श्वेत मिठाई का दान करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में अन्न-धन की वृद्धि होती है और दरिद्रता दूर होती है। जरूरतमंदों को भोजन कराना सबसे बड़ा दान माना गया है, जो अनेक गुना फल प्रदान करता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार दान सदैव श्रद्धा, विनम्रता और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। दिखावे के लिए किया गया दान अपेक्षित फल नहीं देता, जबकि सच्चे मन से किया गया छोटा-सा दान भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
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स्नान और शुद्धि का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करना उत्तम बताया गया है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद ही दान का विधान बताया गया है। यह क्रम शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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चावल का दान
चंद्रमा का संबंध श्वेत रंग और शीतल स्वभाव से जोड़ा जाता है। इसलिए चंद्र ग्रहण के बाद सफेद वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया है। चावल का दान चंद्र दोष की शांति के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चावल दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है।
दूध और दही का दान
दूध, दही और अन्य श्वेत पदार्थ चंद्रमा के कारक माने गए हैं। ग्रहण के बाद इनका दान करने से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है। जरूरतमंदों को दूध या उससे बने पदार्थों का दान करना विशेष पुण्यदायी बताया गया है।
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सफेद वस्त्र और चांदी का दानसफेद वस्त्र शुद्धता और सादगी का प्रतीक माने जाते हैं। चंद्र ग्रहण के बाद सफेद वस्त्रों का दान करने से चंद्रमा की शुभता प्राप्त होने की मान्यता है। इसके अलावा चांदी का संबंध भी चंद्र ग्रह से माना गया है। सामर्थ्य अनुसार चांदी का सिक्का या छोटा आभूषण दान करना भी शुभ फलदायी बताया गया है।
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अन्न और मीठे पदार्थों का दानग्रहण के पश्चात अन्न दान को श्रेष्ठ माना गया है। विशेषकर खीर, मीठे चावल या अन्य श्वेत मिठाई का दान करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में अन्न-धन की वृद्धि होती है और दरिद्रता दूर होती है। जरूरतमंदों को भोजन कराना सबसे बड़ा दान माना गया है, जो अनेक गुना फल प्रदान करता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार दान सदैव श्रद्धा, विनम्रता और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। दिखावे के लिए किया गया दान अपेक्षित फल नहीं देता, जबकि सच्चे मन से किया गया छोटा-सा दान भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
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