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Kab Hai Ekadashi: 10 या 11 जुलाई कब है योगिनी एकादशी ? जानिए पूजा विधि और श्रीहरि कृपा पाने के उपाय
Thu, 09 Jul 2026 10:30 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 09 Jul 2026 10:30 AM IST
सार
Kab Hai Ekadashi: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी का व्रत रखने से पुण्य की प्राप्त होती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।
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योगिनी एकादशी 2026 तिथि, पूजा विधि और व्रत के नियम
- फोटो : AI
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विस्तार
Kab Hai Ekadashi: सनातन धर्म में विश्वास रखने वालों के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी व्यक्ति के सभी तरह के पापों को नष्ट करने वाली, भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने वाली और जीवन में सुख-समृद्धि वाली मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओंके अनुसार, आषाढ़ माह की योगिनी एकादशी का व्रत रखने से और भगवान विष्णु की विधि -विधान से पूजा करने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन कराने के बराबर का पुण्य फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कब है एकादशी, पूजा विधि और महत्व के बारे में।
योगिनी एकादशी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की एकादशी तिथि की शुरुआत, 09 जुलाई को रात 09 बजकर 31 मिनट के होगी, जो 10 जुलाई की रात 10 बजकर 11 मिनट तक चलेगी, फिर इसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर एकादशी 10 जुलाई को मनाई जाएगी और पारण 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 08 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
योगिनी एकादशी पूजा विधि
-सबसे पहले एकादशी तिथि पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए व्रत का संपल्प लें।
- घर में स्थित पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटों को स्थापित करें।
- फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा में पीले फूल, अक्षत, चंदन, माला और भोग को अर्पित करें। भोग में तुलसी दल जरूर होनी चाहिए।
- भोग लगाने के बाद भगवान विष्णु को घी के दीपक जलाएं।
- एकादशी पर पूजा के दौरान व्रत कथा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और आखिरी में आरती उतारें।
- रात में भगवान विष्णु क मंत्रों का जाप और कीर्तन करने का विशेष विधान होता है।
- व्रत के पारण करने से पहले किसी ब्राह्राण या जरूरमंद को दान-दक्षिणा और भोजन जरूर दें।
एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं
-एकादशी पर व्रत रखें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और कथा सुनें।
- एकादशी पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए माथे पर पीला चंदन और पीले वस्त्र पहनें।
- इस तिथि पर भगवान विष्णु को पीली वस्तुओं को भोग और तुलसी दल अर्पित करना ना भूले।
- एकादशी पर दान जरूर करें और ब्राह्राण व जरूतमंदों को भोजन खिलाएं।
- एकादशी पर चावल का सेवन करने से बचें।
- एकादशी तिथि पर मन, कर्म और वचन से पूरी तरह सात्विक रहें और ब्रहाचर्य के नियमों का पालन करें।
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा कुबेर के श्राप से कोढ़ी होकर हेममाली नामक यक्ष मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने योगबल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया,और योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी। यक्ष ने ऋषि की बात मान कर व्रत किया और दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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योगिनी एकादशी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की एकादशी तिथि की शुरुआत, 09 जुलाई को रात 09 बजकर 31 मिनट के होगी, जो 10 जुलाई की रात 10 बजकर 11 मिनट तक चलेगी, फिर इसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर एकादशी 10 जुलाई को मनाई जाएगी और पारण 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 08 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
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योगिनी एकादशी पूजा विधि
-सबसे पहले एकादशी तिथि पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए व्रत का संपल्प लें।
- घर में स्थित पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटों को स्थापित करें।
- फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा में पीले फूल, अक्षत, चंदन, माला और भोग को अर्पित करें। भोग में तुलसी दल जरूर होनी चाहिए।
- भोग लगाने के बाद भगवान विष्णु को घी के दीपक जलाएं।
- एकादशी पर पूजा के दौरान व्रत कथा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और आखिरी में आरती उतारें।
- रात में भगवान विष्णु क मंत्रों का जाप और कीर्तन करने का विशेष विधान होता है।
- व्रत के पारण करने से पहले किसी ब्राह्राण या जरूरमंद को दान-दक्षिणा और भोजन जरूर दें।
एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं
-एकादशी पर व्रत रखें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और कथा सुनें।
- एकादशी पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए माथे पर पीला चंदन और पीले वस्त्र पहनें।
- इस तिथि पर भगवान विष्णु को पीली वस्तुओं को भोग और तुलसी दल अर्पित करना ना भूले।
- एकादशी पर दान जरूर करें और ब्राह्राण व जरूतमंदों को भोजन खिलाएं।
- एकादशी पर चावल का सेवन करने से बचें।
- एकादशी तिथि पर मन, कर्म और वचन से पूरी तरह सात्विक रहें और ब्रहाचर्य के नियमों का पालन करें।
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा कुबेर के श्राप से कोढ़ी होकर हेममाली नामक यक्ष मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने योगबल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया,और योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी। यक्ष ने ऋषि की बात मान कर व्रत किया और दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।
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