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Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या है इसका धार्मिक महत्व, जानें
Fri, 11 Apr 2025 04:02 PM IST
दीक्षा पाठक
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Fri, 11 Apr 2025 04:02 PM IST
सार
Importance Of Cow Dung: आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पहले के समय में घर को गोबर से क्यों लीपा जाता है। क्या ये सिर्फ एक चली आ रही कोई परंपरा थी, या इसके पीछे कुछ कारण भी थे? आइए जानते हैं।
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क्यों गोबर से लीपा जाता था घर?
- फोटो : freepik.com
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विस्तार
आज भी जब हम गांव जाते हैं तो सुबह की पहली किरण के साथ जो सोंधी खुशबू उठती थी, वह सिर्फ मिट्टी की नहीं, गोबर से लिपे आंगनों की होती थी। यह परंपरा असल में सनातन धर्म की उन गहराइयों से जुड़ी है जहां हर वस्तु का एक दिव्य और व्यावहारिक अर्थ छुपा होता है। गोबर से घर लीपने से वह शुद्ध और ठंडा बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पहले के समय में घर को गोबर से क्यों लीपा जाता है। क्या ये सिर्फ एक चली आ रही कोई परंपरा थी, या इसके पीछे कुछ कारण भी थे? आइए जानते हैं।
क्यों गोबर से लीपा जाता था घर?
सनातन परंपरा में गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले जब घर के आंगन को गोबर से लिपा जाता है, तो वह सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि भूमि को ऊर्जा देने की एक क्रिया होती है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए कहते हैं, “गोमय वसते लक्ष्मी”। इसका अर्थ यही है कि जहां गोबर है, वहां समृद्धि, सकारात्मकता और पवित्रता खुद आ जाती है।
पंचगव्य बनाने में भी आता है काम
गोबर केवल धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि यह पंचगव्य का भी एक आवश्यक हिस्सा है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी आदि शामिल है। इन पांच तत्वों का मिश्रण न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि यह आयुर्वेद में एक औषधीय तत्व के रूप में भी प्रयोग होता है। कुछ पुराणों में यह साफ बताया गया है कि पंचगव्य का सेवन पापों को हरने वाला और रोगों को मिटाने वाला होता है।
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शुभ कार्य के दौरान गोबर का किया जाता है इस्तेमाल
धार्मिक ग्रंथों में गोबर का जो स्थान है, इसे किसी भी प्रकार से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है। अथर्ववेद से लेकर गरुड़ पुराण और मनुस्मृति तक में गोबर और गाय से जुड़े पदार्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसलिए जब भी घर में कई त्यौहार मनाया जाता है या फिर कोई शुभ कार्य, जैसे कि हवन या पूजा किया जाता है तो पूरे घर को गोबर से लीपा जाता है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि हो।
घर में मक्खियों, मच्छरों को भी दूर भगाता है गोबर
बता दें कि गोबर कीट-पतंगों से रक्षा करने में काफी असरदार साबित होता है। गोबर से घर में मक्खियां, मच्छर, और कीट दूर रहते हैं। यही कारण है कि गांवों में गोबर से लिपे घरों में रोगों का प्रकोप कम देखा गया है। इसके अलावा, यह पूरी तरह जैविक है, पर्यावरण के अनुकूल है, और धरती को हानि नहीं पहुंचाता।
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क्यों गोबर से लीपा जाता था घर?
सनातन परंपरा में गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले जब घर के आंगन को गोबर से लिपा जाता है, तो वह सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि भूमि को ऊर्जा देने की एक क्रिया होती है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए कहते हैं, “गोमय वसते लक्ष्मी”। इसका अर्थ यही है कि जहां गोबर है, वहां समृद्धि, सकारात्मकता और पवित्रता खुद आ जाती है।
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पंचगव्य बनाने में भी आता है काम
गोबर केवल धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि यह पंचगव्य का भी एक आवश्यक हिस्सा है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी आदि शामिल है। इन पांच तत्वों का मिश्रण न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि यह आयुर्वेद में एक औषधीय तत्व के रूप में भी प्रयोग होता है। कुछ पुराणों में यह साफ बताया गया है कि पंचगव्य का सेवन पापों को हरने वाला और रोगों को मिटाने वाला होता है।
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शुभ कार्य के दौरान गोबर का किया जाता है इस्तेमाल
धार्मिक ग्रंथों में गोबर का जो स्थान है, इसे किसी भी प्रकार से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है। अथर्ववेद से लेकर गरुड़ पुराण और मनुस्मृति तक में गोबर और गाय से जुड़े पदार्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसलिए जब भी घर में कई त्यौहार मनाया जाता है या फिर कोई शुभ कार्य, जैसे कि हवन या पूजा किया जाता है तो पूरे घर को गोबर से लीपा जाता है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि हो।
घर में मक्खियों, मच्छरों को भी दूर भगाता है गोबर
बता दें कि गोबर कीट-पतंगों से रक्षा करने में काफी असरदार साबित होता है। गोबर से घर में मक्खियां, मच्छर, और कीट दूर रहते हैं। यही कारण है कि गांवों में गोबर से लिपे घरों में रोगों का प्रकोप कम देखा गया है। इसके अलावा, यह पूरी तरह जैविक है, पर्यावरण के अनुकूल है, और धरती को हानि नहीं पहुंचाता।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।