karwa chauth 2021: करवा चौथ में क्यों निभाई जाती है सरगी की परंपरा, जानिए इसका महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Sun, 24 Oct 2021 06:37 AM IST

सार

इस बार 24 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत। जानिए करवा चौथ पर क्या होता है सरगी का महत्व और सरगी खाने के लिए क्या होता है सही समय।
करवा चौथ सरगी की थाली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
करवा चौथ सरगी की थाली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
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विस्तार

हिंदू धर्म को मानने वाली शादी-शुदा महिलाओं के लिए करवा चौथ का दिन बेहद ही खास होता है। महिलाएं कई दिन पहले से ही करवा चौथ की तैयारियां शुुरु कर देती हैं। इस दिन महिलाएं सुख वैवाहिक जीवन और अपने पति की दीर्घायु की कामना के साथ व्रत करती हैं। यह दिन पति-पत्नी के प्रेम और उनके मजबूत रिश्ते को दर्शाता है। इस बार करवा चौथ का त्योहार 24 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को मनाया जाएगा। वैसे तो महिलाएं अपने घर की परंपरा के अनुसार करवा चौथ का व्रत और पूजन करते हैं लेकिन ज्यादातर जगहों पर सरगी की परंपरा निभाई जाती है। तो चलिए जानते हैं कि क्या होती है सरगी और करवा चौथ में सरगी का महत्व।
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क्या होती है सरगी, जानिए महत्व
करवा चौथ में सास के द्वारा अपनी बहू को सरगी दी जाती है जिसमें खाने की चीजें जैसे फल, सूखे मेवे, मिष्ठान और मीठी सेवइयां आदि चीजें होती हैं। इसके अलावा सरगी की थाली में श्रंगार का सामान जैसे, चूड़ी, सिंदूर, महावर, बिंदी, कुमकुम, साड़ी आदि चीजें शामिल होती है। सुहागिन स्त्रियों के लिए यह सारी चीजें सास की ओर से आशीर्वाद स्वरुप होती हैं। सास इन सभी चीजों के साथ अपनी बहू को सुखी वैवाहिक जीवन व सौभाग्यवती का आशीर्वाद देती हैं। सास अपने हाथों से बहू के लिए सरगी में खाने के लिए व्यंजन बनाती है, जिसे खाकर महिलाएं करवाचौथ के व्रत का आरंभ करती हैं। यदि किसी स्त्री की सास न हो तो मां, बहन या जेठानी आदि की तरफ से भी सरगी दी जा सकती है।

 

क्यों खाई जाती है सरगी?
करवा चौथ का व्रत पूरे दिन निर्जला यानी बिना पानी के रखा जाता है व इस व्रत को रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने का बाद ही पारण किया जाता है। करवा चौथ के व्रत को अत्यंत कठिन माना जाता है इसलिए प्रातः सरगी खाई जाती है। सरगी में पौष्टिक और सुपाच्य चीजों को शामिल किया जाता है ताकि पूरे दिन व्रत में ऊर्जा बनी रहे।

सरगी खाने का सही समय?
सूर्योदय के समय से ही व्रत का आरंभ हो जाता है इसलिए सूर्योदय होने से पहले ही भोर में सरगी खा लेनी चाहिए। सरगी खाने के लिए प्रातः जल्दी तीन बजे से लेकर चार बजे तक का समय सही रहता है। 





 
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